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Media Fraud : … तो उस न्यूज एजेंसी को बीस हजार रुपए देकर चटपट बनजाइए स्टेट ब्यूरो चीफ !

उस पत्रकारिता के जमाने लद गए, जब चप्पल घिसते-घिसते खबरची के पांव कब्र तक पहुंच जाया करते थे। वह भूखो मर जाता था मगर कत्तई वह अपने पेशे के ईमान और विश्वास से समझौता नहीं करता था। अब तो मीडिया में बाजीगरों की भीड़ सी उमड़ पड़ी है। पता चला है कि ‘आईएनआई’ (INI) नाम की कोई एजेंसी बीस हजार रुपए लेकर चाहे किसी को भी स्टेट ब्यूरो हेड बना दे रही है। 

भुक्तभोगी पत्रकार से मांगे गए पांच हजार रुपए की whattsapp chat की screenshot 

उस पत्रकारिता के जमाने लद गए, जब चप्पल घिसते-घिसते खबरची के पांव कब्र तक पहुंच जाया करते थे। वह भूखो मर जाता था मगर कत्तई वह अपने पेशे के ईमान और विश्वास से समझौता नहीं करता था। अब तो मीडिया में बाजीगरों की भीड़ सी उमड़ पड़ी है। पता चला है कि ‘आईएनआई’ (INI) नाम की कोई एजेंसी बीस हजार रुपए लेकर चाहे किसी को भी स्टेट ब्यूरो हेड बना दे रही है। 

भुक्तभोगी पत्रकार से मांगे गए पांच हजार रुपए की whattsapp chat की screenshot 

 

प्रामाणिक रूप से बताया गया है कि स्टेट लेवल का रिपोर्टर या ब्यूरो चीफ बनाने के लिए न्यूज़ एजेंसी ने सरेआम ठगी के लिए अजीबोगरीब फर्जी ‘भर्तीबाड़ा’ खोल लिया है। वह उन पर मुंहजबानी चारे फेंक रही है, जो मीडिया को सिर्फ धन कमाने का माध्यम मान रहे हैं। मौजूदा कारपोरेट मीडिया की ऐसी ही छबि भी तो हो चली है। लोग उससे ऐसा सबक लें तो दोष किसका! 

तो उस एजेंसी का नाम है – आईएनआई (INI)। वह चाहे किसी को भी चटपट रिपोर्टर बना देने के लिए इच्छुक व्यक्ति से उसके रिज्यूम के साथ पांच हजार से बीस हजार रुपए तक की मांग कर रही है। एजेंसी चलाने वाले धोखेबाज का कहना है कि रुपए का भुगतान कैश अथवा चेक से होते ही पत्रकार बनने के इच्छुक व्यक्ति की मीडिया में धमाकेदार इंट्री हो जाएगी और वह बन जाएगा स्टेट ब्यूरो चीफ।

भड़ास4मीडिया को प्रेषित अपनी लिखित जानकारी में एक पत्रकार ने बताया है कि उसके भी मोबाइल नंबर पर कॉल करने के साथ ही मैसेज दिया गया कि एजेंसी के अकाउंट मैं पांच-से-बीस हजार रुपये तक डाल दो, तुरंत स्टेट ब्यूरो चीफ की मीडिया आईडी उसे भेज दी जाएगी। जब उसने बताया कि वह तो पहले से ही पुराना पत्रकार है, उससे भी रुपये लोगे तो फोन काट दिया गया। इसके बाद फोन कर बोला कि वह एक घंटे बाद दोबारा कॉल करेगा। दोबारा कॉल नहीं आई तो उसे फ़ोन किया गया लेकिन उसने रिसीव नहीं किया।

उसके बाद भुक्तभोगी पत्रकार ने अपने एक दोस्त को उस कथित न्यूज एजेंसी का नंबर दिया। उसने जब बरेली ब्यूरो हेड बनने की इच्छा जताई तो उससे कहा गया कि बरेली तो पहले से ऑलरेडी हमारा बंदा तैनात हो चुका है। फिर भी रजिस्ट्रेशन फीस के बीस हजार रुपये तुरंत भेजो, तुम्हे ही बना देता हूं। वहां दो ब्यूरो हेड हो जाएंगे। (शोएब खान)

(एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित) 

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2 Comments

2 Comments

  1. Brahma Nand Pandey

    March 27, 2015 at 3:59 am

    Yaswant G Aise hi logo ke karan patrakaro ki patrakarita paresani me dekhi ja rahi hai

  2. muntajir chouhan

    September 4, 2015 at 10:38 am

    sabse jyada sosan is field m ho rha h jo bachhe naye aatein h unko pehle ik saal tak free m kaam karate h aur bolte h tumhe kisi channel m lagwa denge tum hamare sath jude rho

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