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मध्य प्रदेश

दैनिक भास्कर भोपाल के पहले पन्ने पर छपे कांतिलाल और अक्षय बम पर नजर पड़ी तो विज्ञापन के प्रति नजरिया ही बदल गया!

दीपक तिवारी-

पैसा सब कुछ ख़रीद सकता है लेकिन चरित्र और ऊँचे संस्कार नहीं!

दैनिक भास्कर भोपाल में पहले पन्ने पर यह विज्ञापन सामान्य रूप से किसी भी प्राइवेट शैक्षणिक संस्थान के प्रचार के तौर पर ही दिखा। लेकिन जब इसमें इसके संस्थापक की फ़ोटो पर नज़र पड़ी तो पूरे विज्ञापन के प्रति नज़रिया ही बदल गया।

महात्मा गांधी कहते थे कि चरित्र के बिना शिक्षा व्यर्थ (पाप) है। जो भी अपने क्षेत्र का लीडर है – जैसे शिक्षक, डाक्टर, पत्रकार, समाजसेवी, धार्मिक पदों पर आसीन लोग, राजनीतिज्ञ इत्यादि उनसे अपेक्षा की जाती है कि वह समाज में उच्च आदर्श प्रस्तुत करेंगे।

इस संस्थान के महानुभाव कांग्रेस के नेता हुआ करते थे लेकिन 2024 में ऐन वक्त पर वे लोकसभा के चुनाव से अलग हट गए और भाजपा को निर्विरोध जीतने दिया। वह क्यों और कैसे हुआ सब जानते हैं।

अब यह महाशय अपने कानून पढ़ाने के संस्थान में भविष्य के वकील तैयार करेंगे। सब जानते हैं कि वकालत में वकील दो पक्ष के होते हैं। अब यदि एक पक्ष का वकील धन के प्रलोभन या किसी डर से अपने विपक्षी क्लाइंट से मिल जाये तो क्या हो?

पिछले डेढ़-दो दशकों में जिस तरह नैतिकता, शुचिता और ईमानदारी के पारंपरिक भारतीय मूल्यों का सत्ताधारियों ने सामान्यीकरण किया है उसका खामियाजा आने वाले नस्लों को भुगतना है।

Front page newspaper ad for Indore Institute of Law featuring a campus image and a statue of Lady Justice with admissions information above and below the fold.

वैसे विज्ञापन के मुताबिक इस संस्थान को पहला रैंक Best Concrete Structure in India में मिला है।

हाँ एक बात और यह शिक्षा का पूरा गुलदस्ता है यहाँ – Management, Design और Nursing के संस्थान भी हैं। बस मेडिकल कॉलेज की कमी है!


कौन हैं कांतिलाल बम और अक्षय बम?

कांतिलाल बम इंदौर के शिक्षाविद हैं और भाजपा नेता अक्षय कांति बम के पिता हैं, पहले यह कांग्रेस में हुआ करते थे। पिछले कुछ वर्षों में वे अपने परिवार से जुड़े एक पुराने आपराधिक मामले और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुए राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण चर्चा में रहे हैं।

कांतिलाल बम और उनके बेटे अक्षय बम के खिलाफ वर्ष 2007 के एक मारपीट और बलवा मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। बाद में इस मामले में हत्या के प्रयास (आईपीसी की धारा 307) का आरोप भी जोड़ा गया था।

हालांकि, अप्रैल 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कांतिलाल बम और अक्षय बम के खिलाफ लगाए गए हत्या के प्रयास के आरोप को हटाने का आदेश दिया। अदालत के इस फैसले से दोनों को बड़ी कानूनी राहत मिली।

कांतिलाल बम का नाम 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी सुर्खियों में आया था। उनके बेटे अक्षय कांति बम इंदौर सीट से कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किए गए थे, लेकिन मतदान से 15 दिन पहले उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया था।

इसी वजह से कांतिलाल बम और उनका परिवार कानूनी और राजनीतिक दोनों कारणों से लगातार चर्चा में बना रहा।

Two men wearing saffron scarves with a BJP lotus symbol at a political event, smiling and talking to each other
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