आज भाजपाई राजनीति में अदालती योगदान। सीजेआई को गाली से घिरी सरकार में प्रधान के खिलाफ कार्रवाई की मांग से बेअसर व्यवस्था। बंगाल के नए डबल इंजन ने ‘गुंडा’ कानून लागू किया है। इथेनॉल मंत्री ने अपने निजी मामले में अदालती कार्रवाई की धमकी दी है और भाजपा के कानूनी नोटिस को जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने प्रेमपत्र कहा है।
संजय कुमार सिंह
अमर उजाला ने चढ़ावा चोरी मामले में जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगे जाने की खबर को सेकेंड लीड बनाया है। लीड का शीर्षक है, ज्ञानवापी, मथुरा व संभल विवाद मध्यस्थता के जरिए सुलझाने से दोनों पक्षों का इनकार। उपशीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने की थी पहल : ज्ञानवापी मामले में वाराणसी जिला प्रशासन ने आज दोनों पक्षों को बुलाया। मुझे लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार जब किसी भी तरह सत्ता में बने रहने के उपाय करती रही है तो यह देखा जाना चाहिए कि 1991 के ‘पूजा स्थल अधिनियम के आलोक में स्थिति क्या होनी चाहिए। इस कानून की धारा 3 और 4 स्पष्ट रूप से कहती हैं कि 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस रूप में था, उसका धार्मिक स्वरूप बदला नहीं जा सकता। इसके बावजूद ज्ञानवापी, मथुरा व संभल विवाद बने रहने या चलते रहने का कोई कारण नहीं है। मुझे लगता है कि इस कानून के सम्मान में और देशहित में किसी भी धार्मिक स्थल से संबंधित ऐसे मामलों पर अदालतों को विचार ही नहीं करना चाहिए। इन मामलों में मुस्लिम पक्ष की पूरी दलील इसी अधिनियम पर टिकी है। उनका मानना है कि चूंकि ये स्थल 1947 में मस्जिदें थीं, इसलिए इन पर किसी भी तरह का मुकदमा या जांच नहीं चल सकती। मध्यस्थता स्वीकार करने का अर्थ होगा कि वे बातचीत के जरिए इस अधिनियम से मिलने वाले पूर्ण कानूनी संरक्षण को कमजोर कर रहे हैं। अदालत में मामला चल रहा है तो यह अदालत के विवेक का मुद्दा होगा मुस्लिम पक्ष की सहमति नहीं मानी जा सकती है। आज इस खबर को भी ऐसे ही लिखा जाना चाहिए था। पर उत्तर प्रदेश के अमर उजाला ने इसे लीड बनाया है नवोदय टाइम्स में भी ठीक-ठाक खबर है लेकिन बाकी अखबारों ने इस खबर को महत्व नहीं दिया है।
तथ्य यह भी है कि इस व्यवस्था में एनसीईआरटी ने स्कूली पाठ्य पुस्तकों के लिए विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया है लेकिन उसके बारे में बता नहीं रहा है। द टेलीग्राफ में नई दिल्ली डेटलाइन से बसंत कुमार मोहंती की खबर के अनुसार, स्कूली पाठ्यपुस्तक तैयार करने के लिए एनसीईआरटी ने 22 सलाहकारों की एक टीम तैयार की है। इसका नेतृत्व आरएसएस से जुड़े संगठन के व्यक्ति कर रहे हैं। आप जानते हैं कि एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” अध्याय शामिल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद की स्थिति में एनसीईआरटी ने बिना शर्त माफी मांगते हुए पूरी किताब वापस ले ली और आपत्तिजनक सामग्री को पाठ्यक्रम से हटा दिया। यह भी कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस शेखर कुमार यादव ने दिसंबर 2024 में विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में भाषण दिया था। इसके बाद विवाद खड़ा हो गया था| दिसंबर 2024 में राज्यसभा के 55 सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के लिए राज्यसभा सचिवालय को नोटिस सौंपा था। पर कार्रवाई नहीं हुई और वे रिटायर हो गए। