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आज के अखबार : ममता के घर छापे में शून्य बरामदगी की खबर टाइम्स ऑफ इंडिया और टेलीग्राफ में ही है  

Front page of a newspaper reporting CID searches of Mamata Banerjee’s premises, with a bold headline and a photo of investigators outside a building.

झोला उठा कर चल दूंगा बनाम कुर्सी से चिपके रहने के 12 साल पूरे होने का जश्न फीका लग रहा है

संजय कुमार सिंह

हिन्दुस्तान टाइम्स ने आज सत्ता में मोदी के 12 साल पूरे होने की खबर को लीड बनाया है लेकिन भाजपा ने बदलाव की प्रशंसा की – का आड़ लिया है। शीर्षक है – मोदी ने 12 साल पूरे किए, भाजपा ने बदलाव की प्रशंसा की। दैनिक भास्कर ने लीड जैसी खबर बनाने के लिए मुख्यमंत्री के कार्यकाल को भी जोड़ दिया है और शीर्षक है – 9013 दिन से सत्ता के शिखर पर रहने वाले एकमात्र नेता बने मोदी। इसके साथ दूसरी खबर है, मानसून की रफ्तार तेज, लेकिन देशभर में अब भी सामान्य से 22 प्रतिशत कम बारिश। जाहिर है बाकी खबरों को इन दोनों से कम महत्व दिया गया है। वैसे, कहा जा सकता है कि अखबार प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा में पगलाए नहीं दिख रहे हैं और हेडलाइन मैनेजमेंट का असर पहले जैसा नहीं है। इसका मतलब यह भी नहीं है कि काम की खबरें लीड बनने लगी हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों के मामले के साथ ममता बनर्जी के घर पर  छापा जैसी खबरें होने के बावजूद प्रचार वाली खबरों को प्राथमिकता मिली है। राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज किए जाने जैसी खबर भी है। लेकिन अमर उजाला की लीड का शीर्षक है – पीओके में निर्दोषों की हत्या पाकिस्तान की बर्बरता मानवाधिकार उल्लंघन पर जवाबदेह ठहराए दुनिया। उपशीर्षक और दिलचस्प है – भारत ने कहा, अपनी नाकामियां छिपाने के लिए दुष्प्रचार का सहारा ले रहा है पाकिस्तान। कहने की जरूरत नहीं है कि मोदी सबसे लंबे समय तक सत्ता संभालने वाले पीएम हो गए – गैर जरूरी प्रचार वाली खबर ही है जो पूरी प्रमुखता से छपी है। नरेन्द्र मोदी अगर वाकई लोकप्रिय हैं तब भी दूसरी लाइन का नेतृत्व तैयार करने के बारे में सन्नाटा है। पार्टी में योग्य नेताओं की कमी या बहुलता – जो कहिए सार्वजनिक है। मोदी महान तब होते जब दूसरों का आगे बढ़ाते जिसे बढ़ाया है वह भी सार्वजनिक है, पर अलग मुद्दा है।

आज नवोदय टाइम्स की लीड भी सरकारी प्रचार ही है और वह है, नीट पर खुद पीएम की नजर। सुरक्षा के अभेद्य चक्रव्यूह में होगी परीक्षा। इसके साथ छपी फोटो का शीर्षक है, हकीकत के करीब पहुंचा एक सपना। इस फोटा का कैप्शन है, मिनीमर्ग (लद्दाख) : जोजिला सुरंग से मंगलवार को गुजरते वाहन। देश की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक, जोजिला सुंरग में एक विस्फोट के बाद अंतिम ब्रेकथ्रू (आर-पार रास्ता) प्राप्त कर लिया गया। इस सफलता ने कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच हर मौसम में संपर्क के दशकों पुराने सपने को हकीकत के और करीब ला दिया है। यह खबर और फोटो दूसरे अखबारों में भी है लेकिन इतनी प्रमुखता शायद ही किसी ने दी है। अखबारों के अंदर और बुरा हाल है। प्रचार ही प्रचार है। दि एशियन एज में जोजिला सुरंग की खबर दो कॉलम की फोटो के साथ पांच कॉलम के शीर्षक से छपी है। इस पन्ने पर ममता बनर्जी के घर छापे की खबर का कोई शीर्षक नहीं है। यह सब तब जब टाइम्स ऑफ इंडिया के पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने की लीड का शीर्षक है, सीआईडी ने ममता के परिसर की तलाशी ली, ‘शून्य’ जब्ती। पहले पन्ने की लीड का शीर्षक है, सरकार ने विनिवेशीकरण, परिसंपत्तियों की बिक्री से 20,000 करोड़ रुपए जुटाए। इंडियन एक्सप्रेस की लीड उर्वरक सबसिडी के बोझ के बारे में है। अखबार ने बताया है कि वैश्विक आपूर्ति बाधा के कारण इसका दूना होना तय है। इस तरह अगर आपको पता है कि सरकार ने विनिवेशीकरण से 20,000 करोड़ जुटाए हैं तो उसकी जरूरत भी समझिए।

दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चा के बीच आज एनडीए नेताओं की बैठक है। प्रधानमंत्री के 12 साल पूरे होने की खबर तीन कॉलम की इस लीड के साथ दो कॉलम में छोटी सी है। इसके बराबर तीन कॉलम में बताया गया है कि टीएमसी ने बागी सांसदों पर पार्टी को दगा देने और भाजपा से संबंध होने का आरोप लगाया। कांग्रेस उम्मीदवार का पर्चा खारिज होने की खबर यहां सिंगल कॉलम में है और शीर्षक में लिखा है –  कांग्रेस के लिए झटका, पर्चा खारिज हो गया। कोलकाता के द टेलीग्राफ में पूर्व मुख्यमंत्री के घर छापे की खबर लीड है। यहां सीआईडी के उस दस्तावेज की फोटो छपी है जिसमें कहा गया है कि तलाशी के दौरान कुछ भी जब्त नहीं किया गया, ना क्षतिग्रस्त या नष्ट किया गया। अखबार की खबर का शीर्षक है कि सीआईडी ने वह दरवाजा खटखटाया जो अभी हाल तक बंगाल का सबसे शक्तिशाली पता हुआ करता था। बदले की कार्रवाई के रूप में इस छापे का मकसद बदनाम करना भी था और ऐसे छापों से संदेश यही जाता है कि जो सत्ता में था वह गलत ही करता है। उसकी जांच भाजपा ही करवाती है (वाशिंग मशीन वालों को छोड़कर)। ऐसे में कुछ जब्त नहीं हुआ- तो छापा कितना अनैतिक था, खबर कितनी बड़ी या महत्वपूर्ण है, उसे भी समझा जा सकता है लेकिन भारत में मीडिया की जो हालत है वह आप जानते हैं। हालांकि कुछेक अखबार अभी भी सही काम कर रहे हैं।

द हिन्दू को इनमें रखा जा सकता है। लीड का शीर्षक है – सीआईडी ने ममता के घर और तृणमूल दफ़्तर की तलाशी ली। इसके साथ छपी फोटो का कैप्शन है, जांच के घेरे में: मंगलवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर पर सीआईडी की टीम। अखबार में लिखा है और यह भी खबर ही है कि फोटो एएनआई की है। ऐसे मौकों पर उसकी टीम ही होती है और यह अच्छे दिन की पहचान बन गया है। उपशीर्षक है, सरकारी एजेंसी की यह तलाशी पार्टी विधायकों के हस्ताक्षर में कथित धोखाधड़ी के मामले में की गई है; तृणमूल नेताओं ने इस कार्रवाई को ‘राजनीतिक बदले की भावना’ करार दिया, जबकि बंगाल के मंत्री का कहना है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। लीड के साथ दूसरी खबर या सेकेंड लीड का शीर्षक है, मध्य प्रदेश में हंगामे के बीच कांग्रेस का राज्यसभा नामांकन खारिज। जाहिर है यह आज की महत्वपूर्ण खबरों में है लेकिन इतनी प्रमुखता यहीं मिली है। कुल मिलाकर मोदी की महानता दिखाने वाले भी मनमानी नहीं दिखाते हैं। ममता की मजबूरी और कांग्रेस को झटका जैसी खबरें असल में लोकतंत्र को झटका हैं और उन हिन्दुओं को तो हैं ही जो खतरे में बताए जाते थे। द हिन्दू ने दोनों खबरों को बराबर महत्व दिया है। देशबन्धु में जो खबरें लीड और सेकेंड लीड हैं वे किसी और अखबार में नहीं हैं। कारण आप समझ सकते हैं। लीड तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद के हवाले से है। उन्होंने कहा है, बागी सांसदों को शर्म आनी चाहिए। उपशीर्षक है, कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने बागी टीएमसी सांसदों को लताड़ लगाई। सेकेंड लीड कांग्रेस का आरोप है, मोदी सरकार हर मोर्चे पर नाकाम। भारत चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था से खिसक कर छठवें नंबर पर आ गया है। आप तय कीजिए कि आपका अखबार आपको कितनी और कैसी खबर देता है।    

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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