नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रविवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 461 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से शरीर में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, इम्यून सिस्टम की कमजोरी और कोशिकाओं में आनुवंशिक बदलाव तक हो सकते हैं, जिसका सीधा असर फेफड़ों, दिल और दिमाग पर पड़ता है।
हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर), नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और ओजोन जैसे प्रदूषक सबसे ज्यादा नुकसानदेह माने जा रहे हैं। ये प्रदूषक सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर आंखों, नाक और गले में जलन, खांसी, अस्थमा, सांस फूलना, फेफड़ों की क्षमता में कमी और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। कुछ मामलों में किडनी, लीवर, त्वचा और रक्त पर भी इनका गंभीर प्रभाव पड़ता है।
चिकित्सकों का कहना है कि प्रदूषण का असर केवल शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। अध्ययनों के अनुसार, लंबे समय तक जहरीली हवा के संपर्क में रहने से अवसाद, स्किजोफ्रेनिया और अन्य मानसिक विकारों का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने बच्चों को सबसे अधिक जोखिम वाला समूह बताया है। बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते और वे वयस्कों की तुलना में दोगुनी रफ्तार से सांस लेते हैं, जिससे उनके शरीर में प्रदूषक अधिक मात्रा में पहुंचते हैं। आठ वर्ष से कम उम्र के बच्चों में फेफड़ों को होने वाला नुकसान लंबे समय तक असर डाल सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि प्रदूषण के इस स्तर पर पार्कों में व्यायाम, खुले में योग और सड़कों पर जॉगिंग से बचें, क्योंकि इससे लाभ की बजाय नुकसान हो सकता है। खासकर सड़कों के आसपास धूल और जहरीली गैसों का स्तर सबसे अधिक होता है।
प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को घर में रहने, मास्क का इस्तेमाल करने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। राजधानी की यह स्थिति एक बार फिर हवा की गुणवत्ता को लेकर ठोस और दीर्घकालिक समाधान की जरूरत को रेखांकित करती है।
जहरीली हवा का असर
महेंद्र माही नाम के यूजर का ट्वीट-

नोएडा में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए नर्सरी से लेकर कक्षा 5 वी तक के सभी स्कूल अगले आदेश तक बंद रहेंगे।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हवा हुई जहरीली AQI 500 के पार, बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लिया गया फैसला, जबकि कक्षा 6 से लेकर 12 तक के सभी स्कूलों का संचालन हाइब्रिड मोड पर होगा।
यह आदेश सभी स्कूलों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया गया, नियमों का उल्लंघन करने वालो स्कूलों पर होगी सख़्त कार्रवाई।


