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पहली बार किसी रिपोर्टर को ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ जैसे नारे पर एतराज हुआ, देखें वीडियो

Female reporter holding a pink microphone interviewing a man with arms folded at an outdoor event.

कॉक्रोच लोग जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। यह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर चल रहा है। सोनम वांगचुक इसी धरने पर जान जोखिम में डाले हुए हैं। आज इसी धरने से एक महिला रिपोर्टर की ऐसी तस्वीर सामने आई जो पूरे तौर पर व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से पढ़ी लिखी दिख रही है। माने एकदम अनपढ़!

नीचे पढ़ें, वीडियो देखें….


अजीत अंजुम-

पहली बार किसी रिपोर्टर को ‘इंकलाब ज़िंदाबाद’ जैसे नारे पर एतराज करते देख रहा हूं.

ABP न्यूज की इस रिपोर्टर को इंकलाब ज़िंदाबाद जैसे नारे से दिक्कत है?

टीवी चैनल का माइक थामने से पहले थोड़ी बहुत तो पढ़ाई की होगी? या बस ऐसे ही?

आज़ादी की लड़ाई के वक्त हसरत मोहानी ने पहली बार ये नारा दिया था. भगत सिंह जैसे देशभक्त ये नारा लगाया करते थे. आज भी सत्ता और सिस्टम के खिलाफ सबसे बुलंद नारा है – इंकलाब जिंदाबाद


पत्रकार – आप लोग तरह-तरह के नारे लगा रहे थे!
कैसे नारे थे?
पत्रकार – “इंक़लाब ज़िंदाबाद” के नारे लग रहे थे!
अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़, जो नारे देश में क्रांति और आज़ादी के लिए लगे, भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने जो नारे लगाए, उससे दिक्कत?
संघ अंग्रेज़ों का पिट्ठू था, मीडिया भी है क्या?
-प्रियंका भारती, आरजेडी प्रवक्ता

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