विवेक शुक्ला-
अगर एम्स पर रोगियों का भरोसा है, तो इसका श्रेय यहां के उन तमाम डॉक्टरों और बाकी स्टाफ को जाता है जिन्होंने इधर सालों- दशकों तक सेवाएं दीं। उनमें एक नाम नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राजवर्धन आजाद का भी लेना होगा। वे एम्स के राजेन्द्र प्रसाद आई सेंटर को खड़ा करने वालों में से एक हैं। वे इसके डायरेक्टर भी रहे। उनका मुझे छोटे भाई की तरह से स्नेह और आशीर्वाद मिलता है। वे करीब साढ़े चार दशकों तक एम्स में स्टूडेंट से लेकर डायरेक्टर रहे। उन्होंने एम्स में पढ़ाया भी।
आजकल भी एम्स में प्रोफेसर एमेरिटस हैं। वे कहते हैं कि पढ़ाने का सुख अद्भुत होता है।
डॉ. राजवर्धन आजाद से आज उनके ग्रेटर कैलाश- पार्ट वन के क्लीनिक में मुलाकात हुई। उनका आदेश था कि मैं उनसे मिलूं। उसके बाद मेरे पास कोई विकल्प नहीं था कि मैं टाल-मटोल करूं। उन्हें भारत में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए जाना जाता है। डॉ. आजाद नेत्र रोगों, विशेष रूप से रेटिना संबंधित जटिल सर्जरी में विशेषज्ञता रखते हैं। उन्होंने अपने लंबे करियर में हजारों सर्जरी की हैं। उन्होंने नेत्र विज्ञान के क्षेत्र में दर्जनों शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।
उनकी एम्स में जिस दिन ओपीडी होती थी, वे उस दिन करीब तीस-चालीस रोगियों को देखते थे। वे रोगियों को देखकर वहां पर ही बता देते थे कि उनके इलाज का क्रम किस तरह से चलेगा। वे सर्जन तो हैं ही। जिस दिन एम्स में ऑपरेशन होते हैं, उस दिन कई रोगियों का ऑपरेशन करते थे। डॉ. साहब ने रेटिना की विभिन्न बीमारियों, जैसे कि डायबिटिक रेटिनोपैथी और उम्र से संबंधित मैकुलर डिजनरेशन (एएमडी) गहन शोध किया है। उन्होंने रेटिना की बीमारियों के इलाज के लिए नई तकनीकों और उपचार विधियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें लेजर थेरेपी, इंट्राविट्रियल इंजेक्शन, और सर्जिकल प्रक्रियाओं में सुधार शामिल हैं।
डॉ. साहब की विशेषज्ञता व्यापक है, जिसमें मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, रेटिना संबंधी बीमारियां और अन्य जटिल नेत्र रोग शामिल हैं। उन्हें जटिल मामलों को संभालने में महारत हासिल है।
मैं उनसे जब भी मिलता हूं तो एक बात जेहन में चलती रहती है कि पहले देश में प्रदेश के मुख्यमंत्री के बच्चे भी नौकरी करके अपना जीवन यापन करते थे। आज कितने मुख्यमंत्रियों के बच्चे सरकारी नौकरी करते हैं। आप जानते ही हैं कि उनके पिता बिहार के कद्दावर नेता भगवत झा आजाद जी थे। भगवत झा आजाद जी देश की पहली लोकसभा के सदस्य थे। वे बिहार के मुख्यमंत्री रहे, फिर केन्द्रीय मंत्री भी रहे। इंदिरा गांधी जी के विश्वासपात्र थे।
डॉ. साहब के एक भाई य़शोवर्धन आजाद सीबीआई के डायरेक्टर रहे और सबसे छोटे भाई कीर्ति आज़ाद हैं। उनके बारे में कौन नहीं जानता। उन्हें तब से जानता हूं जब वे मॉडर्न स्कूल में पढ़ते थे।
डॉ साहब की शख्सियत का एक पहलू और भी है। वे कवि भी हैं। उनकी कविता संग्रह ‘आयुष्य’ का आगामी जुलाई में विमोचन प्रस्तावित है। उसी से पेश है एक कविता-
काल का यह सृजन या विसर्जन,
जीव का विलोपन या जीवन का विघटन।
मनुष्य के संसार में अवतरण का प्रयोजन,
प्रश्न जटिल किन्तु अनुत्तरित है अन्वेषण।
डॉ साहब के साथ जब सत्संग चल रहा था तब झारखंड के पूर्व डीजीपी के.एन. चौबे भी आ गए। जाहिर है, इसके बाद सत्संग लंबा खिंच गया।


