युद्ध का असर चाबहार पोर्ट पर भी! दैनिक भास्कर की खबर। राहुल गांधी की खबर अंदर के इसी पन्ने पर साढ़े 13 लाइन में छपी है।
संजय कुमार सिंह
दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को अचानक बदल दिए जाने की खबर कल दिन में आई थी। आज अखबारों में छपा नहीं है लेकिन सोनम वांगचुक को कल रात धरना स्थल से उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। राहुल गांधी ने कल देहरादून में छात्रों की गूंज कार्यक्रम आयोजित किया पर आज उसकी खबर प्रमुखता से नहीं है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी के मंच से जाने-माने शिक्षक ‘अभिनव सर’ (अभिनय शर्मा) ने पेपर लीक को एक उद्योग/व्यवसाय करार दिया। इस कार्यक्रम के दौरान मंच से उन्होंने स्पष्ट कहा कि आज हिंदुस्तान में ‘पेपर लीक उद्योग’ चल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि पेपर लीक केवल एक बैच को प्रभावित नहीं कर रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के करियर और जिंदगियों को नष्ट कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि देश के नेता प्रतिपक्ष और शिक्षकों को पेपर लीक जैसे मुद्दों पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने पड़ रहे हैं, तो समझा जा सकता है कि यह कितनी बड़ी समस्या बन चुकी है। आप जानते हैं कि दिल्ली में जंतरमंतर पर सोनम वांगचुक और कॉक्रोच जनता पार्टी का आंदोलन इसी मुद्दे पर था, शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा मांगने के लिए था। 20 दिन तक आंदोलन चलने के बाद भी सरकार ने बातचीत शुरू नहीं की और अंततः ‘कोर्ट के आदेश पर’ आंदोलन खत्म करने की दिशा में बड़ी कार्रवाई की। दिन में दिल्ली पुलिस के मुखिया को बदलना इससे संबंधित हो या नहीं – आपदा में अवसर, मौके पर चौका भी हो सकता है। खास बात है कि कल ही किया गया या करना पड़ा। पेपर लीक पर देशबन्धु में चार कॉलम की खबर का शीर्षक है, पेपर लीक नहीं रोक पा रही है सरकार। सरकार ने चढ़ावा चोरी रोकने के उपाय किए हों या इस दिशा में कोई काम कर रही हो – ऐसी खबर भी नहीं है।
अमर उजाला में पांच कॉलम में छपी खबर के अनुसार, एसआईटी जांच में अनिल मिश्र और सुभाष की मुख्य भूमिका मिली है। आप जानते हैं कि करोड़ों की चढ़ावा चोरी को अब कुछ करोड़ का कहा जा रहा है और दो बड़े लोगों को इस्तीफे के बाद जांच और कार्रवाई से अलग कर दिया है। अब सीईओ व्यवस्था लागू करने की तैयारी लग रही है और संभावना है कि सब पहले की तरह चलता रहेगा। दो बड़े लोगों का इस्तीफा लेकर उन्हें बख्श दिया गया है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार 8 गिरफ्तारियों के बाद 30 और लोगों पर नजर रखी जा रही है। इसरो से बड़े पैमाने पर इस्तीफे की खबर आपने कल पढ़ी। नवोदय टाइम्स में आज खबर है कि सरकार ने इस्तीफे के नियम और सख्त कर दिए हैं। लेकिन इससे नए आने वाले लोगों की संख्या कम होने लगी तो क्या होगा? यहां भी सरकार ने इस्तीफे के कारणों की बजाय उसे रोकने की चिन्ता की है। आज अमेरिकी हमले की एक खबर भी उल्लेखनीय है। देशबन्धु की एक खबर के अनुसार, अमेरिकी हमले से चाबहार पोर्ट को बड़ा नुकसान हुआ है। कल आपने पढ़ा कि इसमें भारत का निवेश है और अभी भी यह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा साझा की गई एक तस्वीर छापी है। यह हमले के बाद गिरते टावर की तस्वीर है। अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसने ईरान में चाबहार शहीद कलंतरी पोर्ट के निगरानी टावर को नष्ट कर दिया है। इसके साथ की खबर का शीर्षक है, संरचना पर हमले से अमेरिका ईरान टकराव बढ़ा। द हिन्दू में इस खबर का शीर्षक है, अमरिका ने ईरान में पुलों पर बम गिराए क्योंकि हमले बढ़े। भारत ने टकराव में शामिल देशों से कहा है कि वे नागरिक संरचना पर हमला नहीं करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शहीद बेहेस्ती टर्मिनल में उसका हित है और यह क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है।
पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के खिलाफ आंदोलन को इस तरह खत्म करने के साथ तथ्य यह भी है इस साल के नीट का पेपर लीक होने के बाद पुनर्परीक्षा हुई। उसके नतीजे कल ही आए और आज ही छपे हैं। इथेनॉल मिलाने और उससे गाड़ियों में खराबी के मामले में सरकार कुछ नहीं कर रही है। केंद्रीय मंत्री भले कह रहे हैं कि जिसे दिक्कत हो महंगा शुद्ध पेट्रोल भरवाए। तथ्य यह है कि शुद्ध पेट्रोल सामान्य तौर पर उपलब्ध नहीं है और पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के बावजूद कीमत नहीं कम की गई लेकिन शुद्ध पेट्रोल की कीमत बढ़ गई है। न जाने क्यों और वह भी उपलब्ध नहीं है। सोनम वांगचुक और कॉक्रोच जनता पार्टी के खिलाफ कार्रवाई देर रात हुई इसलिए अखबारों में खबर नहीं है लेकिन राहुल गांधी के कार्यक्रम की भी खबर दिल्ली में नहीं है। दैनिक भास्कर का पहला पन्ना आज पॉजिटिव न्यूज का हो या एक खबर को पॉजिटिव न्यूज कहा गया हो – जो खबरें हैं वे पहले पन्ने के लायक हैं तो राहुल गांधी की रैली की खबर क्यों नहीं है – समझना मुश्किल है। इन खबरों में लीड का शीर्षक है – 10 और 20 रुपए के प्लास्टिक के नोट अगले साल आ सकते हैं। तथ्य है कि बाजार में 10 और 20 रुपए के नोट और सिक्के दोनों हैं। छोटे नोट बैंकों में नहीं मिलते हैं और सबसे बड़ा नोट 500 का है तो छोटे नोटों की जरूरत ज्यादा होगी। सरकार को कुछ न कुछ उपाय करने ही पड़ेंगे। ऐसे में प्लास्टिक के नोट एक पुराना, जाना पहचाना विकल्प है और अगर यह ‘अगले साल आ सकते हैं’ तो लीड कैसे है – समझना मुश्किल है। अगर यह पॉजिटिव न्यूज है तो सरकार का प्रचार क्या होगा खासकर तब जब सरकार का दावा है कि डिजिटल लेन-देन के कारण नोटों की आवश्यकता ही कम हो गई है और दुनिया ने देखा ने प्रधानमंत्री ने नकद देकर झालमुड़ी खरीदा था। दूसरी खबर का फ्लैग शीर्षक है, देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी, जींद से सोनीपत (89 किलोमीटर) चलेगी। मुख्य शीर्षक है, “10 कोच की हाइड्रोजन ट्रेन चलाकर गाड़ा झंडा, ये पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनी : मोदी”।
निश्चित रूप से यह सरकारी सफलता का प्रचार है और तब किया जा रहा है जब 2015 की बुलेट ट्रेन परियोजना पर जापान के पूर्व मंत्री ने सख्त टिप्पणी की है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) परियोजना के तहत 508 किलोमीटर लंबे बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का समझौता भारत और जापान के बीच 2015 में हुआ था। मूल रूप से इसे 2023 में पूरा किया जाना था। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, हाल ही में, जापान के पूर्व न्याय मंत्री और सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हिदेकी माकिहारा ने प्रोजेक्ट में देरी के लिए सीधे तौर पर भारत के रवैये को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारतीय पक्ष द्वारा बार-बार फैसले बदलने से काम धीमा हुआ। भारतीय विदेश मंत्रालय ने जापानी नेता के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने स्पष्ट किया कि यह उनकी ‘निजी राय’ है जो वास्तविक तथ्यों से बहुत दूर है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत और जापान के बीच बातचीत बहुत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है। आप जानते हैं कि पंजाब विधानसभा चुनाव करीब हैं। आज दैनिक भास्कर के पहले पन्ने की तीसरी बड़ी खबर का शीर्षक है, केंद्र की स्कीमों पर अपना स्टीकर चिपका रही आप, कांग्रेस में कुर्सी की जंग, शिअद अपनी उलझन में : मोदी”। कहने की जरूरत नहीं है कि तीनों खबरें सरकार का प्रचार हैं। यह तब है जब केंद्र सरकार के तीन बड़े मंत्रियों – 1) पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर एप्सटीन फाइल से संबंधित मामले 2) शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान पर लीक और परीक्षा आयोजित करने में गड़बड़ी तथा भ्रष्टाचार संबंधित और 3) केंद्रीय परिवहन मंत्री की बनवाई सड़कों का धंस जाना, ईथेनॉल मामले में उनका नाक घुसेड़ना और बेटे के व्यापार व्यवसाय पर बात करने वाले के खिलाफ मुकदमे की धमकी जैसे मामले में कई खबरें हैं जो कई तरह से लिखी और प्रकाशित की जा सकती है। आज सोशल मीडिया पर चर्चा है कि राहुल गांधी की रैली भास्कर ने अंतिम से पहले वाले पन्ने पर आधे कॉलम की फोटो समेत साढ़े 13 लाइनों में निपटा दी है।
