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दैनिक जागरण की पोल-पट्टी खोलेंगे कुमावत, संसद में गूंजेगा मजीठिया वेतनमान का मुद्दा

दैनिक जागरण ने एक बार फिर एक होनहार कर्मचारी खो दिया है। कुमावत से मेरी विस्‍तार से बातें हुआ करती थीं। वह अक्‍सर यह कहते थे- मैं जागरण प्रबंधन को उसके हित की बातें बताता रहता हूं, लेकिन वे प्रबंधन के इगो, अहंकार और घमंड के प्रतिकूल हुआ करती थीं। इसलिए उन बातों को महत्‍व नहीं दिया जाता था। जागरण को तो विजय सेंगर और विष्‍णु त्रिपाठी जैसे चापलूसों की जरूरत है, जो कानून का एक अच्‍छर नहीं जानते और कंपनी को कानूनी उलझनों में फंसाते जा रहे हैं। 

दैनिक जागरण ने एक बार फिर एक होनहार कर्मचारी खो दिया है। कुमावत से मेरी विस्‍तार से बातें हुआ करती थीं। वह अक्‍सर यह कहते थे- मैं जागरण प्रबंधन को उसके हित की बातें बताता रहता हूं, लेकिन वे प्रबंधन के इगो, अहंकार और घमंड के प्रतिकूल हुआ करती थीं। इसलिए उन बातों को महत्‍व नहीं दिया जाता था। जागरण को तो विजय सेंगर और विष्‍णु त्रिपाठी जैसे चापलूसों की जरूरत है, जो कानून का एक अच्‍छर नहीं जानते और कंपनी को कानूनी उलझनों में फंसाते जा रहे हैं। 

उन्‍होंने यहां तक कहा था कि मुझे जबरन हर जगह फंसाया जा रहा है। डीएलसी आफिस से आए श्रम प्रवर्तन अधिकारी राधेश्‍याम सिंह को फर्जी जांच रिपोर्ट विजय सेंगर ने दी थी और नाम मेरा डलवा दिया था। इसी प्रकार हमला भी विजय सेंगर ने कराया था और नाम कुमावत का डलवा दिया था। अभी नौकरी की विवशता है, लेकिन जिस दिन इस्‍तीफा दूंगा, उस दिन सारे भेद खोलकर रख दूंगा। जो फंदा विजय सेंगर ने मेरे गले में डाला है, वही उनके गले की फांस बनेंगा। उन्‍होंने यह भी बताया था कि लूटे गए 36 हजार रुपये विजय सेंगर की जेब में गए हैं, जो इस समय आकंठ भ्रष्‍टाचार में डूबे हैं। जिस दिन उनकी पोलपट्टी खोलूंगा, उस दिन उनकी नौकरी तो जाएगी ही, जेल की हवा भी खानी पड़ेगी।

यहां यह बताना जरूरी है कि पुलिस जांच में सहयोग के लिए कुमावत सीओ द्वितीय के आफिस चले गए थे, लेकिन बाकी अधिकारी अपने इगो में ऐंठ गए हैं। वे तो दैनिक जागरण अखबार की धौंस में समानांतर सरकार चला रहे हैं। इनकी शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कई कैबिनेट मंत्रियों व सांसदों तक पहुंच गई है। यह मामला संसद सत्र में भी उठने वाला है।

दरअसल, ये लोग घबराहट में सीएम से लेकर पीएम तक लपर-लपर कर आए हैं। उनकी यह लपर-लपर दैनिक जागरण में पालिसी के प्रतिकूल स्‍थान पर रायता की तरह फैला कर छापे गए इंटरव्‍यू में साफ नजर आ रही है। ये लोग इस समय यही सोच रहे हैं कि सीएम और पीएम को सेट कर लिया है। अब डर काहे का। लेकिन आपको बता दें कि एक जीवट पत्रकार ऐसे हैं, जो इनकी लपर-लपर को निष्क्रिय कर आए हैं और राष्‍ट्रीय नेताओं को बता दिया है कि दैनिक जागरण प्रबंधन की वजह से मोदी और उनकी सरकार की किरकिरी हो रही है। लोग केंद्र सरकार को कारपोरेट्स की सरकार कहने लगे हैं। भाजपा के राष्‍ट्रीय नेता अपनी छवि के प्रति अब संजीदा हो गए हैं। इसका असर तो संसद के मानसून सत्र में तब नजर आएगा, जब मजीठिया मामले को कई सांसद एकजुट होकर संसद में उठाएंगे और केंद्रीय मंत्रियों को उसका जवाब देना होगा।

श्रीकांत सिंह के एफबी वाल से

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