Connect with us

Hi, what are you looking for?

प्रिंट

आज के अखबार : प्रधानमंत्री बच्चों को रिझाने के अभियान पर और CJI छवि बचाने की कोशिश में

Hindi newspaper front page with a bold headline about rising demand driving up prices; photo shows a basket of eggs.

नवोदय टाइम्स की खबर। पंच परमेश्वर के देश में सरकारी पक्षपात के कई गंभीर मामले हैं, खबर भी बनती रही है।

संजय कुमार सिंह

आज मेरे सभी अखबारों में नेपाल में बाढ़ की खबर प्रमुखता से है। बाकी खबरों के चयन के लिए सब की अपनी प्राथमिकता होती है और मैं उसी को रेखांकित करता हूं। इसलिए आज जब दि इंडियन एक्सप्रेस में एक जज के तबादले की मांग प्रमुखता से छपी दिखी तो मुझे भाजपाई मंत्री को अदालती कार्रवाई से बचाने के एक मामले की याद आई। उससे पहले हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के जज की शिकायत से संबंधित खबरें देखिए-समझिए और जानिए। भारतीय संस्कृति की रक्षा करने वाली सरकार के शासन मेंपंच परमेश्वर के देश में जो हो रहा है वह किसी को भी परेशान करने के लिए पर्याप्त है। इसलिए आज न्याय और न्यायपालिका से संबंधित खबरें, उनकी प्रस्तुति और कुछ तथ्य देखिए।

हिन्दुस्तान टाइम्स में एक खबर का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट के जज ने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तबादले की मांग की, भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। इस खबर के साथ छपी एक खबर का शीर्षक भारत के मुख्य न्यायाधीश के हवाले से है, जज के ख़िलाफ़ आरोपों के मामले में संस्थागत प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। दि इंडियन एक्सप्रेस का फ्लैग शीर्षक है, भारत के मुख्य न्यायाधीश को तीन चिट्ठियां लिखीं जिसकी प्रति कॉलेजियम को भी भेजी गई। खबर का इंट्रो है, न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा कि उन्हें ‘कई शिकायतें’ मिलीं हैं जिससे जज की ‘ईमानदारी’ पर ‘शंका पैदा होती है’। इंडियन एक्सप्रेस की खबर का मुख्य शीर्षक है, “सुप्रीम कोर्ट के जज ने राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर ‘अधिकारों के दुरुपयोग’ का आरोप लगाया, तबादले की मांग की”।

टाइम्स ऑफ इंडिया में पांच कॉलम की खबर का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट के जज ने राजस्थान के कार्यवाहक जज के खिलाफ शिकायत की; सीजेआई ने जवाब मांगा। द हिन्दू में यह खबर सेकेंड लीड है। शीर्षक है, जज ने सीजेआई से पूछा, राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का तबादला क्यों नहीं किया गया? इसके साथ हाईलाइट किया गया अंश है, यह वाकई अजीब बात है कि एक तरफ सीजेआई जजों के करियर के आखिरी समय में उनके भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहे हैं, और दूसरी तरफ हमारे पास एक एसीजे हैं जो ठीक यही काम कर रहे हैं – जस्टिस संदीप मेहता, सुप्रीम कोर्ट के जज।

इंडियन एक्सप्रेस में इस खबर के साथ छपी एक और खबर का शीर्षक है, सीजेआई ने दोनों पक्षों से टिप्पणी मांगी है जबकि हाईकोर्ट में नियुक्ति पर कॉलेजियम विचार करता है। यहां सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने वाले मध्य प्रदेश के मंत्री के मामले में स्वतः संज्ञान लेने वाले हाईकोर्ट के एक जज का तबादला याद आता है। खबरों के अनुसार, कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में स्वतः संज्ञान लेने वाले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज जस्टिस अतुल श्रीधरन का तबादला अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था। तथ्य यह भी है कि, अगस्त 2025 में कॉलेजियम ने उन्हें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की थी, लेकिन केंद्र सरकार के अनुरोध पर पुनर्विचार करते हुए 14 अक्टूबर 2025 को उनके तबादले के प्रस्ताव में संशोधन कर उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया। 

इस मामले में भास्कर डॉट कॉम की एक खबर है, मध्य प्रदेश सरकार कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान के मामले में मंत्री विजय शाह पर केस चलाने की अनुमति नहीं देगी। यह फैसला मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया बताया जाता है। इस मुद्दे पर चर्चा के समय मंत्री स्वंय बैठक में मौजूद थे। कैबिनेट की बैठक में अभियोजन स्वीकृति नहीं दिए जाने के पीछे यह तर्क दिया गया कि शाह इस बयान पर कई बार सार्वजनिक माफी मांग चुके हैं। सरकार की तरफ से इस मामले में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। इसके उलट बैठक की ब्रीफिंग देते वक्त मंत्री राकेश सिंह ने इस मामले में चर्चा का कोई एजेंडा होने से ही इनकार कर दिया। इसी मामले में 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय है।

