
संजय कुमार सिंह
आज मेरे ज्यादातर अखबारों की लीड संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने (अमर उजाला), एसआईआर की समय सीमा बढ़ने (टाइम्स ऑफ इंडिया) और संसद का सत्र हंगामी होने की खबर (द टेलीग्राफ) है। यही नहीं, इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार,विपक्ष एसआईआर पर चर्चा के लिए दबाव बना रहा है – भी खबर है। नवोदय टाइम्स ने तो लिखा है कि पूरा शीतकालीन सत्र एसआईआर पर गरमाएगा। द हिन्दू ने एसआईआर की तारीख बढ़ाने की खबर के साथ बताया है कि ऐसा बीएलओ की परेशानी की खबरों के बीच हुआ है। देशबन्धु की लीड का शीर्षक विपक्ष की तैयारी है। मुख्य शीर्षक है, संसद सत्र, विपक्ष तैयार। उपशीर्षक है, एसआईआर, दिल्ली विस्फोट व प्रदूषण के मुद्दे पर शीतकालीन सत्र में हंगामे के आसार। जाहिर है, आज की खबरें क्या हैं। लेकिन हिन्दुस्तान टाइम्स और दि एशियन एज सरकार के प्रचार की दुनिया से निकल नहीं पाए हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, संसद आज शुरू हो रहा है तो सिन गुड्स पर नए सेस विधेयक की संभावना। सरकार के प्रचार में दि एशियन एज सबसे आगे है। इसका शीर्षक है, “प्रधानमंत्री ने पुलिसिंग में सुधार, एआई के उपयोग और ‘भविष्य के लिए तैयार’ (सुरक्षा) बल पर जोर दिया”। कुल मिलाकर, आज जब संसद सत्र शुरू होने, हंगामी होने के आसार, एसआईआर पर चर्चा के लिए दबाव, एसआईआर की मियाद अचानक बढ़ाने जैसी खबरें हैं तो यह प्रचार भी किया गया है कि सरकार सिन गुड्स पर नए सेस का विधेयक लेकर आएगी। एशियन एज़ की खबर के तीन बुलेट प्वाइंट बता रहे हैं कि 18 से 20 घंटे रोज काम करने वाले, देश की निर्वाचित सरकार के प्रधान प्रचारक ने पुलिस से अपील की है कि वह विकसित भारत के लक्ष्यों से नए सिरे से तालमेल करे। मौका था प्रधानमंत्री द्वारा अधिकारियों को पुलिस पदक देने का। गृहमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी इसमें शामिल हुए।
आज जब टेलीग्राफ जैसे अखबार ने पहले पन्ने की लीड संसद का सत्र हंगामी होने की खबर को बनाया है तो पहले पन्ने पर ही एसआईआर का कार्यकाल बढ़ने, ‘तनाव’ के कारण दो और बीएलओ के निधन की खबर के साथ यह भी बताया है कि एसआईआर के कारण बंगाल के सत्तर पार एक कीर्तन गायक, सुभाष चंद्र राय को अपने ‘नए पुत्र’ का पता चला और उन्होंने उसे न सिर्फ अपना बेटा मानने से इनकार किया, इसकी सार्वजनिक घोषणा भी की और यह आरोप लगाया, बहुत संभावना है कि यह किसी राजनीतिक दल या अन्य द्वारा बनाया गया फर्जी वोटर है और उनका नाम पिता के रूप में उपयोग किया गया है। दिलचस्प यह है कि इनका बेटा भाजपा का बीएलए है और बीएलओ आशा मंडल ने कहा है कि मैंने उन्हें यह फॉर्म दिया क्योंकि मतदाता सूची में नाम है पर इस परिवार ने तिल का ताड़ बना दिया है। जो भी हो इससे पता चलता है कि मतदाता सूची किस दशा में थी और बिहार में एसआईआर के दौरान तथा बाद में जो कुछ पता चला उससे हम समझ सकते हैं कि एसआईआर से क्या फायदा हुआ है। फिर भी देश भर में एसआईआर चल रहा है, बीएलओ मर रहे हैं और भारी मांग व विरोध पर इसका समय एक सप्ताह बढ़ाया गया है। जाहिर है, इसका संबंध संसद के कार्यकाल से भी हो सकता है और यह प्रयोग न भी हो तो संयोग है ही। फिर भी अखबारों के लिए यह पहले पन्ने की खबर नहीं है। दि एशियन एज में एसआईआर की मियाद बढ़ाने की खबर सिंगल कॉलम में है।
नवोदय टाइम्स में आधा पन्ना विज्ञापन है फिर भी एसआईआर का समय बढ़ाने की खबर तीन कॉलम में पहले पन्ने पर है। हिन्दुस्तान टाइम्स में एसआईआर का कार्यकाल बढ़ाने की खबर सेकेंड लीड है। एशियन एज की लीड यहां दो कॉलम की खबर है। इसका शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने कहा – पुलिस के बारे में जनता की समझ बदलनी चाहिए। द हिन्दू में यह खबर टॉप पर लगभग इसी शीर्षक, प्रधानमंत्री ने कहा पुलिस के बारे में जनता की राय बदलने की जरूरत है – के साथ है। कहने की जरूरत नहीं है कि यह काम जादू की छड़ी से नहीं होने वाला है लेकिन अभी तक इस दिशा में क्या कुछ किया गया है, पता नहीं है। अब जब चौकीदार का चोर होना मुद्दा नहीं है, वोट चोरी को मुद्दा बनने से रोकने के लिए 272 विशिष्ट नागरिकों की सेवा ली जा चुकी है तब पुलिस के बारे में जनता की समझ बदलने की जरूरत समझी जा रही है और यह बुलडोजर राज के विस्तार के प्रयासों के बीच हो रहा है या देखा जा रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की लीड बताती है कि संसद का सत्र चलाने के लिए सरकार ने विपक्ष का सहयोग मांगा है, 13 विधेयकों की सूची है और सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने लाल किले के विस्फोट का मामला भी उठाया। अमर उजाला ने एसआईआर की समय सीमा बढ़ाने की खबर टॉप पर सात कॉलम में छापी है। आज अगर एसआईआर के कारण टेलीग्राफ में दूसरा बेटा मिलने और उसे तिल का ताड़ बनाने की दिलचस्प खबर है तो द हिन्दू में एक बहुत ही मार्मिक खबर है। दुख की बात है कि दिल्ली की खबर होने के बावजूद दिल्ली के अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है। समाज की दशा बताने वाली यह खबर बताती है कि खतरे में पड़े हिन्दू समाज को सुरक्षा देने के नाम पर सत्ता में आई सरकार के शासन में हिन्दू इतना सुरक्षित हो गया है कि खाना चुराने की कोशिश करने वाले बच्चे को एक सरकारी सुरक्षाकर्मी ने गोली मार दी और वह मर गया। हिन्दू विरोधी और भ्रष्ट आरोपित पहले की सरकार में समाज ऐसा नहीं था। हो सकता है तब बच्चे भूखे नहीं होते हों या कोई और कारण हो लेकिन बच्चे के किसी अपराध के लिए गोली मार देने की ‘सुरक्षा’ वाकई जरूरत से ज्यादा हो गई है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


