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साहित्य

हिंदी और भोजपुरी के प्रसिद्ध लेखक विवेकी राय का निधन

वाराणसी : हिंदी और भोजपुरी के प्रसिद्ध लेखक विवेकी राय का आज वाराणसी में निधन हो गया. वे 93 वर्ष के थे. उन्होंने तड़के करीब 4.45 बजे अंतिम सांस ली. सांस लेने में दिक्कत की वजह से वाराणसी के निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उन्होंने 19 नवंबर को ही अपना 93वां जन्मदिन मनाया था. वह मूल रूप से गाजीपुर के सोनवानी गांव के निवासी थे. 

वाराणसी : हिंदी और भोजपुरी के प्रसिद्ध लेखक विवेकी राय का आज वाराणसी में निधन हो गया. वे 93 वर्ष के थे. उन्होंने तड़के करीब 4.45 बजे अंतिम सांस ली. सांस लेने में दिक्कत की वजह से वाराणसी के निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उन्होंने 19 नवंबर को ही अपना 93वां जन्मदिन मनाया था. वह मूल रूप से गाजीपुर के सोनवानी गांव के निवासी थे. 

उन्होंने 50 से अधिक पुस्तकों की रचना की. वे ललित निबंध और कथा साहित्य के रचयिता थे. उनकी रचनाएं ग्रामीण पृष्ठभूमि का बहुत ही सुंदर चित्रण करती थी. ललित निबंध विधा में इनकी गिनती आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्र और कुबेरनाथ राय की परंपरा में की जाती है. ‘मनबोध मास्टर की डायरी’ और ‘फिर बैतलवा डाल पर’ इनके सबसे चर्चित निबंध संकलन हैं और ‘सोनामाटी’ उपन्यास राय का सबसे लोकप्रिय उपन्यास है.

इन्हें 2001 में महापंडित राहुल सांकृत्यायन पुरस्कार से और 2006 में यश भारती सम्मान से सम्मानित किया गया था. डॉ. राय ने हिंदी के साथ ही भोजपुरी साहित्य जगत में भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी. उन्होंने आंचलिक उपन्यासकार के रूप में ख्याति अर्जित की. उन्होंने 50 से अधिक पुस्तकें लिखी. विवेकी राय को मूलत: ललित निबंध, कथा साहित्य के लिए जाना जाता था.

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