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‘भगवा गुंडागर्दी’ हेडलाइन मामला: आनंदबाजार पत्रिका (ABP) के पत्रकारों की गिरफ्तारी पर रोक!

People standing on a rainy street by a gate; a man in an orange turban sprays orange paint on a wall while others hold umbrellas.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाली अखबार आनंदबाजार पत्रिका (ABP) के पत्रकारों को ‘भगवा गुंडागर्दी’ हेडलाइन से जुड़े FIR मामले में अंतरिम राहत दी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि 15 दिसंबर तक पत्रकारों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने पत्रकारों की ओर से दाखिल याचिका पर यह आदेश दिया। याचिका में हेडलाइन को लेकर शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देते हुए गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की गई थी।

मामला जादवपुर यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा की रिपोर्टिंग से जुड़ा है। आरोप है कि इस हिंसा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और फेडरेशन ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्निकल स्टूडेंट्स यूनियंस (FETSU) से जुड़े छात्र शामिल थे। इसी घटना की रिपोर्टिंग के दौरान ABP ने अपनी रिपोर्ट में ‘Gerua Gundagiri’ यानी ‘भगवा गुंडागर्दी’ शीर्षक का इस्तेमाल किया था। इस शीर्षक को लेकर आपत्ति जताई गई और पत्रकारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।

सुनवाई के दौरान पत्रकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एन. मुखर्जी ने तत्काल सुनवाई और राहत की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि पत्रकारों पर सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने की कोशिश जैसे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने तीन घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

इससे पहले मामले को चीफ जस्टिस की बेंच के सामने तत्काल सुनवाई के लिए रखने की मांग की गई थी, लेकिन विशेष सुनवाई की अनुमति नहीं मिली। अदालत ने कहा कि इस तरह के कई क्वैशिंग मामले पहले से लंबित हैं और याचिका नियमित प्रक्रिया के तहत दाखिल की जानी चाहिए। हालांकि, जरूरत पड़ने पर बाद में मामले को मेंशन करने की छूट दी गई।

इसके बाद जस्टिस सौगत भट्टाचार्य के समक्ष सुनवाई हुई। राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) राजदीप मजूमदार ने अदालत को आश्वासन दिया कि जांच अधिकारियों की ओर से जारी नोटिस का पत्रकार सहयोग करते हैं तो उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

पत्रकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एन. मुखर्जी और संदीपन गांगुली ने पैरवी की। उनके साथ अधिवक्ता अरुणाभ देब और आशिका डागा भी पेश हुए।

याचिकाकर्ताओं ने हेडलाइन के आधार पर शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय में हुई हिंसा की रिपोर्टिंग के दौरान इस्तेमाल किए गए शीर्षक के कारण पत्रकारों को आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है।

फिलहाल हाईकोर्ट ने पत्रकारों को अंतरिम राहत देते हुए 15 दिसंबर तक उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।

पूरा केस क्या है, नीचे लिंक पर क्लिक करें और समझें…

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