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दैनिक जागरण एआई निर्मित मोदी-मेलोनी की ये फोटो छाप कर फँस गया, माफ़ी माँगनी पड़ी!

Hindi newspaper clipping: 'खेद प्रकाश' states the May 23 issue's page 15 image is AI-generated, not real, and its authenticity can't be verified.
Prime Minister Narendra Modi and a smiling woman present a wooden cricket bat labeled 'Sunny Tonny' at a formal event, with a flag backdrop.

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े हिंदी अखबारों में शामिल ‘दैनिक जागरण’ को एक तस्वीर के प्रकाशन को लेकर सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करना पड़ा है। मामला 23 मई के अंक में प्रकाशित उस तस्वीर से जुड़ा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेरठ की प्रसिद्ध क्रिकेट बैट निर्माता कंपनी SG का बल्ला भेंट करते हुए दिखाया गया था।

तस्वीर के साथ प्रकाशित खबर में दावा किया गया था कि इटली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मेलोनी को SG का बल्ला उपहार में दिया, जिस पर महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर के हस्ताक्षर भी थे। हालांकि बाद में यह तस्वीर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से निर्मित निकली।

24 मई को दैनिक जागरण ने अपने अखबार में बाकायदा “खेद प्रकाश” शीर्षक से स्पष्टीकरण प्रकाशित किया। अखबार ने स्वीकार किया कि 23 मई के अंक में प्रकाशित तस्वीर वास्तविक नहीं थी, बल्कि AI द्वारा तैयार की गई थी। साथ ही यह भी कहा कि प्रकाशन से पहले तस्वीर की सत्यता की पुष्टि नहीं हो सकी, जिसके लिए उसे खेद है।

बताया जा रहा है कि तस्वीर में दिखाई गई SG ब्रांडिंग को लेकर कंपनी की ओर से आपत्ति जताई गई थी। इसके बाद अखबार को स्पष्टीकरण और खेद प्रकाशित करना पड़ा।

क्या अखबारों के लिए कोई नियम नहीं हैं?

मीडिया विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी समाचार पत्र की मूल जिम्मेदारी प्रकाशित सामग्री की तथ्यात्मक जांच (Fact Verification) करना होती है। विशेष रूप से जब तस्वीर किसी सार्वजनिक व्यक्ति, सरकारी कार्यक्रम या किसी ब्रांड से जुड़ी हो।

भारत में प्रिंट मीडिया के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) की पत्रकारिता आचार संहिता लागू होती है। इसके तहत समाचार, फोटो और विजुअल सामग्री प्रकाशित करने से पहले उनकी प्रामाणिकता की जांच करना संपादकीय दायित्व माना जाता है।

यदि कोई तस्वीर भ्रामक, फर्जी या कृत्रिम रूप से तैयार की गई हो, तो उसे वास्तविक घटना के रूप में प्रकाशित करना पत्रकारिता के बुनियादी मानकों के विपरीत माना जा सकता है।

कानून क्या कहता है?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी फर्जी या AI-निर्मित तस्वीर के कारण किसी व्यक्ति, संस्था या ब्रांड की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, तो संबंधित पक्ष नागरिक (Civil) या आपराधिक (Criminal) कार्रवाई का विकल्प तलाश सकता है। हालांकि प्रत्येक मामले में यह देखना पड़ता है कि प्रकाशन जानबूझकर किया गया था या सत्यापन में हुई चूक के कारण।

इसके अलावा, यदि तस्वीर किसी कंपनी के ट्रेडमार्क, ब्रांड या व्यावसायिक पहचान का गलत इस्तेमाल करती है, तो बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) और ट्रेडमार्क कानूनों के तहत भी आपत्ति उठाई जा सकती है।

AI युग की नई चुनौती

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब AI से तैयार तस्वीरें और वीडियो तेजी से सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब पारंपरिक फोटो सत्यापन प्रक्रियाओं के साथ AI-जनित कंटेंट की पहचान के लिए भी मजबूत संपादकीय तंत्र विकसित करने की जरूरत है।

दैनिक जागरण द्वारा प्रकाशित खेद नोट यह दिखाता है कि AI कंटेंट के दौर में बड़ी मीडिया संस्थाओं से भी चूक हो सकती है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ जाता है कि क्या भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए मीडिया संस्थानों को अधिक सख्त सत्यापन व्यवस्था अपनानी होगी।


23 मई को दैनिक जागरण ने एक तस्वीर छापी। इसमें कथित तौर पर PM नरेंद्र मोदी द्वारा जार्जिया मेलोनी को क्रिकेट बल्ला गिफ्ट करते हुए दिखाया गया। इस बल्ले पर स्टिकर SG कंपनी का लगा है, जो मेरठ (यूपी) की है। चूंकि यह AI फोटो था, इसलिए SG ने आपत्ति जताई। 24 मई को जागरण ने खंडन छापकर माफी मांगी है।

-सचिन गुप्ता, पत्रकार

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