
कैलाश सिंह –
पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद का कहना है कि भारत, रूस और चीन व्यापारिक तौर पर मिल गए तो अमेरिका घुटनों पर आ जाएगा। भारत को लेकर दुनिया में मची आर्थिक और सामरिक उथल-पुथल के मद्देनज़र हुई एक बातचीत में देश के पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कई बेबाक टिप्पणियाँ की।

उन्होंने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को राह से भटका हुआ बताया और कहा कि जिस दिन भारत ‘चटगांव’ को अपने कब्जे में ले लेगा, उस दिन वहां के अस्थायी नेतृत्व के होश ठिकाने आ जाएंगे। वहां के सेंट मार्टिन द्वीप पर ही अमेरिका और चीन की नज़र है।
बांग्लादेश के रहन-सहन और संस्कृति व सभ्यता पर गहन अध्ययन कर चुके स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्ता-पलट से लेकर वर्तमान में जो कुछ चल रहा है उसके पीछे ‘अमेरिकी शह’ है। पाकिस्तान की सरकार उसी के इशारे पर चलती है। वहां का सेनापति आसिम मुनीर तो जोकर है और पीएम शाहबाज शरीफ ‘बग़ैर नाखून वाला बाघ’। पहलगाम की घटना के बाद ही भारतीय नेतृत्व ने सिंधु जल समझौते को स्थगित करके युद्ध का शंखनाद कर दिया था और संकेत भी दिया कि अब खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा।
अमेरिका के पास हथियारों का सबसे बड़ा कारोबार है। वह हमेशा दूसरे देशों को भिड़ाकर अपने हथियारों का सौदागर बनता है। इसके प्रमाण रूस-यूक्रेन और इज़राइल-फिलिस्तीन युद्ध से देखे जा सकते हैं। पाकिस्तान में भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने जो सामरिक शक्ति दिखाई है, उससे भारत के हथियारों का प्रदर्शन युद्ध में परीक्षण सरीखा होने से अमेरिका, चीन, तुर्किये आदि के कारोबार जमीन पर आ गए।
अमेरिकी टैरिफ के सवाल पर स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि भारत उनके टैरिफ वाले माल खरीदेगा ही नहीं तो क्या फ़र्क पड़ेगा? अपना सामान स्वदेशी की तर्ज पर उपभोग करेगा। दुनिया की नज़र भारतीय उपभोक्ता बाज़ार पर गड़ी है। हमारा नेतृत्व विदेशी व्यापारिक मामले में भी राइट ट्रैक पर चल रहा है। इसमें स्वदेशी का नारा बल प्रदान करेगा। भारत वैसे भी आर्थिक महाशक्ति बनने की तरफ अग्रसर है। वह लंबी अवधि वाले युद्ध में क्यों फंसेगा? लादेन को खोजने और मारने में खुद अमेरिका ने कितना समय गंवाया, जबकि भारतीय सेना ने कुछ हफ़्तों में बनाई अपनी योजना से चंद मिनट में आतंकी पनाहगार देश पाकिस्तान को सबक सिखा दिया।
स्वामी चिन्मयानंद का मानना है कि यदि भारत-रूस-चीन व्यापारिक तौर पर एक हो गए तो दुनिया के तमाम देश ही नहीं, अमेरिका भी घुटनों पर आ जाएगा। इस समय भारत आर्थिक और सामरिक तौर पर मजबूती में तेज़ रफ़्तार की ग्रोथ वाले देशों में शुमार है। रूस तो भरोसे का साथी है, लेकिन चीन से सावधानी भी ज़रूरी है। रहा सवाल देश के विपक्षी दलों का तो इंडी गठबंधन का कोई बड़ा सहयोगी कांग्रेस के साथ नहीं है। राहुल गांधी सदन में नेता प्रतिपक्ष हैं, लेकिन वह विदेशी इशारे पर देश-विरोधी कार्यों में लीन हैं।


