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मीडिया में छंटनी का नया दौर फिर शुरू हो गया, और शुरूआत की है टाइम्स ग्रुप ने!

शकील अख्तर-

मीडिया में छंटनी का नया दौर फिर शुरू हो गया। इस बार देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थान टाइम्स आफ इंडिया से इसकी शुरुआत हुई है।

यह तब है जब प्रधानमंत्री मोदी देश को बधाई दे रहे हैं, अभूतपूर्व आर्थिक उपलब्धि बता रहे हैं। 7. 8 प्रतिशत आर्थिक विकास दर का दावा कर रहे हैं।

यह वृद्धि दर तो मीडिया को बाग बाग कर देती। लेकिन मीडिया लिखे और बताए चाहे जो कुछ असलियत यह है की मोदी के ही पूर्व सचिव रहे सुभाष चंद्र गर्ग की बात सब कोई मान रहा है कि असल में यह जीडीपी 2.6 ही है।

देश पूरी तरह आर्थिक दलदल की तरह बढ़ता जा रहा है। और उसी का परिणाम है कि टीवी चैनलों से लेकर प्रिंट मीडिया तक सब जगह खर्चे कम करने के नाम पर पत्रकारों को निकाला जाना शुरू हो गया है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया का सांध्य टाइम्स बंद हो गया। 31 अगस्त को उसका आखिरी अंक आया था।

वहां के पत्रकारों को कहीं और एडजस्ट करने के बदले निकाला जा रहा है। ‌कुछ की सेवाएं तो समाप्त कर ही दी गईं।

नवभारत टाइम्स में जो अलग से गाजियाबाद परिशिष्ट आता था वह निकाला जाना बंद कर दिया। और यहां नवभारत टाइम से भी कई लोगों की नौकरी खत्म कर दी गई।

छंटनी की तलवार टाइम्स ऑफ़ इंडिया, ईटी पर भी लटकी है। वहां भी लिस्ट बनाई जा रही है। कोरोना के समय से पत्रकारों की हालत खराब चल रही है।

उस समय भारी छंटनी हुई थी। तनख्वाहें कम की गई थीं। कई पत्रकारों की मृत्यु हुई और कई ने आत्महत्याएं तक की।

सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं मिली। जबकि इस सरकार ने सबसे ज्यादा मीडिया का उपयोग किया है या मीडिया इनके लिए उपयोग में आया है।

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