अपनी शुरूआत से ही खेत-खलिहानों से लेकर घर और दफ्तरों तक आकाशवाणी देश की धड़कन बनी रही है। एक दौर में आकाशवाणी से जब सुर गूंजते थे, जब कोई संदेश प्रसारित किया जाता था, तब माना जाता था कि संगीत की लहरियों में देश झूम रहा है, संदेशों के जरिए देश बोल रहा है..आकाशवाणी ने अपनी यात्रा में लोगों का मनोरंजन भी किया है, सूचनाएं भी दी हैं, संकट के क्षणों में राष्ट्र को आगाह भी किया है, खेती-बाड़ी से लेकर शिक्षा जगत से जुड़ी जरूरी और फायदेमंद सूचनाएं भी दी हैं..अपनी सहज उपलब्धता और तकनीक के जरिए देश के हर वर्ग, हर आयु के लिए आकाशवाणी के सुर सजते रहे हैं..यही आकाशवाणी आठ जून को अपनी गौरवशाली यात्रा के नब्बे वर्ष पूरे करने जा रही है। इस अहम मौके हमने आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव कुमार जैन से विशेष बातचीत की है।
प्रस्तुत है, इसी बातचीत के अंश…
प्रश्न- आकाशवाणी की नब्बे वर्ष की गौरवशाली यात्रा के लिए आपको बधाई.. आकाशवाणी ने अब तक कई सोपान पूरे किए हैं..इस मौके पर आप क्या कहना चाहेंगे..
महानिदेशक – बधाई आपको भी..आकाशवाणी को यहां तक पहुंचाने में हमारे प्रोग्राम प्रोड्यूसरों, तकनीशियनों और इंजीनियरों के साथ इससे जुड़े रहे हर शख्स का योगदान है..लेकिन चाहे इंजीनियर हों या फिर प्रोग्राम बनाने वाले हमारे प्रतिभाशाली और योग्य लोग या फिर तकनीशियन..उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा देश के सूचना संपन्न बनाने, राष्ट्र का मनोरंजन करने, हमारे संगीत, हमारे गायन और वादन जैसी ललित कलाओं से दुनिया को परिचित कराने में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने यह सब देश के लिए किया, देश के लोगों के लिए किया, इसलिए आकाशवाणी की नब्बे साल की यह यात्रा सिर्फ आकाशवाणी या प्रसार भारती या फिर उसके कर्मचारियों-अधिकारियों, तकनीशियनों और प्रोग्राम बनाने वालों के लिए ही गर्व का क्षण नहीं है, बल्कि देश के लिए गौरव की बात है।
प्रश्न – जब आकाशवाणी यहां तक पहुंच गई है, आप इस यात्रा को किस रूप में देखते हैं?
महानिदेशक– नब्बे साल जब भारतीय परिदृश्य में ऑल इंडिया रेडियो के रूप में रेडियो आया, उस समय यह नया माध्यम था। तब इसे ऑल इंडिया रेडियो के नाम से ही जाना जाता था…1956 में पंडित नरेंद्र शर्मा के सुझाव पर इसका नाम आकाशवाणी रखा गया। जब आकाशवाणी आया, तब आज की तरह अखबार ना तो चमकीले थे और न ही उनकी छपाई आज की तरह सुरूचि पूर्ण थी। ऐसे में बुनियादी रूप से तकनीक प्रधान रेडियो माध्यम का आना लोगों के लिए पहले कौतूहल का विषय बना। लेकिन इसके जरिए जब सुदूर स्थित आवाजें लोगों के घरों, दफ्तरों, खेतों-खलिहानों, बाग-बगीचों तक पहुंचने लगी, तब इसका लोगों ने जोरदार स्वागत किया। पहले रेडियो के जरिए सूचनाएं और समाचार दिए जाते थे। लेकिन धीरे-धीरे रेडियो पर गीत-संगीत और नाटक जैसे कार्यक्रम प्रसारित किए जाने लगे। शुरू में रेडियो सेट बड़े थे, इसलिए सबके लिए उन्हें खरीदना मुश्किल था। शुरूआत में रेडियो पर लाइसेंस फीस भी लगती थी। शुरू में रेडियो प्रसारण और कार्यक्रम निर्माण की तकनीक जटिल थी। फिर भी चूंकि यह माध्यम नया था, नया होने के साथ चमत्कारी भी था..लिहाजा लोगों में इसका आकर्षण बढ़ने लगा। फिर जैसे ही प्रसारण और रिसिवर तकनीक में सुधार हुआ, लोगों तक सस्ते ट्रांजिस्टरों की पहुंच बढ़ी, आकाशवाणी को लोगों ने हाथोंहाथ लिया। देखते ही देखते रेडियो देश की धड़कन बन गया।
प्रश्न – आज आकाशवाणी आपके नेतृत्व में आगे बढ़ रही है। इस मुकाम पर आप आकाशवाणी को किस रूप में देखते हैं?