इससे पहले राज्य सरकार शपथपत्र के जरिए अपना रुख कोर्ट के सामने रखेगी। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को मंत्री विजय शाह के मामले में कैबिनेट बैठक में चर्चा शुरू हुई तो सभी अधिकारियों को बाहर जाने के लिए कहा गया। इसके बाद मुख्यमंत्री, मंत्रियों के अलावा मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला और विधि विभाग के सचिव की मौजूदगी में इस विषय पर चर्चा कर निर्णय लिया गया। मोटा-मोटी मामला यह है कि 11 मई 2025 को इंदौर के महू में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के संदर्भ में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। बयान पर व्यापक विवाद और आलोचना के बाद एसआईटी का गठन किया गया, जिसने मामले की जांच कर रिपोर्ट तैयार की।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की थी। इस बीच मंत्री ने माफी मांगी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “माफी मांगने में बहुत देर हो चुकी है”। सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन (मुकदमा चलाने) की स्वीकृति देने में हो रही देरी पर राज्य सरकार को फटकार लगाई और जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया। भारतीय न्याय संहिता/प्रक्रिया संहिता के तहत लोक सेवकों या मंत्रियों पर केस चलाने के लिए संबंधित सरकार (राज्यपाल/केबिनेट) की पूर्व अभियोजन स्वीकृति कानूनी रूप से अनिवार्य होती है।

विपक्षी मंत्रियों और मुख्यमंत्री के खिलाफ यह अनुमति मिल जाती रही है और यह (उप) राज्यपाल के मामले में भी सही है। मध्य प्रदेश के भाजपाई मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति नहीं देना स्पष्ट तौर पर मंत्री को अदालती कार्रवाई से बचाना है। पहले भी मंत्री ही नहीं, जज को भी बचाने के उदाहरण हैं लेकिन पत्रकार तरुण तेजपाल और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ कार्रवाई में सरकार का पक्षपात दिखता है। दुखद यह है कि मीडिया इन विषयों पर चर्चा नहीं करता है। प्रचारकों को  वंदेमातरम से संबंधित कानून और उसका पालन तो याद है लेकिन 1991 के पूजा स्थल विधेयक की याद नहीं है।

राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश का मामला आज अमर उजाला में भी पहले पन्ने पर है। इस खबर का हाईलाइट किया हुआ अंश इस प्रकार है, जस्टिस संदीप मेहता ने कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश के कामकाज पर उठाए गंभीर सवाल। इसपर सीजेआई की प्रतिक्रिया मुख्य खबर के साथ एक अलग छोटी और सिंगल कॉलम के रूप में है, जांच स्थापित व्यवस्था के तहत होगी। दैनिक भास्कर में यह खबर पहले पन्ने पर तो नहीं है लेकिन अंदर है। मुख्य खबर के साथ छपी एक खबर का शीर्षक है, … पत्रों में दिए जमीन कोर्ट बिल्डिंग और कॉन्फ्रेंस तक के उदाहरण। साथ ही सीजेआई का कहा भी है, आरोप को निष्कर्ष नहीं मान सकते, जस्टिस शर्मा को जवाब का मौका मिलेगा।

आप जानते हैं कि कई मामले अदालत में साबित नहीं होने और बरी किए जाने के बाद भी आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सत्येन्द्र जैन फिर गिरफ्तार किए गए हैं और मामला मात्र डेढ़ करोड़ रुपए के ट्रेल का है। इस लिहाज से दैनिक भास्कर में आज एक खबर है, मनी लॉन्ड्रिंग केस में रिटायर मेजर जनरल बरी। फ्लैग शीर्षक है, कोर्ट में आरोप साबित नहीं कर सकी ईडी, खाते चार सप्ताह में डीफ्रीज करना होंगे। आप समझ सकते हैं कि देश में न्याय व्यवस्था की क्या हालत है। यह सब तब है जब प्रधानमंत्री ने कहा था – ना खाउंगा, ना खाने दूंगा। यह तब की बात है जब न्याय के क्षेत्र से भ्रष्टाचार की खबरें शायद ही आती थीं। तबके मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले पत्रकार विनीत नारायण बमुश्किल गिरफ्तार होने से बचे थे और तब खबरों के लिए पत्रकारों को सरकार की तरफ से परेशान करने के मामले बिरले ही होते थे। 2014 के बाद बहुत कुछ बदला, चार जजों की प्रेस कांफ्रेंस हुई और स्थिति लगातार बिगड़ रही है। मौजूदा सीजेआई पर भ्रष्टाचार के आरोप पहले से हैं फिर भी मातहतों के भ्रष्टाचार पर ‘कार्रवाई’ करते दिखाए गए हैं।

