हृदय ऑपरेशन का पूरे भारत में सबसे महंगा अस्पताल, देश के नामी निजी संस्थानों से भी दो गुने दाम पर होती है यहां सर्जरी…

डॉ ओम शंकर-
CTVS विभाग जिनको पहले लहरी साहब की ईमानदारी के नाम से जाना जाता था, आज वही भ्रष्टाचार की स्याही के लिए मशहूर हो गया है। यहां कमीशनखोरी का खेल इस तरह खुलेआम और बेखौफ तरीके से चल रहा जिसकी कोई सीमा नहीं है।
मरीज चाहे गरीब हो, निरीह हो, निर्बल हो, बीमार हो, लाचार हो, मुख्यमंत्री – प्रधानमंत्री से सहायता प्राप्त हो अथवा आयुष्मान कार्ड धारक, उनको ऑपरेशन से पहले लंका के खाश दवा की दुकान पर जमीन-जायदाद बेचकर अथवा कर्ज लेकर 2-3 लाख रुपए जमा करना होता है।
उसके बाद जब वो भर्ती हो जाते हैं, तो उनके शोषण का एक नया खेल शुरू होता है। यह खेल है कमीशन के लिए बिना जरूरतों के ऑपरेशन से पहले दवाइयां चढ़ाना। रोज मरीजों को बेवजह 25- 25 हजार रुपयों तक की फर्जी दवाएं चढ़ाई जाती है। बेचारे मरीजों को समझा दिया जाता है, कि ये आपकी जान बचने के लिए किया जा रही है। वो अब कहीं भाग भी तो नहीं सकता है। कई मामलों में तो यह थाने तक भी पहुंचा, लेकिन आवाज उठाने वालों के विरुद्ध ही करवाई हो गई।
बेचारा! मरता क्या न करता।
फिर ऑपरेशन में लगने वाले जिस वाल्व की कीमत अन्य सरकारी संस्थानों में एक – सवा लाख होती है, यहां उसी वाल्व के लिए दो से ढाई लाख वसूले जाते हैं। अथवा दो गुणी कीमत!
खेल यहीं नहीं रुकता, बल्कि ऑपरेशन के बाद फिर दवाओं में कमीशन का खेल फिर से शुरू हो जाता है और तबतक जारी रहता है जबतक वो सारी जमीन जायदाद बेचकर सड़क पर नहीं आ जाता है। यहां वाल्व बदलने अथवा किसी अन्य ऑपरेशन पर आने वाला खर्च, देश के किसी भी सबसे अच्छे निजी अस्पतालों से भी कम से कम दो गुना है। मरीजों को जबतक यह एहसास होता कि इससे बेहतर तो किसी निजी संस्थानों में ऑपरेशन करवा लेता, तबतक तो वह लुट चुका होता है।
यह खेल पूरे संगठित तौर पर चलता है, जिसमें भी चिकित्सा अधीक्षक डॉ के के गुप्ता संपूर्ण रूप से शामिल है। इस भ्रष्टाचार की पूरी जानकारी उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी है, जो मौन रहकर इनको संरक्षण दे रहे हैं। उनको इससे आर्थिक लाभ हो रहा है या नहीं, इसके प्रमाण अभी मेरे पास नहीं हैं!
इस विभाग में भर्ती और ऑपरेशन होनेवाले मरीजों की संख्या, हमारे हृदय विभाग की तुलना में एक बटे दसवां है। विभाग के किसी भी डिग्री/इकाई को अबतक NMC से मान्यता भी प्राप्त नहीं है, फिर भी इस विभाग को के के गुप्ता जी ने मानकों के हिसाब से तीन गुने बिस्तर दिए हुए हैं। मतलब दस गुने काम करने वाले हृदय विभाग को 41 बिस्तर और दस गुने कम काम करनेवाले विभाग को 60 बिस्तर, जिसमें ज्यादातर खाली पड़े रहते हैं।
इसके अलावा CTVS विभाग के खुद के पास तीन ऑपरेशन थियेटर हैं, जिसमें से आजतक कभी भी डेढ़ से ज्यादा इस्तेमाल नहीं हुए। उन सालों से बंद पड़े CTVS विभाग के ऑपरेशन थियेटर को चालू करने की जिम्मेदारी चिकित्सा अधीक्षक के के गुप्ता की है, जिसे छोड़कर वो कमिशन खाने में मस्त है।
के के गुप्ता अपने प्रशासनिक दायित्वों को निभाने के बदले CTVS विभाग के चिकित्सकों को सह देकर अपनी OT चलाने के बदले सालों से मेरे एक ओटी पर तला लगवाया हुआ है, जो अभी भी जारी ही है। के के गुप्ता, इसके अलावा हृदय विभाग, जिसको आज बिस्तरों की सबसे ज्यादा जरूरत है, उससे 49 बेड छीनकर दूसरे विभाग को दे दिया है, जिससे हृदय विभाग के पास आज NMC मानकों के अनुसार मात्र 41 बेड उपलब्ध है। जो हर महीने हजारों लोगों की जान जाने की वजह बनी हुई है। ज्ञात हो कि इसी के लिए मैने मई महीने में 21 दिनों तक आमरण अनशन भी किया था।
CTVS विभाग के चिकित्सकों संग शोषण का अलम यह है कि एक महिला चिकित्सा हाल हीं में प्रताड़ना से तंग आकर इस्तीफा देने को मजबूर हुई और दूसरे के ऊपर प्रशासन संग मिलकर छोड़कर भागने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, ताकि खुलकर मरीजों का शोषण कर पाएं।
उम्मीद करता हूं कि भ्रष्टाचारी के के गुप्ता के विरूद्ध FIR दर्ज होने के बाद अब उसे तुरंत प्रभाव से पद से हटाया जाएगा और लहरी साहब के CTVS विभाग में जारी भ्रष्टाचार और मरीजों के शोषण को बन्द करवाकर उसकी खोई प्रतिष्ठा वापिस की जाएगी!


