आगरा का जनसंदेश अखबार का संपादक बताने वाला पीयूष शर्मा सट्टा माफिया निकला। एसीपी ताज सुरक्षा मयंक तिवारी को सूचना मिली थी कि होटल हार्वर्ड प्लाजा में आईपीएल का सट्टा चल रहा है। जब पुलिस ने वहां जाकर छापामार कार्रवाई की तो कई लोग गिरफ्तार किए गए।
पूछताछ में पता चला कि खुद को पत्रकार बताने वाला पीयूष शर्मा इस पूरे रैकेट को संचालित कर रहा था। वहीं, उसके साथ इस काम में अन्नी पंडित और राधे मल्होत्रा भी शामिल थे। पुलिस ने पीयूष शर्मा समेत चार और लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इस पूरे नेटवर्क की जड़े भी खंगाली जा रही हैं। फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
आगरा की थाना ताजगंज पुलिस ने सट्टा माफिया सिंडीकेट पकड़ा है। लेकिन इस सिंडिकेट के पीछे की कहानी शायद आप लोगों को नहीं पता है…
पुलिस अधिकारी मयंक तिवारी एक अखबार के कार्यक्रम में पहुंचे जहां पर पत्रकार पीयूष शर्मा ने उनका सम्मान किया। जैसे ही वे मंच से नीचे उतरे तो उन्हें किसी ने बताया कि यह पीयूष शर्मा पत्रकारिता की आड़ में सट्टा माफिया सिंडिकेट ऑपरेट करता है। तुरंत PPS अधिकारी मयंक तिवारी ने पीयूष शर्मा और उस अखबार से दूरी बना ली। इत्तेफाक यह हुआ की मयंक तिवारी के पास पीयूष शर्मा की तमाम शिकायतें पहुंचती रही लेकिन वह अपने पारिवारिक व्यस्तता के चलते एक लंबी छुट्टी पर चले गए।
जैसे ही वह छुट्टी से वापस आए तो उन्हें शमशाबाद का सुरक्षा का चार्ज मिला। इस दौरान उनकी टीम को सूचना मिली कि एक होटल में सट्टा माफिया आईपीएल मैच पर सट्टा लगा रहे हैं। यहाँ छापामार कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में पकड़े जाने के बाद सट्टा माफिया पीपीएस अधिकारी मयंक तिवारी पर दबाव बनाने लगे और उन्होंने बताया कि इस सिंडिकेट को पीयूष शर्मा, राधे मल्होत्रा और अन्नी पंडित ऑपरेट करते हैं।
पीपीएस अधिकारी मयंक तिवारी के दिमाग में तुरंत पुरानी तस्वीरें तैरने लगी। मयंक तिवारी द्वारा मौके पर मौजूद सभी लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं तथ्यों और साक्ष्य के आधार पर पीयूष शर्मा को भी घर से अरेस्ट कर लिया। पीयूष शर्मा के अरेस्ट होते ही उसके आका पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाते रहे लेकिन पीपीएस अधिकारी मयंक तिवारी ने किसी की एक न सुनी। कई आईपीएस अधिकारी के फोन घनघनाये लेकिन अपनी बात पर डटे रहने वाले अधिकारी मयंक तिवारी ने सबको संतुष्ट किया और बताया कि पीयूष शर्मा निर्दोष नहीं है।
वह सिंडिकेट में लंबे समय से जुड़ा हुआ है। अगर इसको छोड़ दिया गया तो यह अन्याय होगा। आखिर में पियूष शर्मा को छुड़ाने के लिए तमाम दबाव काम नहीं आए और पीयूष शर्मा और उसके सिंडिकेट से जुड़े लोगों पर पुलिस की कार्रवाई का चाबुक चला।


आपके सामने दो तस्वीरें हैं। एक तस्वीर वह है जिसमें पीयूष शर्मा पुलिस अधिकारी मयंक तिवारी का सम्मान कर रहा है।
दूसरी तस्वीर वह है जिसमें पुलिस द्वारा पकडे जाने के बाद कच्छे में पीयूष शर्मा अपने साथियों के साथ नजर आ रहा है।
पत्रकार पीयूष का पक्ष पढ़ें-
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