मनोज सामना-
अमर उजाला डिजिटल लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के पत्रकार उत्कर्ष चतुर्वेदी का यह चित्र देख कर अच्छा नहीं लगा। क्या हुआ था, यह कैसे हुआ पूछने के लिये बात कहां से आरंभ करूँ, सदा प्रसन्न उत्कर्ष से क्या कहूँ? क्योंकि इस दुर्घटना में इनकी कोई गलती नहीं होगी।
ये महामानव इतना अद्भुत है कि चार जगह हड्डियों के टूटने पर भी मुस्कान के साथ सबको मिल रहे हैं। मेदांता लखनऊ में भर्ती हैं। व्यक्तित्व के आकर्षण और मां सरस्वती की कृपामूर्ति मेधायुक्त वाणी पर नियंत्रण का दुरुपयोग कर रहे हैं। इनसे आप नाराज नहीं हो सकते, प्रभु ने इन्हें अपनी हर बात को सही सिद्ध करने की अद्वितीय प्रतिभा दे रखी है।
इनको देख कर आप दुःखी हो सकते हैं लेकिन यह चाहे जितनी पीड़ा में होंगे इसके भी आनंद की व्याख्या कर सकते हैं। जहां भी जाते हैं वहां अपनी उपस्थिति की छाप छोड़ कर उठते हैं। फिर आप सन्नाटे में भी इनकी मस्ती की अनुभूति कर सकते हैं।
हरदम मुस्कुराने वाले उत्कर्ष को न जाने किसकी बुरी नजर लग गयी। हनुमानजी से प्रार्थना है कि वह उत्कर्ष की ओर उठने वाले हर बुरी नजर को नष्ट करें। अपनी कृपा बना दें।मेदांता में हमारे एक मित्र से मैं पता करवाया तो उन्होंने बताया कि कोई चार जगह टूटा हुआ है। ऑपरेशन के बाद रॉड पड़ना है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में विज्ञान इतना आगे निकल चुका है कि साल भर बाद वह खुद नहीं जान पायेंगे कि कहां-कहां टूट गया था।बस खाली डॉक्टरों की बात पर अमल करें। हम बस इतना ही कह सकते हैं कि भगवान उत्कर्ष को शीघ्र अतिशीघ्र स्वस्थ करें।
हम सबके चहेते चंचल किंतु बेहद संजीदा-खांटी पत्रकार साथी Utkarsh Chaturvedi कल रात हुए हादसे में बुरी तरह चोटिल हो गए। एक एसयूवी चालक की नालायकी से हुए हादसे में उत्कर्ष के दाएं पैर की एड़ी से लेकर पंजे तक गंभीर चोट आई है।ये उत्कर्ष की ही दृढ़ इच्छाशक्ति है कि भीषण दर्द के बावजूद वह मिलने पर अपनी चिरपरिचित शैली में मुस्करा दे रहा है, प्रभु हमारे इस ऊर्जावान-मेधावान साथी को जल्द स्वस्थ करें!
-ज्ञानेंद शुक्ला (वरिष्ठ पत्रकार)


