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राजशेखर के बाद गिरिजेश का जाना, गोरखपुरियों वाली पत्रकारिता के एक पूरे युग का अंत है!

दीप्त भानु डे-

अलविदा गिरिजेश… चुपचाप आने-जाने वालों की कमी बहुत शोर करती है। गिरिजेश मिश्रा का जाना कुछ वैसा ही है। TV9 के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर, पर हम सबके लिए बस ‘गिरिजेश’, जो उम्र के 50वें पड़ाव के आसपास ही थे, आज अचानक खामोश हो गए।

Portrait of a man in a dark pinstripe suit and yellow shirt, looking at the camera.
गिरिजेश मिश्रा

पिछले महीने ही गोरखपुर के अपने साथी, बहुमुखी प्रतिभा के धनी राजशेखर को दिल्ली में खोया था। वो घाव भरा भी नहीं था कि आज गिरिजेश भी चले गए। नियति कभी-कभी बहुत क्रूर हो जाती है।

गिरिजेश से पहला परिचय दैनिक जागरण, गोरखपुर के दिनों में हुआ। कम बोलने वाले, सौम्य और बेहद संवेदनशील। फिर राष्ट्रीय सहारा गोरखपुर। लेकिन असली उड़ान भरी जब दिग्गज पत्रकार राघवेंद्र दुबे ‘भाऊ’ के साथ उन्होंने कोलकाता के तारा चैनल का रुख किया। उनके साथ राजशेखर भी थे। गोरखपुर की पत्रकारिता की मिट्टी से निकले ये दोनों युवा, महानगर की भीड़ में अपनी अलग पहचान बना रहे थे।

इसके बाद गिरिजेश का सफर न्यूज़ 24, ज़ी टीवी, इंडिया न्यूज़, न्यूज़ 18 से होता हुआ TV9 तक पहुंचा। हर जगह एक एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर से कहीं ज्यादा रहे। खबर की जितनी गहरी समझ थी, उतनी ही धारदार कलम। एडिट टेबल पर घंटों बैठकर कॉपी संवारना, जूनियरों को प्यार से गलती समझाना, ये गिरिजेश ही कर सकते थे।

पर उनकी आंखों में एक और सपना पलता था- मुंबई जाकर फिल्म इंडस्ट्री के लिए स्क्रिप्ट लिखना। सिनेमा की बारीक समझ थी, कहानियां बुनना जानते थे। हम सबको यकीन था कि एक दिन पर्दे पर ‘लेखक – गिरिजेश मिश्रा’ जरूर चमकेगा। अफसोस, वो सपना उनके साथ ही चला गया।

पेशेवर रिश्तों से इतर, गिरिजेश रिश्ते निभाना जानते थे। मुझे हमेशा अभिभावक की तरह देखते थे। उनका भरोसा ही था कि उनकी शादी में मुझे मध्यस्थ बनने का सौभाग्य मिला। आज जब उनके जाने की खबर आई, तो सबसे पहले ख्याल उनकी धर्मपत्नी रीता का आया। उन पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वो खामोश साथी, जो हर उतार-चढ़ाव में गिरिजेश की ताकत बना, आज अकेला रह गया।

गिरिजेश कम बोलते थे, पर जब बोलते थे तो लगता था शब्द तौलकर रखे गए हैं। कभी किसी की बुराई नहीं, किसी से ऊंची आवाज में बात नहीं। न्यूज़रूम की आपाधापी में भी चेहरे पर एक सौम्यता बरकरार रहती थी। आज की पत्रकारिता में ऐसे ‘शानदार आदमी’ कम ही मिलते हैं।

गोरखपुर की गलियों से निकला वो लड़का, जिसने अपने काम और व्यवहार से हर न्यूज़रूम में इज्जत कमाई, आज सिर्फ यादों में है। राजशेखर के बाद गिरिजेश का जाना, गोरखपुर पत्रकारिता के एक पूरे युग का अंत है।

अलविदा गिरिजेश। तुम्हारी खामोशी, तुम्हारी संवेदना, तुम्हारी वो अधूरी स्क्रिप्ट… सब कुछ बहुत याद आएगा। ईश्वर उनकी धर्मपत्नी रीता और परिवार को यह वज्रपात सहने की शक्ति दे।

तुम जहां भी रहो, अपनी कहानियां बुनते रहना। हम यहां तुम्हें पढ़ते रहेंगे, अपनी यादों में। विनम्र श्रद्धांजलि…

मूल खबर…

टीवी9 भारतवर्ष के एग्जीक्यूटिव एडिटर गिरिजेश मिश्रा का निधन!

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