विशाल पांडेय-
डॉ नरेश त्रेहन और डॉ सोइन, मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम. इंसानियत बची हो तो सुन कर सुधार लाइएगा. आप मेरे दोस्त के इस परिवार की आवाज़ को सुनिएगा ज़रूर, क्योंकि समय पर सही तरीक़े से सुना होता तो आज ये अपने को खोने का दर्द नहीं झेल रहे होते.
एक अच्छा ख़ासा व्यक्ति अपने पैरों पर चलकर आपके अस्पताल पहुंचता है लेकिन लापरवाही के कारण अब वो नहीं रहे.
लखनऊ के वासुदेव डेम्बला लीवर ट्रासप्लांट के लिए 22 दिसंबर को मेदांता गुरूग्राम में भर्ती हुए. उनके परिवार वालों के मुताबिक़ यह बताया गया कि 5 दिनों में सर्जरी का आश्वासन दिया गया था.
इससे पहले ILBS की टीम ने इनका चेक अप कर 3 महीने बाद सर्जरी प्लान करने के लिए कहा था और घर जाने के लिए कहा था. लेकिन परिवार को लगा कि मेदांता जाकर अभी जल्दी लीवर ट्रांसप्लांट करा लें. लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि उनका अनुभव सबसे बुरा होगा.
लेकिन मेदांता में 22 दिसंबर से 1 मार्च तक सिर्फ और सिर्फ इंफ़ेक्शन का इलाज होता रहा. परिवार वालों का आरोप है कि इलाज के दौरान कई स्तर पर लापरवाही बरती गई. जब भी कोई शिकायत की जाए तो उसे दूर करने पर ज़ोर नहीं दिया गया. शिकायतों की लंबी श्रृखंला है.
लीवर का इलाज तो बहुत दूर की बात हो गई थी, इलाज तो कुछ और ही चलने लगा.
डॉ त्रेहन जी मैंने आपको कई बार फ़ोन किया, आपको जानने वाले लोगों ने भी आपको फ़ोन किया और सिर्फ यही कहा गया कि इलाज और देखभाल सही करा दीजिए. लेकिन कोई ख़ास फ़र्क़ आपके ऊपर नहीं पड़ा. परिवार परेशान रहा और डॉ सोइन जब 28 फ़रवरी को परिवार से मिले तो उनका रवैया किसी भी एंगल से उनके पद और गरिमा के अनुकूल नहीं रहा.
आम लोगों के द्वारा बिल और पैसे की बात उठाना ही बेकार की बात है, क्योंकि बड़े अस्पताल इसे तो अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानने लगे हैं. सही समय पर सच्चाई दिखाने के लिए ज़रूर साझा किया जाएगा.
मानवता मर चुकी है, संवेदनाएं और डर ख़त्म हो गया है. क्योंकि देश की जानी मानी हस्तियों का इलाज इन जैसे बड़े अस्पतालों में होता है, उन्हें पूरी अच्छी व्यवस्था दी जाती है. तो फिर डर कैसा? किसी से मत डरिए लेकिन भगवान से ज़रूर डरिए!
मैं अपने दोस्त से क्षमाप्रार्थी हूँ कि जाने अनजाने में मैंने डॉ त्रेहन या उनकी टीम के द्वारा दिए गए इंटरव्यू को कभी भी किया हो और उस वजह से उनकी “असली” छवि पर पर्दा लगा हो, हमारे प्रचार प्रसार की वजह से बड़े अस्पताल की ओर जाने को समाज मजबूर होता है, तो मैं माफ़ी माँगता हूँ. आगे से मैं ऐसा नहीं करूँगा.
डॉक्टर सच में भगवान होते हैं, मैं बहुत से डॉक्टर को जानता हूँ जो सच में भगवान जैसा काम करते हैं लेकिन कुछ बड़े अस्पतालों के बड़े नामों ने निराश कर दिया है.
मैं सभी से यही अनुरोध करूँगा कि जिस डॉक्टर या अस्पताल को आप लंबे समय से जानते हैं, सिर्फ़ वहीं जाइए. बड़े ब्रांड और बड़े नाम की तरफ़ मत भागिए.
