नई दिल्ली। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को सलाह दी है कि जिन दिनों तक न्यूज चैनलों की टीआरपी (टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट) जारी नहीं की गई, उस अवधि का सब्सक्रिप्शन शुल्क उनसे न लिया जाए।
मंत्रालय ने पिछले सप्ताह BARC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नकुल चोपड़ा को भेजे एक पत्र में कहा कि जब न्यूज चैनलों को टीआरपी सेवाएं उपलब्ध ही नहीं कराई गईं, तो उस अवधि के लिए उनसे शुल्क वसूलना उचित नहीं होगा।
पत्र में मंत्रालय ने कहा, “चूंकि न्यूज चैनलों को टीआरपी सेवाएं प्रदान नहीं की गईं, इसलिए BARC को सलाह दी जाती है कि जिस अवधि में टीआरपी रोकी गई थी या अब भी रोकी हुई है, उस दौरान का सब्सक्रिप्शन शुल्क न्यूज चैनलों से न लिया जाए।”
मंत्रालय ने इस संबंध में 6 मार्च, 31 मार्च, 6 मई और 1 जून 2026 को भेजे गए अपने पहले के पत्रों का भी उल्लेख किया है। इन पत्रों में न्यूज चैनलों की टीआरपी रोकने के निर्देश दिए गए थे।
दरअसल, नए टीआरपी ढांचे को लागू किए जाने की प्रक्रिया के बीच हिंदी, अंग्रेजी, क्षेत्रीय और बिजनेस न्यूज समेत सभी न्यूज चैनलों की रेटिंग जारी करना फिलहाल स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद से कई बार इस अवधि को बढ़ाया गया और अब तक टीआरपी बहाल नहीं हो सकी है।
न्यूज ब्रॉडकास्टर्स की मांग रही है कि टीआरपी ऐसे पारदर्शी सिस्टम के तहत जारी की जाए, जिसमें “लैंडिंग पेज” के जरिए मिलने वाली कृत्रिम दर्शक संख्या को रेटिंग में शामिल न किया जाए।
क्या है लैंडिंग पेज विवाद?
टीवी रेटिंग नीति-2026 के तहत यह प्रावधान किया गया कि यदि किसी चैनल को टीवी ऑन करते ही लैंडिंग पेज या बूट-अप स्क्रीन पर दिखाया जाता है, तो उससे मिलने वाली दर्शक संख्या को टीआरपी में नहीं जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि यह दर्शकों की वास्तविक पसंद नहीं होती, बल्कि तकनीकी व्यवस्था के कारण मिलने वाली मजबूरन दृश्यता होती है।
हालांकि, BARC ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए दिशा-निर्देश भी तैयार कर लिए थे। इसके मुताबिक यदि दर्शक बाद में अपनी पसंद से उसी चैनल को देखते हैं, तो उस व्यूअरशिप को टीआरपी में शामिल किया जाएगा।
लेकिन इस नई व्यवस्था पर रोक लग गई, जब केरल हाईकोर्ट ने 22 मई को अंतरिम आदेश जारी करते हुए टीवी रेटिंग नीति-2026 के उस प्रावधान के अमल पर रोक लगा दी, जिसमें लैंडिंग पेज से मिलने वाली दर्शक संख्या को बाहर रखने की बात कही गई थी।
यह याचिका ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और DEN नेटवर्क्स की ओर से दायर की गई थी। उनका कहना है कि यह प्रावधान उचित नहीं है।
अब इस मामले में केरल हाईकोर्ट 8 जून को सुनवाई करेगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अंतरिम रोक हटाने और मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है। पहले इस मामले की अगली सुनवाई 19 जून तय की गई थी।
उद्योग जगत की नजर अब हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है, क्योंकि इससे न केवल न्यूज चैनलों की टीआरपी दोबारा शुरू होने का रास्ता तय होगा, बल्कि भारत में टीवी रेटिंग व्यवस्था की दिशा भी काफी हद तक प्रभावित होगी।


