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सियासत

ओडिशा भाजपा ने जनरल कटेगरी के साथ अन्याय करके शिक्षण संस्थानों में चुपचाप जातीय आरक्षण बढ़ा दिया है!

Tweet from OTV News about increased reservations and quotas, followed by a red 'BREAKING NEWS' graphic in the image's lower portion.

सुरेश चिपलुनकर-

बंगाल चुनाव जीतने, और ढेर सारा सोना बेचने कि खबरों के बीच भाजपा ने चुपचाप उधर उड़ीसा में अपने असल एजेंडा पर सफलतापूर्वक काम कर दिया है..

खबर ये है कि उड़ीसा की भाजपा सरकार ने ओडिशा में व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में (professional education institutes) में जातीय आरक्षण बढ़ा दिया है..

अनुसूचित जनजाति (एसटी) कोटा 12% से बढ़कर 22.5% कर दिया गया है.. जबकि अनुसूचित जनजाति (एससी) कोटा 8% से बढ़कर 16.25% कर दिया गया है.. साथ ही एसईबीसी (भाजपा के द्वारा एक नया कोटा शुरू किया गया है) के लिए 11.25%..

अब आप सोचिए कि क्या पटनायक सरकार में अथवा वर्तमान विपक्ष ने इस कोटा वृद्धि कि मांग को लेकर कोई रैली की थी? क्या इस मांग को लेकर कहीं ट्रेन रोकी गई, या जलाई गई? आरक्षण वृद्धि की इस मांग को लेकर कहीं कोई व्यापक बंद का आव्हान हुआ?? इस कोटा वृद्धि को लेकर कोई बड़ा आंदोलन हुआ?..

नहीं ना! लेकिन वर्षों से शांतिपूर्ण चल रहे उड़ीसा में सत्ता मिलते ही भाजपा की सामाजिक न्याय नामक खुजली जाग उठी और उसने बिना किसी के मांगे ही जनरल कैटिगरी के साथ यह अ न्याय कर दिया..

भाजपा का यह प्रेम आरक्षित जातियों के लिए तो बिना मांगे बह रहा है,, लेकिन अनारक्षित जातियों के लिए भाजपा के झोले में केवल चाय पिलाना और दरी बिछाना ही है..

सामान्य वर्ग के लिए कोई योजनाएं नहीं,, कोई विशेष छूट नहीं,,, कोई नीति नहीं.. असल में भाजपा में जनरल कैटेगरी की कोई औकात है ही नहीं.. और आज की तारीख में सोशल मीडिया पर भाजपा की चाटुकारिता करने में जनरल कैटिगरी वाले सबसे आगे हैं.. भाजपा ने राष्ट्र निर्माण का सारा भार सवर्णों के कंधे पर थोप रखा है…

बंगाल में चुनावी जीत ताजा ताजा है, बस एक बार वहां स्थानीय चुनाव और हो जाएं,, उसके बाद वहां भी हिंदू मुस्लिम कार्ड को गायब करके, जातीय खेल खुलकर शुरू किया जाएगा..

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