Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

राजेश एक्सपोर्ट्स का 15 लाख करोड़ का घोटाला: दांव पर पॉलिसीधारकों का पैसा, जवाबदेही से भाग रही LIC

Man in a dark pinstripe suit sits in a leather chair, with a world map on a wooden wall behind him.

विश्व दीपक-

15.5 लाख करोड़ का घोटाला

भ्रष्टाचार मुक्त भारत का एक और उदाहरण सामने आया है. ऊपर तस्वीर श्रीमान राजेश मेहता की है. सोना व्यापारी राजेश मेहता को हम,आप नहीं जानते लेकिन सरकार,सेबी,बैंक, जांच एजेंसियां सब लंबे समय से जानते हैं.

मेहता जी ने मात्र 15.5 लाख करोड़ का घोटाला किया है. सरकारी संस्था सेबी का ऐसा आरोप है. यह किसी देशद्रोही का प्रलाप नहीं.

इतना बड़ा घोटाला एक दिन में नहीं होता. मेहता जी की कंपनी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी एलआईसी की भी है. एलआईसी में हमारा-आपका पैसा जमा है.जानकार बता रहे हैं कि यह आजाद भारत का सबसे बड़ा एकाउंटिंग घोटाला है जिसे मेहता जी ने मोदी राज में सफलतापूर्वक संपन्न किया.


अतुल मोदानी-

LIC of India, जो लाखों policy holders और shareholders के पैसों की संरक्षक मानी जाती है, आज गंभीर सवालों के घेरे में है। LIC के पास Rajesh Exports में लगभग 10.80% हिस्सेदारी है। इसी कंपनी पर अब फर्जी turnover दिखाने और financial irregularities के गंभीर आरोप लगे हैं। कंपनी के promoter Rajesh Mehta पर fraud के आरोप सामने आने के बाद निवेशकों की बड़ी रकम डूबने का खतरा पैदा हो गया है। अनुमान है कि इस निवेश के कारण अन्य shareholders को लगभग 1500 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है।

इस मामले में LIC से RTI के माध्यम से जानकारी मांगी गई थी कि आखिर इस तरह के निवेश निर्णय कौन लेता है, निवेश की approval process क्या होती है, कितना नुकसान हुआ है और उसकी जवाबदेही किसकी है। लेकिन LIC ने जानकारी देने से इनकार कर दिया।

यह सवाल केवल एक कंपनी का नहीं है। सवाल यह है कि क्या एक सरकारी संस्था, जो करोड़ों लोगों की बचत संभालती है, अपने निवेश निर्णयों को लेकर पूरी पारदर्शिता बरत रही है? यदि किसी निजी कंपनी में बड़ा निवेश किया जाता है और बाद में वह निवेश junk साबित होता है, तो policy holders और shareholders को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि निर्णय किस आधार पर लिया गया था।

चिंता की बात यह भी है कि अतीत में कई ऐसी कंपनियां रही हैं जिनमें LIC ने निवेश किया और बाद में वे financially collapse हो गईं या bankrupt हो गईं। लेकिन disclosure की कमी के कारण आम लोगों को यह तक नहीं पता चल पाता कि कुल कितना पैसा डूबा और उसकी जवाबदेही किसकी थी।

Official LIC letterhead RTI Department requesting investment details and related information under the RTI Act 2005, with highlighted notes around required data and disclosures.
Investor tab for Rajesh Exports Ltd showing a quarterly shareholding table across Mar 2025, Jun 2025, Sep 2025, and Mar 2026: Promoters 54.55% each period; FIIs around 9–15% (9% to 15.26%); DIIs about 10.80–10.96%; Public about 19–20%; Life Insurance Corporation of India 0.80% in Mar 2025, 10.80% in the others; No. of Shareholders: 969, 2,13,908, 2,06,942, 1,98,796.

सरकारी संस्थाओं से लोगों का भरोसा transparency और accountability की वजह से बनता है, secrecy की वजह से नहीं। यदि लाखों करोड़ रुपये के public money का उपयोग हो रहा है, तो उसके हर बड़े निवेश निर्णय पर सार्वजनिक जवाबदेही भी होनी चाहिए।

अब यह मामला केवल एक investment loss का नहीं रह गया है, बल्कि governance, transparency और public accountability का मुद्दा बन चुका है। उम्मीद की जानी चाहिए कि Prime Minister’s Office और Nirmala Sitharaman इस विषय को गंभीरता से लें और यह सुनिश्चित करें कि public money के साथ जुड़े हर बड़े फैसले में पारदर्शिता और जवाबदेही तय हो।


Bar chart of the top 10 countries by gold reserves: US 8,133.46t; Germany 3,350.25t; Italy 2,451.84t; France 2,437t; Russian Federation 2,326.52t; China 2,306.3t; Switzerland 1,039.94t; India 880.34t; Japan 845.97t; Turkey 614.3t.

