राहुल कोटियाल-
कल सत्ताधारी भाजपा पर राहुल गांधी भारी पड़ गए….
कल देहरादून में भाजपा ने वही करना चाहा जो 1977 में कांग्रेस ने दिल्ली में किया था…..
उत्तराखंड में कल कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैली थी. इसे फ़्लॉप करने के लिए सत्ताधारी भाजपा जो कुछ भी कर सकती थी, उसने किया. लेकिन इसी कड़ी में उसने एक ऐसा प्रपंच भी रचा जिससे 1977 का एक वाक़या याद हो आया…
बात तब की है जब देश को आपातकाल की गिरफ़्त में 19 महीने बीत चुके थे. इस दौरान भारतीय संविधान का ऐसा बाजा बजा दिया गया था कि उसे ‘कंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंडिया’ की जगह ‘कंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंदिरा’ कहा जाने लगा. उसमें ये प्रावधान तक जोड़ दिया गया था कि सरकार अपने पांच साल के कार्यकाल को कितना भी बढ़ा सकती थी. अब कोई नहीं जानता था कि देश आपातकाल की गिरफ्त से कब मुक्त हो सकेगा. लेकिन 18 जनवरी 1977 को अचानक ही प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लोकसभा चुनाव करवाने की घोषणा कर दी. आपातकाल समाप्त करने की यह घोषणा, आपातकाल लागू होने की घोषणा से भी ज्यादा अप्रत्याशित थी.
बहरहाल, देश भर की जेलों में कैद विपक्षी नेताओं को रिहा किया जाने लगा. विपक्ष ने तय किया कि आने वाला चुनाव मिलकर लड़ा जाए और जनवरी महीने में ही जयप्रकाश नारायण की मौजूदगी में जनता पार्टी की औपचारिक घोषणा हो गई. इस घोषणा के कुछ दिनों बाद ही आजीवन कांग्रेस में रहे दिग्गज दलित नेता जगजीवन राम ने भी केंद्र सरकार से इस्तीफ़ा देने की घोषणा कर दी. बाबूजी के नाम से लोकप्रिय जगजीवन राम उस दौर में दलितों के सबसे बड़े नेता थे और उनका व्यापक जनाधार हुआ करता था.
उधर, लोकनायक जयप्रकाश नारायण कांग्रेस के खिलाफ ताबड़तोड़ रैलियां कर रहे थे. पटना, कलकत्ता, बॉम्बे, मद्रास, चंडीगढ़, हैदराबाद, इंदौर, पूना और रतलाम में जनसभाएं करते हुए मार्च की शुरुआत में वे दिल्ली पहुंच चुके थे. मार्च के ही तीसरे हफ्ते में चुनाव होने थे. बाबू जगजीवन राम ने घोषणा की कि छह मार्च को दिल्ली में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया जाएगा. इस जनसभा को कमज़ोर करने के लिए कांग्रेस ने एक चाल चली.
जनसभा से भीड़ को दूर रखने के लिए कांग्रेस ने ठीक जनसभा के वक्त उस दौर की मशहूर रोमांटिक फिल्म ‘बॉबी’ का दूरदर्शन पर प्रसारण करवाना तय किया. आम दिनों में यदि बॉबी फिल्म टीवी पर दिखाई जा रही होती तो दिल्ली की लगभग आधी आबादी टीवी स्क्रीनों के इर्द-गिर्द ही सिमटी रहती. जैसा कि 90 के दशक में ‘महाभारत’ या ‘चंद्रकांता’ के प्रसारण के दौरान भी होता था. लेकिन उस दिन ऐसा नहीं हुआ. उस दौर के एक अखबार ने अगले दिन हैडलाइन बनाई कि ‘आज बाबूजी ने बॉबी पर जीत हासिल की.’ सरकारी प्रपंच धरे रह गए और बाबूजी की रैली में अप्रत्याशित भीड़ उमड़ पड़ी…
ये वाक़या इसलिए याद हो आया क्योंकि कल उत्तराखंड में भाजपा ने भी इसी तरह के प्रपंच का एक छोटा रीचार्ज करना चाहा. देहरादून में जिस वक्त राहुल गांधी की रैली होनी थी, ठीक उसी वक्त भाजपा सरकार ने जनता के पैसों पर बॉलीवुड गायिका जैस्मीन सैंडलस को बुलवाकर उनका शो परेड ग्राउंड में आयोजित करवा दिया. उसी परेड ग्राउंड में जहां पहले राहुल गांधी की रैली होनी थी लेकिन जिसकी अनुमति अंतिम समय पर सरकार ने रद्द कर दी थी.

लेकिन परेड ग्राउंड की अनुमति रद्द होने और कल देहरादून में भारी बारिश के बावज़ूद राहुल गांधी की रैली में अप्रत्याशित भीड़ उमड़ी…
1977 की पुनरावृति हुई. वक्त ने फिर से ख़ुद को दोहराया. पाले भले ही बदल गए थे…
1977 में सत्ताधारी कांग्रेस पर बाबूजी भारी पड़े थे, कल सत्ताधारी भाजपा पर राहुल गांधी भारी पड़ गए….
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