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कोलकाता में आनंदबाजार पत्रिका (एबीपी) मीडिया समूह के दफ्तर की दीवारों पर भगवा पेंट, पुलिस की मौजूदगी में लगे नारे

People standing on a rainy street by a gate; a man in an orange turban sprays orange paint on a wall while others hold umbrellas.

कोलकाता, 1 सितंबर : कोलकाता के प्रतिष्ठित बांग्ला दैनिक आनंदबाजार पत्रिका (ABP) के कार्यालय पर सोमवार दोपहर भगवा वस्त्र पहने लोगों के एक समूह ने प्रदर्शन किया और मुख्य प्रवेश द्वार की दीवारों को भगवा रंग से रंग दिया।

पत्रकार अंकिता महालनोबिश द्वारा X पर शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, यह घटना दोपहर करीब 1:45 बजे की है, जब कई लोग भगवा कपड़े और पगड़ी पहने हुए ABP कार्यालय के बाहर जमा हुए और “भगवा का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” और “आनंदबाजार पत्रिका हाय-हाय” जैसे नारे लगाए।

इस पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने इसे “बेहद निंदनीय” बताया है।

पुलिस के सामने हुई घटना

वायरल वीडियो में दिख रहा है कि दो लोग कार्यालय के मुख्य गेट के दो पिलर पर पेंट कर रहे हैं, जबकि कई पुलिसकर्मी मौके पर खड़े हैं और कुछ अपने मोबाइल पर घटना रिकॉर्ड कर रहे हैं।

मौके पर जमा अन्य लोगों ने नारे लगाए – “Bhagwa ka apmaan nahi sahega” और “Anandabazar Patrika haye haye”। ABP के एक एडिटर ने Alt News को बताया कि प्रदर्शन दोपहर 1:30 बजे शुरू हुआ और लगभग एक घंटे तक चला।

एक अन्य वीडियो में समूह को यह कहते हुए सुना जा सकता है, “This land belongs to Shyama Prasad Mukherjee. This land belongs to Swami Vivekananda. This land is Saffron”।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद 21 अगस्त को आनंदबाजार पत्रिका में छपी एक हेडलाइन से जुड़ा है। अखबार ने जादवपुर विश्वविद्यालय (JU) में हुई हिंसा पर पहले पन्ने पर हेडलाइन दी थी – “Saffron Hooliganism: Logo broken during raid on JU campus”।

बांग्ला में इसे “गेरुआ गुंडामी” लिखा गया था।

इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अखबार से 24 घंटे में माफी मांगने की मांग की थी और कहा था कि अखबार ने हिंदू भावनाओं को आहत किया है। 28 अगस्त को जादवपुर में एक रैली के दौरान उन्होंने कहा था – “हजारों भगवा वस्त्रधारी साधु तैयार हैं, बस मेरी सहमति का इंतजार कर रहे हैं”।

इसी बीच बौबाजार थाने में संपादक ईशानी दत्ता रॉय, चीफ रिपोर्टर सोमा मुखर्जी और अन्य संपादकीय टीम के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इस तरह की हेडलाइन से हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंची है।

आनंदबाजार पत्रिका ने माफी या खंडन जारी नहीं किया, बल्कि मुख्यमंत्री के बयान पर फॉलो-अप स्टोरी छापी थी।

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के बयान के बाद से ही अखबार के दफ्तर पर अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई थी।

तोड़फोड़ के कुछ घंटों बाद अखबार की संपादक ईशानी दत्ता रॉय ने दीवार को फिर से सफेद रंगे जाने के बाद की एक फोटो फेसबुक पर पोस्ट की, जिसके कैप्शन में रवींद्रनाथ टैगोर की कविता की पंक्ति ‘উচ্চ যেথা শির’ (जहां सिर ऊंचा है) लिखी थी।

बौबाजार पुलिस ने बताया कि इस तोड़फोड़ की घटना पर अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं की गई है और मौके पर मौजूद अधिकारी बौबाजार थाने से ही थे।

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