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की खबर आज नवोदय टाइम्स के साथ अमर उजाला में भी लीड है। ऐसे में दिल्ली पुलिस के प्रमुख का अचानक तबादला आज हिन्दुस्तान टाइम्स में लीड है। देशबन्धु, नवोदय टाइम्स के साथ इंडियन एक्सप्रेस में भी प्रमुखता से है। लेकिन सोनम वांगचुक के आमरण अनशन की खबर द टेलीग्राफ, दि एशियन एज, द हिन्दू, दि इंडियन एक्सप्रेस के साथ देशबन्धु में भी प्रमुखता से है। ये खबरें कल दिन भर की हैं और इन्हें लिखने वालों को नहीं पता होगा कि उन्हें रात में उठा लिया जाएगा। यह अलग बात है कि दिन में सोनम वांगचुक ने उम्मीद जताई थी कि वे 20 तक जीवित रहेंगे और सरकार ने उन्हें पहले ही हटा दिया या अस्पताल में भर्ती करा दिया। आज की खबरों में सुप्रीम कोर्ट की एक खबर भी उल्लेखनीय है। देशबन्धु में यह लीड है और सुप्रीम कोर्ट ने कहा है इसलिए लीड हो सकती है लेकिन सच्चाई यह है कि सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों के कारण द टेलीग्राफ के संपादक का नाम मतदाता सूची से रह गया था। इस कारण उनका पासपोर्ट नहीं बन पाया और उनके लिखने पर भले बन गया हो सभी अधिकारियों को गलत संदेश चला गया और सरकार तो गलत कर ही रही है। दिल्ली चुनाव के समय मतदाता सूची में तमाम अवैध नाम शामिल किए जाने की शिकायत सबको मालूम है। फिर भी कुछ वोटर के नाम जान बूझकर या किसी अन्य कारण से हटा दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के पिछले रवैये के कारण अधिकारी अब नाम लिखने के लिए भांति-भांति की शर्तें लगा रहे हैं औऱ मतदाता सूची में नाम लिखवाना टेढ़ी खीर हो गया है। जाहिर है कि बहुत सारे लोग यह सब नहीं कर पाएंगे और चुपचाप बिना नाम लिखाए रह जाएंगे। कायदे से, जो नाम पहले से हैं उन्हें अकारण छेड़ने का कोई मतलब ही नहीं था और उन्हीं को छेड़ा जाना चाहिए था जिनकी शिकायत थी या जिनके मामले में स्पष्ट गड़बड़ी दिख रही हो। चुनाव आयोग को नाम हटाने देने के अधिकार होने का दुरुपयोग हुआ है।
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में एसआईआर की अनियमितता हुई है और प्रवासी व गरीब को निशाना बनाया गया है। दि एशियन एज में यह सिंगल कॉलम की खबर है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर लीड है। शीर्षक है – चुनाव आयोग शंका वाले मतदाताओं के नाम हटा सकता है, नागरिकता के निर्णय नहीं कर सकता है। मुझे लगता है कि मामला ऐसा नहीं है। शीर्षक यह होना चाहिए था कि चुनाव आयोग विदेशी नागरिकता को लेकर निश्चित होने पर ही नाम हटा सकता है। पुष्टि के लिए गृह मंत्रालय को सिफारिश कर सकता है। लेकिन विदेशी नागरिकता की पुष्टि नहीं होने पर नाम शक के आधार पर हटा कर किसी को वोट देने से नहीं रोक सकता है। द हिन्दू की खबर और उसकी खास बातें भी अलग तरह से लिखी गई हैं। मुख्य शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर डेटा के गैर-चुनावी कामों में इस्तेमाल का विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है। कांग्रेस नेता की याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार उन लोगों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं दे रही है जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। मुख्य चिंता यह है कि बंगाल सरकार एसआईआर डेटा का इस्तेमाल कल्याणकारी सुविधाओं की पात्रता तय करने के लिए कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इसपर सवाल उठाए हैं। लेकिन जिसकी नागरिकता संदिग्ध है उसके बारे में फैसला कोई अधिकारी कैसे लेगा, किस आधार पर लेगा? वह अपने लिए जोखिम क्यों ले? लेकिन हालात ऐसे हैं कि गंभीर नागरिक परिणाम सामने आए हैं और संपादक स्तर की हस्ती के मामले में आए हैं तो आम आदमी की क्या बिसात? दूसरी ओर एसआईआर डेटा को पीडीएस और दूसरी सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। खबर यह भी है कि सिर्फ पश्चिम बंगाल के 34 लाख अपीलों में से अब तक सिर्फ़ 38,000 पर सुनवाई हुई है; मौजूदा रफ़्तार से अपील की प्रक्रिया पूरी होने में लगभग 21 साल लग सकते हैं। यही नहीं, दस्तावेज़ जमा करने, सुनवाई करने और लिस्ट से हटाए गए वोटरों के अपील करने के अधिकार के बारे में कोई सार्वजनिक गाइडलाइन नहीं है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



