सुंदर चंद ठाकुर-
शेयर करने को बहुत कुछ है। अगले कुछ दिनों तक कुछ ना कुछ मिलेगा। आज ये प्यार भरे तोहफ़े जो एनबीटी परिवार ने मुझे दिए। मेरे रिटायरमेंट के मौके पर। और मेरा एनबीटी परिवार को अंतिम संदेश।



अलविदा नहीं… फिर मिलेंगे!
आज जब Navbharat Times, मुंबई के साथ अपने 16 वर्षों के सफर को पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो अपने दिल को कृतज्ञता से भरा हुआ पाता हूँ। 16 साल मुंबई के अलावा अगर मैं दिल्ली के भी 7 साल जोड़ दूँ तो 23 साल हो जाते हैं। और इसमें सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के 6 साल भी जोड़ दूँ तो 29 साल।
29 साल… किसी संस्था के साथ बिताया हुआ यह समय केवल नौकरी का हिस्सा नहीं था। यह मेरे जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण अध्याय था।
NBT ने मुझे पहचान दी, मुझे अवसर दिए, मुझे सिखाया और हर मोड़ पर मेरा मार्गदर्शन किया। इस संस्थान ने मुझे सिर्फ एक पेशेवर के रूप में नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान और बेहतर लीडर के रूप में भी विकसित किया!
मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि इस लंबे सफर में मुझे बहुत अच्छे बॉस मिले-ऐसे लोग जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा। और सबसे बड़ी बात, मुझे ऐसे मेहनती, समझदार और प्रतिबद्ध सहयोगी मिले जिन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदल दिया।
मुंबई का हिंदी अखबारों का बाजार आसान नहीं था। जब दूसरे प्रतिस्पर्धी यहां अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे, तब हमारी टीम की मेहनत, समझदारी और एक-दूसरे पर भरोसे ने हमें मजबूती से खड़ा रखा। मुझे गर्व है कि हमने मिलकर न सिर्फ अपनी जगह बनाई, बल्कि अपने प्रतिस्पर्धियों को भी कड़ी चुनौती दी।आज वे कहीं नहीं हैं।
मेरे लिए एक दिलचस्प बात यह भी है कि मेरे जीवन के पिछले 16 साल ही किसी एक शहर में बिताया गया सबसे लंबा समय रहा। मुंबई मेरे लिए सिर्फ एक शहर नहीं रहा, यह मेरे जीवन, मेरी यादों, मेरे रिश्तों और मेरी पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है।
आज मैं यहां से विदा ले रहा हूँ, लेकिन रिश्तों से नहीं।
मेरी जिंदगी में आप में से हर व्यक्ति ने अपने-अपने तरीके से कुछ न कुछ जोड़ा है। किसी ने मुझे कुछ सिखाया, किसी ने चुनौती दी, किसी ने मुश्किल समय में साथ दिया और किसी ने मेरी सोच को बेहतर बनाया।
आप सभी के इस अनूठे योगदान के लिए दिल से धन्यवाद।
जिंदगी के इस नए पड़ाव पर कदम रखते हुए मेरी यही कामना है कि आप सभी स्वस्थ रहें, खुश रहें और जीवन में लगातार सफलता की नई ऊंचाइयों को छूते रहें।
और हाँ… अगर भविष्य में कभी आपको लगे कि मैं आपके किसी काम आ सकता हूँ, किसी सलाह, अनुभव या सहयोग के जरिए कुछ योगदान दे सकता हूँ, तो मुझे खुशी होगी।
मैं अपने जीवन की चौथी पारी की शुरुआत करने जा रहा हूँ।
अल्लामा इक़बाल का शेर याद आ रहा है।
“तू शाहीन है, परवाज़ है काम तेरा,
तेरे सामने आसमाँ और भी हैं।”
NBT और आप सभी का दिल से शुक्रिया।
अलविदा नहीं कहूंगा…
बस इतना कहूंगा- फिर मिलेंगे।
खुश रहिए, स्वस्थ रहिए और अपना ख्याल रखिए।
-कैप्टन सुंदर चंद ठाकुर


