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दैनिक जागरण का काला पानी है ‘जम्मू यूनिट’

….दैनिक जागरण की जम्मू यूनिट में बिजली अव्यवस्था पर एक ऐसी बात बताते हैं, जिससे आपका कलेजा दहल जाएगा। जैसा कि पिछली किस्त में बता चुका हूं कि बड़ी ब्राह्मणा में दैनिक जागरण कार्यालय भवन का भूतल बहुत ही नीचे है। उसका एक नुकसान यह भी है कि विषैले जीव-जंतुओं का प्रवेश जागरण कार्यालय के अंदर होता रहता है। क्यों न हो, अब उन्हें फिंगर पंच तो करना है नहीं। 

….दैनिक जागरण की जम्मू यूनिट में बिजली अव्यवस्था पर एक ऐसी बात बताते हैं, जिससे आपका कलेजा दहल जाएगा। जैसा कि पिछली किस्त में बता चुका हूं कि बड़ी ब्राह्मणा में दैनिक जागरण कार्यालय भवन का भूतल बहुत ही नीचे है। उसका एक नुकसान यह भी है कि विषैले जीव-जंतुओं का प्रवेश जागरण कार्यालय के अंदर होता रहता है। क्यों न हो, अब उन्हें फिंगर पंच तो करना है नहीं। 

आप सोच रहे होंगे कि बिजली व्यवस्था का विषैले जीव जंतुओं से क्या संबंध है। लेकिन है, बहुत गहरा संबंध है। भूतल पर जो बाथरूम बने हैं, उनमें किसी में बल्ब नहीं लगा है। क्यों नहीं लगा है, यह तो वहां के जीएम साहब जानें, लेकिन कर्मचारियों में हमेशा भय बना रहता है, क्योंकि कई बार बाथरूम में सांप देखा गया है। 

जम्मू के लोग बताते हैं कि वहां के सांप ने यदि डस लिया तो आपको दो मिनट से ज्यादा की लाइफ लाइन नहीं मिलेगी। गौरतलब है कि ऊपरी मंजिल पर बने बाथरूम की सफाई जीएम के मूड पर निर्भर करती है। बाथरूम की बदबू जब तक उनके चेंबर तक दस्तक न दे दे, वह सफाई कराने की इजाजत ही नहीं देते। ऊपर का बाथरूम गंदा होगा तो जाहिर है, लोग नीचे के बाथरूम में जाएंगे, जहां विषैला सांप अंधेरा होने के कारण उनके पैर के नीचे आ सकता है। फिर भी लोगों ने विषैले सांप का भय इसलिए भुला दिया है और कोई चर्चा तक इसलिए नहीं करता कि जीएम की बातें सांप के विष से कहीं ज्यादा विषैली होती है।

अब आप सोच रहे होंगे कि दैनिक जागरण का जीएम क्या बिजली मिस्त्री है या सफाई कर्मचारी है, जो इन छोटी छोटी बातों पर ध्यान देगा। तो आपको बताए देते हैं कि जम्मू यूनिट में संपादक, ब्यूरो चीफ, समाचार संपादक और डीएनई समेत लगभग सभी विभागों का ठेका जीएम को ही दे दिया गया है। उसकी मर्जी के बगैर जम्मू यूनिट में पत्ता तक नहीं हिलता। अगर किसी ने कोई आवश्यक सुझाव दे भी दिया तो कहता है-हम आपकी शर्तों पर थोड़े ही काम करेंगे। बिजली अव्यवस्था से हटकर जो ये बातें हमने आपको बताई वे आगे की बातों को समझने में हमारी सहायता करेंगी।

अब फिर बिजली पर आते है-पूरे कार्यालय की वायरिंग जीएम के दिमाग की तरह सड़ गई है, गल गई है और नष्ट हो गई है। यहां तक कि कई बार शार्ट सर्किट से कार्यालय में आग भी लग चुकी है और कर्मचारियों को जान बचा कर भागना पड़ा है। ऐसे मौके पर बिजली की जानकारी रखने वाला कोई विशेषज्ञ भी नहीं होता है। बिजली ठीक करने के लिए एक कर्मचारी है भी तो वह दिन में ही सेवा दे कर चला जाता है। ऊपर से उससे कई और काम लिए जाते हैं। प्लंबर का काम कराना है ता बिजली वाले को बुलाओ। कहीं मेल करनी है तो बिजली वाले को बुलाओ। रोटरी मशीन में रील को रिवाइंड कराना है तो बिजली वाले को बुलाओ। अब आप ही बताएं कि इस हालत में एक इलेक्ट्रीशि‍यन दैनिक जागरण के इतने बड़े कार्यालय की बिजली व्यवस्था को कैसे ठीक रख पाएगा।

श्रीकांत सिंह के फेसबुक वॉल से…

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