सिद्धार्थ चौरसिया–
मेरी जानकारी के अनुसार पूरे पश्चिमी दिल्ली में पानी का संकट है। कहीं पानी नहीं आ रहा है। अगर आ भी रहा है तो सीवर से भी गंदा बदबूदार पानी आ रहा है। यह समस्या मामूली सी लगती है, हर कोई नजर अंदाज कर दे रहा है। लेकिन हमारे मोहल्ले में मेरी जानकारी कई घरों में लोग पानी की वजह से बीमार हो गये।
मेरी पहुंच किसी बड़े चैनल के रिपोर्टर की तरह व्यापक स्तर पर या आधिकारिक आंकड़े नहीं हैं। मैं मामूली सा डिजिटल कंटेंट राइटर हूं। अभी जिस इलाके में रहता हूं, वह विधानसभा हरी नगर व डीसी राजौरी गार्डन का सुभाष नगर इलाका है। मेरी पक्की जानकारी में हरी नगर, सुभाष नगर, राजौरी गार्डन, टैगोर गार्डन, तिलक नगर व इसके इलाके अशोक नगर, मिनाक्षी गार्डन, रघुवीर नगर, ख्याला, चौखंडी, श्याम नगर तिलक विहार या दिल्ली के जिन इलाकों मेरे यार दोस्त रहते हैं जिसमें द्वारका और उत्तम नगर के इलाके शामिल हैं। उनसे बात कर के मालूम हुआ कि हर कोई गंदे बदबूदार पानी की समस्या को झेल रहा है और बीमार पड़ रहा है।
इसमें चांदी ही चांदी उन लोगों की हो रही है, जो लोग पानी प्यूरीफाई कर के डिलीवरी करते हैं। 50 रुपये 25 लीटर कैन का रोजाना लेते हैं। इससे सिर्फ पीने भर का जुगाड़ हो जाता है। लेकिन दिल्ली वासी टंकियों में वही दिल्ली जल बोर्ड का पानी भरते हैं। बेशक पीते नहीं हैं, लेकिन बर्तन धोना, नहाना, कपड़े धोना यह सब करते हैं। इतना से भी लोग पेट से रिलेटिड बीमारियों से या टाइफाइड से ग्रसित हो रहे हैं। मैंने इसकी 3-4 बार DARPG और PM पोर्टल पर शिकायत की। जिसे ग्रीवांस पोर्टल भी कहते हैं। हुआ कुछ नहीं।



यह सब छह महीने से चल रहा है। किसी में कोई चेतना गुस्सा नहीं है। मेरा 8 महीने का बेटा “पार्थ” बीमार है। डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि गंदे पानी की वजह से बीमार पड़ा है। कौन जिम्मेदारी लेगा? Rekha Gupta Parvesh Sahib Singh Manjinder Singh Sirsa DJB या विधायक श्याम शर्मा।
जनवरी में CPGRMS में शिकायत किया। शिकायत Close कर दिया गया। ग्राउंड लेवल पर कोई काम नहीं किया गया? इतनी बड़ी लापरवाही? DJB के अधिकारी मेरे मोहल्ले आएं, व्यक्तिगत रूप से मिलें ताकि मैं पानी का सैंपल दिखाऊं। इसके साथ ही अपने जैसे कई घरों के लोगों को गवाही में शामिल करने को तैयार हूं। मैं इस शिकायत को मीडिया में भी जारी करूंगा। क्योंकि मैंने नोटिस किया है CMO और DJB के निदेशक व प्रमुख इस मुद्दे पर महीनों से काम नहीं कर पा रहे हैं। मेरे पास गंदे पानी की समस्या से रिलेटिड सारे एविडेंस और गवाह हैं।
10 साल मीडिया में अपनी ऐसी तैसी करवाने के बाद इस स्तर का भी लिंक ब्लिड अप नहीं करवा पाया कि जिन भी बड़े मीडिया घराने के रिपोर्टर हैं व सीधे मुंह या ढंग से बात कर सकें। बड़े एटिट्यूड से कॉल डिस्कनेक्ट करते हैं। एक रिपोर्टर तो सामाजिक एक्टिविस्ट के तौर पर अपनी पहचान बटोरने वाले अजीत अंजुम हैं। उन्होंने यह कहकर फोन काट दिया मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है आपसे बात करने में व आपकी समस्या में।
एक स्टोरी लगवाने के लिए जितने 11 मीडिया कंपनियों में मैंने काम किए सबको टटोल लिया। लेकिन मैसेज सुनकर के छोड़ दिए। कुछ ने बे अदबी से जवाब देकर कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया।
सीएम-पीएम पानी-पानी
देश जब आज़ाद हुआ तो भारत के लोगों का साइंटिफिक टेंपरामेंट शून्य था, इसलिए नेहरू जी को IIT बनाने पड़े। 2014 में दूसरी आज़ादी मिलते ही साइंटिफ टेंपरामेंट नये लेबल पर जा पहुंचा और IIT की जरूरत खत्म हो गई क्योंकि गलगोटिया जैसी वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटीज़ दुनिया भर में अपना झंड़ा गाड़ने लगीं।
जरा सुनिये दिल्ली की मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के गंभीर वैज्ञानिक विचार। पानी ससुरा गर्मी में हवा में उड़ जाता है तो रेखाजी क्या करें? दिल्ली वालों को मुंह खोलकर आसमान की तरफ देखते हुए बरसात का इंतज़ार करना पड़ेगा।
काश दिल्ली की मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री जी के वैज्ञानिक विचार सुने होते। फिर हम पानी को उड़ने से पहले ही हवा में ही पकड़ लेते। दोनों को अलग-अलग करते जिस तरह शिंदे को ठाकरे से अलग किया। जीभकर हवा खाते और फिर पानी पीते और जो बचता एक्सपोर्ट भी कर देते।
समस्याएं सुलझाने की असाधारण क्षमता की वजह से ही मोदीजी देश के प्रधानमंत्री है। रेखा जी अभी नई हैं, वो भी सीख जाएंगी। नीचे पेस्ट किये अलग-अलग लिंक में पीएम और सीएम को सुनिये।
-राकेश कायस्थ


