Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

वेब-सिनेमा

क्या भारत जनसंख्या विस्फोट से निकलकर अब जनसंख्या गिरावट के दौर में प्रवेश कर रहा है?

Horizontal bar chart titled 'Subcontinental Scandinavia' showing fertility rate per woman in 2024 for regions such as India, United States, Norway and Indian states, with a 0–3 births per woman scale.

नई दिल्ली। दशकों तक भारत में “जनसंख्या विस्फोट” को सबसे बड़ी समस्या बताया जाता रहा। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। केंद्र सरकार की ताजा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2024 रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate-TFR) घटकर 1.9 पर आ गई है। यह पहली बार है जब देश की प्रजनन दर प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level) 2.1 से नीचे पहुंची है।

इसी मुद्दे पर दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क ने भी चिंता जताई है। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर AFP की रिपोर्ट साझा करते हुए लिखा कि भारत की जन्म दर अब प्रतिस्थापन स्तर से नीचे चली गई है।

आखिर TFR क्या होता है?

टोटल फर्टिलिटी रेट (TFR) का मतलब है कि एक महिला अपने पूरे प्रजनन काल (15 से 49 वर्ष) में औसतन कितने बच्चों को जन्म देती है।

2.1 – प्रतिस्थापन स्तर
इससे ऊपर – आबादी बढ़ती रहती है
इससे नीचे – लंबे समय में आबादी स्थिर होकर घटने लग सकती है

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत की आबादी कल से कम होने लगेगी।

क्या भारत की आबादी अब घटने लगेगी?

इसका जवाब है—अभी नहीं।

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत के पास अभी बड़ी युवा आबादी है। इसे “Population Momentum” कहा जाता है। यानी जन्म दर कम होने के बावजूद आने वाले दो-तीन दशकों तक आबादी बढ़ती रह सकती है।

लेकिन अगर लंबे समय तक TFR 2.1 से नीचे बना रहा, तो भविष्य में भारत को भी जापान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है—

  • बुजुर्ग आबादी का बढ़ना
  • कामकाजी युवाओं की कमी
  • पेंशन और स्वास्थ्य खर्च में बढ़ोतरी
  • आर्थिक विकास की रफ्तार पर असर
  • किन राज्यों में सबसे कम बच्चे पैदा हो रहे हैं?

SRS 2024 रिपोर्ट के अनुसार:

राज्य/क्षेत्र TFR

  • दिल्ली 1.2
  • केरल 1.3
  • तमिलनाडु 1.3
  • पश्चिम बंगाल 1.3
  • आंध्र प्रदेश 1.4
  • तेलंगाना 1.5
  • राजस्थान 2.3
  • उत्तर प्रदेश 2.6
  • बिहार 2.9

दिल्ली की प्रजनन दर 1.2 है, जो फिनलैंड जैसे कई विकसित देशों से भी कम है। बिहार अब भी सबसे ऊपर बना हुआ है।

सिर्फ 6 राज्य ही बचे हैं प्रतिस्थापन स्तर से ऊपर

रिपोर्ट के मुताबिक अब केवल छह राज्यों में TFR 2.1 से अधिक है—

  • बिहार
  • उत्तर प्रदेश
  • मध्य प्रदेश
  • राजस्थान
  • छत्तीसगढ़
  • झारखंड

बाकी लगभग पूरे देश में प्रजनन दर प्रतिस्थापन स्तर से नीचे पहुंच चुकी है।

क्या यह संकट है या अच्छी खबर?

इस पर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है।

अच्छी खबर इसलिए:

  • जनसंख्या का दबाव कम होगा।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति खर्च बढ़ सकेगा।
  • संसाधनों पर बोझ घटेगा।
  • महिलाओं की शिक्षा और रोजगार में वृद्धि का संकेत है।

चिंता इसलिए:

  • भारत बूढ़ा होने से पहले अमीर नहीं बन पाया।
  • दक्षिण और शहरी भारत तेजी से वृद्ध समाज की ओर बढ़ रहे हैं।
  • भविष्य में श्रमिकों की कमी हो सकती है।
  • सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

एलन मस्क क्यों चिंतित हैं?

एलन मस्क लंबे समय से दुनिया में गिरती जन्म दर को सबसे बड़े खतरों में से एक बताते रहे हैं। उनका मानना है कि अगर विकसित और विकासशील देशों में जन्म दर लगातार गिरती रही, तो भविष्य में आर्थिक और सामाजिक संकट पैदा हो सकता है।

हालांकि भारत के मामले में विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है। भारत के पास अभी भी दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। असली चुनौती यह है कि इस “जनसांख्यिकीय लाभांश” का सही उपयोग किया जाए।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन