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वेब-सिनेमा

प्रदर्शनकारियों के बीच बड़े चैनलों के रिपोर्टर को लताड़ और स्वतंत्र पत्रकार सम्मान क्यों पा रहे हैं?

शहादत खान-

जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान मीडिया के साथ होने वाले व्यवहार में एक बहुत बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है, जहाँ कुछ पत्रकारों को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं कुछ को पूरा सम्मान मिल रहा है।

जमीन पर मौजूद प्रदर्शनकारी छात्र मुख्य रूप से मुख्यधारा के बड़े टीवी न्यूज चैनलों (Mainstream TV Media), जैसे टाइम्स नाउ और एबीपी न्यूज के ग्राउंड रिपोर्टर्स को परेशान कर रहे हैं और उन्हें रिपोर्टिंग करने से रोक रहे हैं। इसका मुख्य कारण छात्रों का यह आरोप है कि ये चैनल उनके नीट पेपर लीक जैसे गंभीर आंदोलन को या तो दबा रहे हैं या फिर स्टूडियो में बैठकर इसे गलत तरीके से पेश कर रहे हैं।

Protest scene: man in a yellow shirt speaks into a microphone at a daytime rally with supporters behind him.

प्रदर्शनकारियों का गुस्सा व्यक्तिगत तौर पर फील्ड रिपोर्टर्स से नहीं है, बल्कि उन टीवी चैनलों के पक्षपातपूर्ण रवैये से है जो ग्राउंड की हकीकत दिखाने के बजाय आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश करते हैं इसी नाराजगी के कारण जब भी छात्र इन बड़े चैनलों के माइक या आईडी कार्ड देखते हैं, तो वे “गोदी मीडिया गो बैक” के नारे लगाने लगते हैं, इसके विपरीत, सौरभ द्विवेदी, अजीत अंजुम, अभिनव पांडे और श्वेता जया जैसे स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारों को प्रदर्शनकारी बिल्कुल भी तंग नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनका आगे बढ़कर स्वागत कर रहे हैं।

सौरभ द्विवेदी ने अपनी टीम के साथ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर आंदोलन के मुख्य चेहरों और छात्रों के विस्तृत इंटरव्यू लिए हैं, जिससे युवाओं को लगता है कि उनकी बात पूरी गंभीरता से दिखाई जा रही है।

वहीं अजीत अंजुम ने अपने स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पुलिसिया कार्रवाई और छात्रों के दर्द को बिना किसी दबाव के देश के सामने रखा है।’

न्यूज पिंच’ के अभिनव पांडे लगातार 48 से 50 घंटों से बिना थके प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं और हर छोटी लाइव अपडेट दिखा रहे हैं, जिससे छात्रों ने उन्हें अपने संघर्ष का सच्चा साथी माना है।

श्वेता जया ने भी अपनी निडर रिपोर्टिंग से उस वक्त की हकीकत दिखाई जब प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों के मंच को हटाया जा रहा था। इन सभी पत्रकारों को परेशान न करने की इकलौती वजह यह है कि ये बिना किसी एजेंडे के निष्पक्षता से सच्चाई दिखा रहे हैं, जिससे छात्रों का इन पर भरोसा अटूट है।

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