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डोनाल्ड ट्रंप की जीत भारत के लिए कितना मायने रखती है? पढ़ें

कोविड काल में ट्रंप ने वैक्सीन को लेकर जिस अभद्र और अपमानजनक लहजे में भारत को सरेआम धमकाया था और भारत ने मानवता का हवाला देकर उसकी धमकी को इग्नोर करते हुए वैक्सीन भेजी भी थी, वह भी कोई बहुत पुरानी बात नहीं है। यह सब कुछ तब हो रहा था, जब मोदी और ट्रंप की दोस्ती के तमाम किस्से इंटरनेट और मीडिया में तैर रहे थे…

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-

अमेरिका में ट्रंप की जीत का असर अमेरिका और पूरी दुनिया पर तो पड़ना ही है, भारत पर भी बहुत गहरा असर आना है।

मोदी और ट्रंप की गहरी दोस्ती का तर्क देकर यह दावा किया जा रहा है कि ट्रंप के आने के बाद अब भारत के लिए अमेरिका के सुर बदलने वाले हैं।

कनाडा से विवाद हो, रूस से भारत के रिश्ते हों या पाकिस्तान आदि के मसलों में बिडेन और कमला हैरिस की पार्टी की सरकार ने भारत को ज्यादा अहमियत नहीं दी इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि मोदी और ट्रंप की दोस्ती यह सब कुछ पलट कर रख देगी।

जिन्हें ऐसा लगता है, उन्हें ट्रंप के पिछले कार्यकाल की याद नहीं है शायद। ट्रंप ने अमेरिका में भारतीय समुदाय ही नहीं बल्कि भारत के छात्रों और व्यापार के मसले पर अपनी सरकार में ऐसी नीतियां बना दी थीं, जिनसे भारत और भारतीय खासे त्रस्त हो चुके थे।

यही नहीं, कोविड काल में ट्रंप ने वैक्सीन को लेकर जिस अभद्र और अपमानजनक लहजे में भारत को सरेआम धमकाया था और भारत ने मानवता का हवाला देकर उसकी धमकी को इग्नोर करते हुए वैक्सीन भेजी भी थी, वह भी कोई बहुत पुरानी बात नहीं है। यह सब कुछ तब हो रहा था, जब मोदी और ट्रंप की दोस्ती के तमाम किस्से इंटरनेट और मीडिया में तैर रहे थे।

बहरहाल, ट्रंप के इस कार्यकाल में भारत को कनाडा से बढ़ता तनाव, अमित शाह की बदनामी, रूस यूक्रेन युद्ध में भारत का अमेरिका की धमकी के सामने न झुकना आदि तमाम ऐसे मसलों पर अमेरिका से नरम रुख चाहिए होगा। बिडेन और कमला हैरिस की पार्टी की सरकार चूंकि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि कमोबेश हर मसले पर ढुलमुल रुख अपनाते आए हैं, इसलिए भारत समेत पूरी दुनिया में अमेरिकी सरकार का रसूख पहले जैसा नहीं रहा।

ट्रंप ने रसूख का यही मुद्दा उठाकर चुनाव लड़ा है इसलिए भारत हो या दुनिया का कोई और देश अथवा मुद्दा, कहीं भी ट्रंप से नरमी की उम्मीद करना सिवाय खामख्याली के कुछ नहीं होगा। ट्रंप को अमेरिका की घटती चौधराहट को वापस पटरी पर लाना है। इसके लिए अगर उन्होंने कनाडा या रूस यूक्रेन अथवा व्यापार / विदेश नीति / वीजा आदि मसलों पर कड़े तेवर दिखाए तो फिर भारत के लिए ट्रंप का आना कहीं से अच्छा नहीं माना जा सकता।

ट्रंप के लिए अमेरिकी हित और दुनिया में उसकी चौधराहट को छोड़कर शायद ही कोई और चीज ज्यादा अहम हो, मोदी से निजी दोस्ती भी नहीं। लेकिन अभी दावे से यह भी नहीं कहा जा सकता कि उपरोक्त मसलों पर ट्रंप भारत को लेकर क्या रवैया अपनाने वाले हैं।

लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि भारत और कनाडा में ट्रंप किसी एक को चुनने वाले हैं तो जाहिर सी बात है दूसरे के लिए वह बहुत कठोर भी हो जाएंगे। इसी तरह रूस से चल रही दुश्मनी अगर ट्रंप के कार्यकाल में बढ़ी तो फिर रूस के खेमे में नजर आने वाला हर देश ट्रंप और अमेरिका की नजर की किरकिरी बन कर खासी मुश्किलें भी झेलने वाला है।

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