विवेक त्रिपाठी-
सोलर प्लांट कंपनी से रिश्वतखोरी के मामले में निलंबित IAS अभिषेक प्रकाश की बहाली का रास्ता और भी मुश्किल हो गया है. दरअसल, नियुक्ति विभाग ने आईएएस अभिषेक प्रकाश को भटगांव जमीन अधिग्रहण घोटाले और सोलर कंपनी से रिश्वत मांगने के आरोप में चार्ज शीट दी है. अभिषेक प्रकाश से हर बिंदु पर 15 दिन में जवाब मांगा गया है.
अभिषेक प्रकाश 2006 बैच के आईएएस अफसर हैं. इन्वेस्ट यूपी के सीईओ पद पर रहते हुए उन पर सोलर प्लांट लगाने वाली कंपनी से एक दलाल के जरिए 400 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था. मुख्यमंत्री के निर्देश पर बीती 20 मार्च को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था.
अभिषेक प्रकाश जब लखनऊ में डीएम थे तब भी उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. वर्ष 2011 में सरोजनीनगर के भटगांव में डिफेंस कॉरिडोर के लिए भूमि का अधिग्रहण हुआ था. इस अधिग्रहण में काफी गड़बड़ियां हुईं. किसानों को जमीन की एवज में मिलने वाले मुआवजे के करोड़ों रुपए हड़प लिए गए थे.
तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश पर आरोप लगा कि सब कुछ जानने के बाद भी वो आंख मूंदे बैठे रहे. इसे बड़ी प्रशासनिक चूक माना गया था. इस मामले की जांच राजस्व परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष रजनीश दुबे ने की थी. उन्होंने अपनी जांच में डीएम और पीसीएस रैंक के अफसरों की भूमिका पर सवाल उठाए थे.
इसी तरह इन्वेस्ट यूपी में रहते हुए उन पर घूसखोरी के गंभीर आरोप लगे थे.
नियुक्ति विभाग ने राजस्व विभाग और औद्योगिक विकास विभाग से दोनों मामलों में पूरी रिपोर्ट मांगी थी जिसके आधार पर IAS अभिषेक प्रकाश को चार्जशीट दी गई है.
आईएएस अभिषेक प्रकाश को लेकर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी सरकार पर कटाक्ष करते रहते हैं.
फिलहाल, आईएएस अभिषेक प्रकाश के पास चार्जशीट में लगाए गए आरोपों का जवाब देने के लिए 15 दिन हैं. जवाब मिलने के बाद शासन ये तय करेगा कि इस मामले में जांच अधिकारी नियुक्त किया जाए या नहीं..
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