15 लाख करोड़ का एक्सपोर्ट घोटाला।
जी हां। इस अमृतकाल में यही देखना बाकी था। यह घोटाला मुंबई के राजेश ज्वेलर्स ने किया है।
उसने बाहरी देशों की फ़र्ज़ी कंपनियों को माल भेजना दिखाया।
2020 से 2025 तक 5 सालों से राजेश एक्सपोर्ट के नाम पर घोटाला करता रहा और नरेंद्र मोदी की गुलाम संस्थाएं सोती रहीं।
फिर जब घोटाला 15 लाख करोड़ का हो गया, यानी भारत के कुल एक्सपोर्ट का 20%, तब जाकर नींद खुली।
सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट को शेयर बाज़ार से बैन कर दिया है। जांच हो रही है, जिसका कोई मतलब नहीं। जो होना था, हो चुका।
इसका मतलब क्या हुआ?
यही कि 5 साल से विदेशी पैसा स्विट्जरलैंड से भारत आता रहा। उस महामानव के राज में, जिसने जुमला फेंका था–काला धन वापस लाने का।
ये काम एक ही सुनार ने कर दिखाया। अब सुनार को बीजेपी ज्वॉइन कर लेनी चाहिए।
दिल्ली में 21 लोगों के फ्राई होने के बाद आज बिहार में 4 लोग फ्राई हो गए।
राहुल गांधी ठीक कहते हैं–भारत का समूचा सिस्टम चरमरा गया है। आपातकाल की आशंका है।
जून का यह महीना बहुत कुछ दिखाएगा। बीजेपी/आरएसएस की नज़र अब 32000 टन सोने पर है।
रिजर्व बैंक के पास बेचने के लिए एक वही सोना है–पत्नी का मंगलसूत्र, बहन की कान की बालियां और बहू की चूड़ियां।
आपातकाल तो अभी भी मौजूद है। सड़कों पर लाठियां बरस रही हैं। गुंडों की सत्ता अब लोगों की उफ़्फ़ तक बर्दाश्त नहीं कर सकती।
इस पर आपने क्या किया? कंबल ओढ़कर सो गए? वॉट्सएप शेयर किया? या मुखौटा बदल लिया?
सब याद रखा जा रहा है। आपातकाल को गोदी कुकुर जस्टिफाई भी करेंगे। फिर उसे लोग शेयर करेंगे।
इस नंगे समाज को अराजकता के और कुछ आता भी तो नहीं है।
नरेंद्र मोदी सत्ता के 15 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट घोटाले का पर्दाफ़ाश होने के बाद आज राजेश एक्सपोर्ट के शेयर 100 रुपए पर आ चुके हैं।
इसी के साथ LIC का 10% शेयर भी डूब गया है, जो बीजेपी/आरएसएस ने राजेश मेहता की कंपनी में लगवाए थे।
मेहता तो सिर्फ़ मुखौटा है। असल खेल तो बीजेपी का है।
खेल तो मनमोहन सरकार का भी है। जब रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने 2013 में गुज्जू राजेश मेहता को केरल में सोने की तस्करी करते हुए रंगे हाथों धरा था।
तब मनमोहन की यूपीए सरकार मौन हो गई थी।
2014 में बीजेपी ने आकर उस मौन को तोड़ा और 15 लाख करोड़ का घोटाला किया।
कांग्रेस के पास भी बोलने के लिए कुछ खास नहीं है। कांग्रेसियों की तो बात ही छोड़ दें।
असली पत्रकार के आगे उनकी भी पैंट गीली हो जाती है।
प्रायोजित/सुपारी पत्तलकार उन्हें खूब सुहाते हैं। -सौमित्र राय, वरिष्ठ पत्रकार

Five-year line chart of Rajesh Exports Limited stock price on NSE, showing a rising period followed by a long downward trend with several peaks and a final dip near the end.
Kochi news article with headline 'Gold firm involved in dubious deals: DRI', by Toby Antony, updated May 22, 2013; social sharing icons below.
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन