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टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 को लेकर केरल हाईकोर्ट में केंद्र सरकार ने ये दो विकल्प रखे!

नई दिल्ली। टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 के तहत लैंडिंग पेज व्यूअरशिप को टीवी रेटिंग से बाहर रखने के प्रावधान पर चल रही कानूनी लड़ाई में केंद्र सरकार ने केरल हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता दो अलग-अलग कानूनी मामलों को एक-दूसरे से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि चैनल प्लेसमेंट (Landing Page) और टीवी दर्शकों की रेटिंग मापने (Audience Measurement) का मुद्दा अलग-अलग है।

सोमवार को हुई करीब 90 मिनट की सुनवाई के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी. श्रीकुमार और केंद्रीय सरकारी वकील अमल पार्थसारथी ने पक्ष रखा। हालांकि सुनवाई पूरी नहीं हो सकी और अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को दोपहर 3 बजे तय की है।

अदालत ने तब तक टीवी रेटिंग पॉलिसी 2026 की क्लॉज 5.4.1 के प्रावधान पर पहले से लागू अंतरिम रोक (Stay) को जारी रखने का आदेश दिया है।

केंद्र का तर्क: सुप्रीम कोर्ट का मामला अलग

ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) और DEN Networks ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट में लंबित उस मामले का हवाला दिया है, जिसमें TRAI के लैंडिंग पेज नियमन के अधिकार क्षेत्र पर सुनवाई चल रही है।

केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का मामला इस सवाल से जुड़ा है कि TRAI लैंडिंग पेज पर चैनलों की प्लेसमेंट को नियंत्रित कर सकता है या नहीं, जबकि केरल हाईकोर्ट में विवाद इस बात को लेकर है कि लैंडिंग पेज के जरिए स्वतः (ऑटोमैटिक) मिलने वाली व्यूअरशिप को टीवी रेटिंग में शामिल किया जाए या नहीं।

सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने लैंडिंग पेज को रेटिंग से बाहर रखने पर कोई रोक नहीं लगाई है।

हाईकोर्ट के सामने केंद्र ने रखे दो विकल्प

केंद्र ने अदालत से कहा कि यदि याचिकाकर्ताओं का मानना है कि दोनों मामले एक जैसे हैं, तो उन्हें राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। वहीं यदि दोनों विवाद अलग-अलग हैं, तो सुप्रीम कोर्ट का आदेश सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की टीवी रेटिंग नीति पर स्वतः लागू नहीं हो सकता।

गौरतलब है कि 22 मई को केरल हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक देते समय सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का हवाला दिया था। अब केंद्र सरकार चाहती है कि अदालत इस आधार पर पुनर्विचार करे।

नीति बनाने का अधिकार सरकार के पास

केंद्र ने यह भी दलील दी कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए हैं कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पास टीवी ऑडियंस मेजरमेंट (Audience Measurement) से जुड़ी नीति बनाने का अधिकार नहीं है।

सरकार का कहना है कि क्लॉज 5.4.1 लैंडिंग पेज पर रोक नहीं लगाता। ब्रॉडकास्टर और डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म पहले की तरह लैंडिंग पेज का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन उससे मिलने वाली ऑटोमैटिक व्यूअरशिप को टीवी रेटिंग में नहीं जोड़ा जाएगा।

सरकार के अनुसार, टीवी रेटिंग में केवल वही व्यूअरशिप शामिल होनी चाहिए, जिसे दर्शक स्वयं चैनल चुनकर देखें। यदि सेट-टॉप बॉक्स चालू करते ही दिखाई देने वाले चैनल को भी दर्शकों की पसंद मान लिया जाए, तो इससे विज्ञापन उद्योग, ब्रॉडकास्टर और मीडिया एजेंसियों के लिए इस्तेमाल होने वाली रेटिंग प्रणाली प्रभावित हो सकती है।

BARC का नया सिस्टम फिलहाल रुका

सरकार ने अदालत को बताया कि अंतरिम रोक से पहले BARC India ने नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली थी। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार यदि सेट-टॉप बॉक्स ऑन करते ही कोई वॉटरमार्क वाला लैंडिंग पेज चैनल अपने-आप खुलता है, तो उस व्यूअरशिप को रेटिंग में शामिल नहीं किया जाता। हालांकि यदि दर्शक बाद में उसी चैनल को स्वयं चुनता है, तो उस व्यूअरशिप को रेटिंग में गिना जाता।

BARC इस नई व्यवस्था को वीक-22 से लागू करना चाहता था और संशोधित प्रणाली के तहत पहली टीवी रेटिंग 11 जून को जारी की जानी थी। लेकिन 22 मई को हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद यह प्रक्रिया ठप हो गई।

इस बीच BARC ने नई नीति के तहत अपना पंजीकरण (Registration) भी करा लिया है और अनुपालन रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। हालांकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उसे नई व्यवस्था के तहत अनुमति मिलने तक टीवी रेटिंग प्रकाशित नहीं करने का निर्देश दिया है।

अब 21 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में केरल हाईकोर्ट यह तय करेगा कि क्लॉज 5.4.1 पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी या नहीं।

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