विजय अक्षित-
भारत के सबसे बड़े लीगल डकैत का नाम है डॉक्टर नरेश त्रेहान, इसे सबसे बड़ा दिल का डॉक्टर माना जाता है। इन्हें सरकार ने पद्म भूषण पद्म श्री समेत तमाम अवार्ड से सरकार उपाधि दे चुकी है।

ये भाई साहब साहब सफेद मनी में 40 हज़ार करोड़ की कंपनी मेदांता ग्रुप एंड कंपनी चलाते हैं, ये इतने बड़े स्वास्थ्य माफिया हैं की आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं। इनपर गुड़गांव में लोगो की जमीन बेदखल कर जबरदस्ती जमीन कब्जा करने का केस चल रहा है, उससे बड़ा केस इनपर और इनके पार्टनर समेत इनके 15 लोगो पर ED ने मनी लांड्रिंग समेत 7 केस दर्ज कर रखा है। लेकिन आज तक जाँच शुरू नहीं हुआ। आप इनके हॉस्पिटल का कारनामा जानना हो तो हॉस्पिटल में गए आम लोगों से पूछ सकते हैं। रूह काँप जाएगा।
बाक़ी कल सपा की एक शराबी मोहतरमा कह रही थी की माना की मेदांता लूट मचाता है लेकिन फैसिलिटी भी तो देता है, बताइये जिस देश में 100 करोड़ लोगों की आमदनी 8 हज़ार रुपये से भी कम हैं वहाँ इस अस्पताल के बेड के एक दिन का 2 लाख रुपये से भी अधिक किराया है। जो जाँच बाहर 5 हज़ार में होता है वो जाँच ये अपने अस्पताल में 35 हज़ार में करते हैं, अगर बाहर से करवा कर आयेंगे तो उस जाँच को माना नहीं जाएगा। आपको जो भी करवाना है वो हॉस्पिटल के अंदर से ही करवाना होगा।
अब आप कहेंगे की अमीर लोग जाते होंगे, उससे आपको क्या जबरदस्ती तो वो बुलाता नहीं? तो भाई साहब ये जान लीजिए की सरकार इन्हें अस्पताल के लिए ज़मीन मुफ्त में या बहुत सस्ते दर पर देती है, टैक्स में छूट देती है, हर तरह का इन्हें सुविधा देती है, और जब सरकार का तरह की मुफ्त जमीन और टैक्स छूट देती है तो वो पैसा इस देश के आम आदमी का है और उसे सस्ता स्वास्थ्य सुविधा का अधिकार है।
वैसे भी देश के संविधान और कानून जो स्वास्थ्य सेवा के लिए बना है इसमें आम लोगो को सस्ती इलाज और 20% लोगो को मुफ्त इलाज करने का नियम होता है, लेकिन ये लोग क्या करते हैं किसी से छुपा नहीं है। मैं इनके सिस्टम के अंदर रह कर इस कुचक्र को देखा हूँ।
भारत में सबसे बड़ा लीगल माफिया कोई है तो ये प्राइवेट अस्पताल और प्राइवेट स्कूल वाले लोग हैं। ये सरकार की नाकामियां है की इस देश में 5 स्टार प्राइवेट हॉस्पिटल है, विकसित देशों में ऐसे कुकुरमुत्ते की तरह हर गली में प्राइवेट अस्पताल नहीं है क्योंकि वहाँ सरकारी अस्पताल प्राइवेट से बेहतर है। यहाँ प्राइवेट अस्पतालों में नेताओं का पैसा लगा हुआ है, आप कहाँ जाओगे? पैसा नहीं है तो ख़ुद को बेच कर इलाज करवाना होगा। जान तो बचाना है ना? बाक़ी आप सोच रहे हैं की ये भाजपा सरकार है इसलिए ये लूट मचा रहा तो मैं आपको बता दूँ की मेदांता की स्थापना 2009 में हुईं और इसकी स्थापना में कांग्रेस का पूर्ण योगदान रहा, हरियाणा का वो कांग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेंद्र हूडा तब मुख्यमंत्री था , पूरा जमीन का खेल उसी का था, बाकी सरकार आती जाती रहेगी, इस माफिया का पूरा राज चलता रहेगा।
अब भाजपा को इससे पैसा पहुँच रहा होगा। बिना सरकार को चढ़ावा चढ़ाये एक दिन ये हॉस्पिटल नहीं चला सकते, इसलिए इनके ऊपर सरकार का पूर्ण सहयोग इस तरह होता है की आज तक इस देश में किसी प्राइवेट हॉस्पिटल पर कोई करवाई ही नहीं हुई, इन लोगों पर कोई लगाम लगाने वाला नहीं है। इन लोगो में इंसानियत रत्ती भर भी नहीं है। दरिंदे होते हैं ये, ये लोग सेल्स मैन रख कर सेल करने का टारगेट देते हैं, दलालों को अस्पताल में पेशेंट लाने के लिए कमीशन देते हैं।
क्या सरकार को नहीं पता है या आप लोगों को नहीं पता है? फिर भी खुले आम सब मस्ती में चल रहा है। बाकी एक केजरीवाल था जिसने दिल्ली में max हॉस्पिटल पर कड़ी कारवाई किया था, लेकिन मैक्स के मालिक ने सीधा एलजी और केंद्र सरकार से केजरीवाल के आदेश को रद्द करवा दिया था। इतने पावरफुल हैं ये स्वास्थ्य माफिया। बाक़ी केजरीवाल इन लीगल माफिया को ख़त्म करने के लिए सरकार स्कूल और सरकारी अस्पताल प्राइवेट से बेहतर बना रहा था तो ऐसे ही माफियाओं ने मिल कर केजरीवाल को हरा दिया।
हम सब लोग एक माफिया के साये में जी रहे हैं, उसे जब जरूरत होगा आपसे पैसा, शरीर का अंग जो मन होगा वो निकाल लेगा। बाक़ी सरकारों का क्या? सरकार तो फिलहाल मस्जिद के अंदर मंदिर ढूँढने में व्यस्त है।