महानिदेशक– चूंकि रेडियो सहज माध्यम है, इसके जरिए सूचनाओं को तत्काल सुदूर जगहों तक पहुंचाया जा सकता है, इसलिए आज भी आपात् स्थिति में यही सबसे सहज माध्यम है। मैं कह सकता हूं कि आकाशवाणी की यही ताकत है। आज का इंटरनेट का बोलबाला है। इंटरनेट पर कंन्वर्जेंस के जरिए आज हर माध्यम यानी अखबार, रेडियो और टीवी उपलब्ध हैं। रेडियो का जब भी हम जिक्र करते हैं तो हमारे सामने सिर्फ आवाज केंद्रित माध्यम की छवि उभरती है। आकाशवाणी अब भी पारंपरिक तकनीक पर रेडियो सेटों के जरिए उपलब्ध है। लेकिन तकनीकी क्रांति के साथ यह नए रूप में भी उपलब्ध है। अब आकाशवाणी पॉडकास्ट भी कर रहा है। आकाशवाणी इंटरनेट के प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। पारंपरिक ऑडियो माध्यम के रूप में उपलब्ध होने के साथ ही सोशल मीडिया अकाउंट्स मसलन ट्वीटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम आदि पर भी उपलब्ध है। इसके साथ ही यू टूयूब पर भी हमारे चैनल काम कर रहे हैं। हर जगह रेडियो का प्रसारण हो रहा है। बेशक ये सारे प्रसारण पारंपरिक प्रसारण जैसे नहीं हैं, लेकिन उनसे अलग भी नहीं है। पारंपरिक प्रसारण में एक बार समाचार या सूचना या दूसरा कोई संदेश सुनने से व्यक्ति चूक जाए तो दोबारा उसके लिए उसे सुन पाना कठिन होता है, लेकिन इंटरनेट की तेजी और सोशल मीडिया मंचों के जरिए निर्धारित वक्त पर प्रसारित हो चुके समाचारों और कार्यक्रमों को बाद में भी सुना जा सकता है। अब तो हमारा एप भी है, न्यूज ऑन एआईआर..इस पर आप आकाशवाणी के तकरीबन सारे चैनलों को सुन सकते हैं…आज आकाशवाणी देश की 23 भाषाओं और 183 बोलियों में लगातार प्रसारण कर रहा है…इसके साथ ही विदेश सेवा प्रभाग द्वारा 16 विदेशी और 11 भारतीय भाषाओं में प्रसारण कर रहा है।
प्रश्न – आकाशवाणी पर गीत-संगीत से लेकर समाचार तक के ढेरों प्रसारण होते हैं। आकाशवाणी समाचारों के प्रसारण, उनके चयन को लेकर क्या नीति है?
महानिदेशक – आकाशवाणी का ध्येय वाक्य है, बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय..यानी अधिकतर लोगों के हित और अधिकतर लोगों के सुख के लिए…यानी आकाशवाणी का उद्देश्य ज्यादातर लोगों के हितों और आनंद को ध्यान में रखते हुए प्रसारण करना। चाहे गीत-संगीत के कार्यक्रम हों या फिर समाचार, सबके पीछे यही विचार काम करता है। जहां तक समाचारों की बात है तो आकाशवाणी का ध्येय है, जल्दीबाजी में गलत समाचार देने की बजाय सही और सटीक समाचार प्रसारित किए जाएं। समाचारों के चयन में इस तथ्य का हम हमेशा ध्यान में रखते हैं। जब तक समाचार की पुष्टि नहीं हो जाती, उसे आकाशवाणी प्रसारित नहीं करता। इसीलिए हमारी साख है। वैसे हर प्रसारण में भी हम इस तथ्य का ध्यान रखते हैं।
प्रश्न– आकाशवाणी को बदलते दौर में और आगे बढ़ाने के लिए आपकी क्या योजनाएं हैं..
महानिदेशक – हमारी कोशिश एफएम नेटवर्क का विस्तार, स्टूडियो का आधुनिकीकरण और संसाधनों का समुचित उपयोग करने की है। पिछले वर्ष एक महत्वपूर्ण फैसले में रेडियो स्टेशनों को प्रादेशिक चैनलों के रूप में फिर से संगठित किया गया है। चैनल प्रमुखों को महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया गया है। इसका उद्देश्य रेडियो स्टेशनों को स्थानीय जरूरतों के हिसाब से कार्यक्रम निर्माण के लिए अधिक स्वायत्तता देना है ताकि प्रादेशिक चैनल स्थानीय आकांक्षाओं को पूरा कर सकें और वित्तीय रूप से ज्यादा सक्षम हो सकें। इसके अलावा आकाशवाणी के पास ऑडियो का एक बहुत समृद्ध संग्रह है, जिसमें अनेक प्रसिद्ध कलाकारों की संगीत रिकॉर्डिंग, महत्वपूर्ण व्यक्तियों के इंटरव्यू और देश के महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर कमेंट्री आदि शामिल है। इस पूरे संग्रह को डिजिटलीकृत करके इसे यू ट्यूब और वेव्स ओटीटी के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाएगा।