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के एक मंत्री, विजय शाह ने सेना की महिला अधिकारी, सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। स्वतः संज्ञान लेने वाले जज के तबादले की खबर थी और मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वह भी तब जब सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री द्वारा मांगी गई माफी को नामंजूर कर दिया है। मई 2026 में सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति में देरी करने पर मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। इसी व्यवस्था में विपक्षी मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई कितनी तेजी से हुई और उनका अपराध क्या निकला आप जानते हैं।
चंदा चोरी जैसे आरोप में घिरी और फंसी सरकार के ‘दूसरे इंजन’ ने बंगाल में गुंडा कानून लागू कर दिया है। द टेलीग्राफ की आज की लीड यही है। अखबार ने बताया है कि सरकार ने जन सुरक्षा के लिए नए नियम लागू किए हैं। खबर के अनुसार, पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा और असामाजिक गतिविधि अधिनियम को सोमवार से सख्ती से लागू कर दिया है। दि एशियन एज की एक खबर के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू और कश्मीर के मुख्य मंत्री के खिलाफ 100 करोड़ रुपए का अवमानना मामला दायर करने के लिए कानूनी सूचना दी है। मुख्य मंत्री ने इसे भाजपा का प्रेम पत्र कहा है। उनका कहना है कि जिन आरोपों के लिए यह नोटिस आई है वे एक राजनीतिक मंच से लगाए गए थे और उनका राजनीतिक जवाब ही दिया जाना चाहिए। आज एक बड़ी अदालती खबर टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिन्दू में है। इन खबरों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नागरिकता से जुड़े फ़ैसले ‘निष्पक्ष और तर्कसंगत’ होने चाहिए। शीर्ष अदालत ने ‘विदेशियों’ से जुड़े गुवाहाटी हाई कोर्ट के 27 फ़ैसलों को रद्द कर दिया और ट्रिब्यूनल से मामले पर नए सिरे से विचार करने के लिए कहा है। कोर्ट का कहना है कि अगर नागरिकता तय करने की प्रक्रिया ‘यांत्रिक’ (बिना सोचे-समझे) है, तो ऐसे फ़ैसले टिक नहीं सकते। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में यह भी कहा गया है कि राज्य की कोई मनमानी कार्रवाई सिर्फ़ इसलिए क़ानून का संरक्षण नहीं पा सकती क्योंकि उसे क़ानूनी रूप दिया गया है। ऐसी कोई भी कार्यवाही, जिसके नतीजे में किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित किया जा सकता है, तब तक मान्य नहीं हो सकती जब तक कि अपनाई गई प्रक्रिया यांत्रिक, एकतरफा या बिना सोच-विचार के न की गई हो।
आप समझ सकते हैं कि यह फैसला सरकार की इच्छा या कार्यशैली के अनुकूल नहीं है और इससे पहले से मुश्किलों में घिरी सरकार की मुसीबतें और बढ़ेंगी। हालांकि, देशबन्धु की खबर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। आप जानते हैं कि चंदाचोरी का यह मामला संघ-भाजपा की खींचतान और विधानसभा चुनाव करीब होने के कारण महत्वपूर्ण है और एसआईटी के जरिए राज्य सरकार भी प्रभावशाली दिख रही है। अभी तक की परंपरा और मांग के अनुसार यह जांच सीबीआई के पास चली जाए तो केंद्र सरकार के लिए मामला आसान हो सकता है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, राम मंदिर चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई की है और एसआईटी से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, अपील दायर कर सीबीआई जांच और सीएजी ऑडिट की मांग की गई है। हाल में सीएजी रिपोर्ट से महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना’ में भारी गड़बड़ियों का पर्दाफाश हुआ है। योजना का लाभ उठाने वाला पात्र न होने के बावजूद हजारों पुरुषों और अपात्र लोगों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया है। बिना तत्काल जरूरत के खजाने से ₹3,541 करोड़ से अधिक की राशि निकालकर अलग वर्चुअल पर्सनल डिपॉजिट अकाउंट्स में जमा कर दी गई, जो वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। यह सरकारी पैसे का हाल है।
दिलचस्प है कि मंदिर के चंदे का ऑडिट सीएजी से करवाने की अपील है जबकि सरकार पीएम केयर्स को आरटीआई से बाहर बताती रही है। दूसरी ओर, दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है – राम मंदिर चलाने के लिए ट्रस्ट सीईओ की तलाश में। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक है, ट्रस्ट के सीईओ की तलाश : राम भक्त, 20 साल के नेतृत्व का अनुभव हो। वैसे भी चढ़ावा चोरी की शिकायतों के बाद जो व्यवस्था बन रही है वह सीईओ की होगी। मेरा मानना है कि नया सीईओ, पुराने चंपत लाल की तरह होगा। ठीकरा जिसके सिर फूटे या जिसे बलि का बकरा बनाया जा सके। बाकी तो काम-काज ठीक ही चल रहा था। समर्थकों को शिकायत नहीं है और उनका तो सवाल भी है कि दान दिया नहीं वह दान पर क्यों बोले? देश की इसी राजनीति ने एप्सीटन फाइल्स, कंप्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री, पेपर लीक, चढ़ावा चोरी, ईथेनॉल विवाद, कॉक्रोच जनता पार्टी, सोनम वांगचुक और दूसरों के अनशन जैसे गंभीर मामले खड़े किए हैं। सरकार इनसे निपट नहीं पा रही है, या जरूरत नहीं समझ रही है। आम लोग प्रभावित हो रहे हैं। मर भी रहे हैं। लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं हैं। ना धर्मेन्द्र प्रधान को हटाया जा रहा है ना सरकार ई20 को जबरन थोपने से रुक रही है। ऐसी सरकार के सत्ता में बने रहने के लिए बहुमत का ध्रुवीकरण जरूरी है और सरकार या उसके समर्थक यह सब कर रहे हों तो कुछ पता नहीं चलेगा या चले भी तो कोई क्या कर सकता है। खासकर तब जब खबरें भी ऐसी ही हों।
अन्य अखबारों की खबरों और लीड से पहले आज दैनिक भास्कर की कई खबरों की चर्चा की जा सकती है। मैं सिर्फ दो की करूंगा। एक खबर है, केरल में हर साल सात हजार डॉक्टर बन रहे हैं। ये जरूरत से बहुत ज्यादा हैं। विदेशों में नियम सख्त है इसलिए बेरोजगार (डॉक्टर) बढ़ गए हैं। हालत ऐसी हो गई है कि डॉक्टर की सैलरी (मात्र) 20 हजार रुपए है और सफाई कर्मी को भी इतने ही पैसे मिलते हैं। उत्तर भारत या दिल्ली में भी डॉक्टर बनने की परीक्षा के पर्चे लीक हो जाते हैं, परीक्षा और शिक्षा इतनी मुश्किल है कि बच्चे आत्महत्या कर ले रहे हैं। सरकार किसी भी तरह के सुधार या किसी दोषी को सजा देने के लिए तैयार नहीं है। केरल के डॉक्टर विदेश जा सकें इसकी व्यवस्था करने जैसी जरूरत तो बहुत बाद की बात है। सब चल रहा है यहां सफाई कर्मचारियों का वेतन चाहे जो हो, लोग सीवर में मरते रहते हैं। एक खबर महंगाई दर की भी है। इसके अनुसार 17 महीने में यह सबसे ज्यादा है और चार प्रतिशत पार कर चुका है। आज की एक और बड़ी खबर है, आईबी अधिकारी हत्या में हिर हुसैन समेत पांच दोषी करार। यह खबर नवोदय टाइम्स में लीड है। टाइम्स ऑफ इंडिया में इस खबर का शीर्षक है, 2020 दंगों में आईबी अधिरी की हत्या में आप के पूर्व पार्षद को सजा। यह खबर कई अखबारों में है लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक भी दिलचस्प है – 27 विदेशियों पर गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया। इंडियन एक्सप्रेस और हिन्दुस्तान टाइम्स ने होर्मुज पर अमेरिकी कब्जे की खबर को लीड बनाया है। लेकिन नवोदय टाइम्स की खबर का शीर्षक है, होर्मुज को लेकर बढ़ा टकराव। अमेरिका और ईरान – दोनों ने किया नियंत्रण का दावा।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