देशबन्धु और नवोदय टाइम्स में यह खबर नहीं है। हालांकि, इथेनॉल की बढ़ती मांग से महंगा हुआ मक्का, अंडों की कीमतों पर बढ़ा दबाव पहले पन्ने पर है। आप जानते हैं कि ई10 के बाद ई20 के प्रयोग से पता चला और सरकार ने स्वीकार भी किया कि माइलेज कम होता है। हालांकि, माइलेज मापने के तरीके और इसका कारण गाड़ी चलाने से संबंधी व्यवहार को भी जिम्मेदार ठहराया गया जैसे वह इथेनॉल ई20 से ई10 के मुकाबले बदल जाएगा। वैसे तो यह अलग मुद्दा है लेकिन इस खबर से साफ है कि इथेनॉल मिलाने या ई10 की बजाय ई20 के प्रयोग की जबरदस्ती की कोई तुक नहीं है लेकिन सरकार सुन नहीं रही है।

दि एशियन एज में सुप्रीम कोर्ट के जज की चिट्ठी से संबंधित कोई खबर तो नहीं है लेकिन लीड दिलचस्प है। इसके अनुसार, प्रधानमंत्री ‘चार्म ऑफेंसिव’ के तहत आज छात्रों से बातचीत करेंगे। उपशीर्षक है, ‘खेलो इंडिया’ संवाद खेल और ‘विकसित भारत’ पर केंद्रित होगा। इसमें चार्म ऑफेंसिव के लिए कंप्यूटर ‘आकर्षक पहल’ बता रहा है। मुझे यह वास्तविकता से अलग लगता है। हिन्दी में इस खबर का शीर्षक मेरे हिसाब से, ‘प्रधानमंत्री रिझाने के अभियान पर, आज छात्रों से जुड़ेंगे’ होना चाहिए। द टेलीग्राफ में जज की चिट्ठी की खबर तो है लेकिन एक और खबर है जो दूसरे अखबारों में नहीं दिखी। शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई दिन टीएमसी के बागी सांसदों पर लोकसभा की कार्रवाई।

नई दिल्ली डेटलाइन से जेपी यादव की खबर इस प्रकार है, लोकसभा सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस के उन 20 सांसदों को नोटिस जारी किया है जिन्होंने पार्टी छोड़कर एक अनजानी, ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया’ में विलय का दावा किया था। पार्टी नेता अभिषेक बनर्जी ने दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने की याचिका दायर की थी। इस पर उनसे सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। 25 अगस्त की तारीख वाले ये नोटिस अभिषेक द्वारा 18 जून को स्पीकर ओम बिरला के पास अपील दायर करने के दो महीने से भी ज़्यादा समय बाद जारी किए गए। ये नोटिस उस दिन जारी किए गए जब सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक की याचिका को स्वीकार कर लिया। इसमें स्पीकर से सदस्यता रद्द करने की याचिका पर जल्द फैसला लेने की मांग की गई थी।

कोर्ट ने उन 20 सांसदों को भी नोटिस जारी किए, लेकिन स्पीकर ओम बिरला को कोई नोटिस नहीं भेजा। पहले की खबरों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों की अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। मेहता ने अदालत को बताया कि लोकसभा अध्यक्ष द्वारा बागी सांसदों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। उनके अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा अध्यक्ष को अलग से नोटिस जारी नहीं किया। यहां भी, सरकार ने लोकसभा अध्यक्ष का बचाव किया है।

द हिन्दू में आज कुछ महत्वपूर्ण और दिलचस्प खबरें हैं – अमित शाह अक्टूबर के पहले हफ़्ते में मणिपुर का दौरा करेंगे, मुख्यमंत्री ने कहा। दूसरी खबर है, मालिकी हक़ के विवाद को सुलझाने के लिए बिहार पुलिस भैंस का डीएनए टेस्ट कराएगी। मगध आईजी ने कहा कि दावा करने वालों में से एक का कहना था कि भैंस की माँ अभी भी उसके गाँव में है। इसलिए पुलिस ने डीएनए टेस्ट कराने का फ़ैसला किया है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन