दैनिक जागरण में सरकारी विज्ञापन छापने पर लगी रोक

पेड न्यूज के मामले की जांच के बाद प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने दिया आदेश, केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद डीएवीपी ने जारी किया निलंबन का आदेश, दैनिक जागरण पर पेड न्यूज यानि पैसे लेकर खबर छापने का आरोप हुआ साबित
नई दिल्ली। मीडिया इंडस्ट्री से एक चौंकाने वाली ख़बर आ रही है। पेड न्यूज यानि पैसे लेकर खबर छापने के मामले में बड़ी  कार्रवाई करते हुए केंद्र सरकार ने दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन पर रोक लगा दी है। भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी में डीएवीपी को निर्देशित करते हुए कहा गया है कि वह यह सुनिश्चित करें कि कि दैनिक जागरण सहित 51 समाचार पत्र जिन्होंने पेड न्यूज छापा है उन्हें किसी भी तरह से सरकारी विज्ञापन ना जारी किया जाए। केंद्र सरकार ने यह कार्रवाई पत्रकार एवं पत्रकार संगठनों की सर्वोच्च संस्था प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के आदेश के बाद किया है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने ही दैनिक जागरण द्वारा पेड न्यूज छापने के मामले की जांच की। जांच में दैनिक जागरण अपने पक्ष में ठोस एवं पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर पाया।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान दैनिक जागरण ने पैसे लेकर खबरों का प्रकाशन किया था। हालांकि पूर्व में भी दैनिक जागरण में इस तरह की खबरें प्रकाशित की जाती रही हैं लेकिन अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी। यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान दैनिक जागरण द्वारा पैसे लेकर खबर छापने के मामले में उस समय भी बड़ी कार्रवाई हुई थी। गाजियाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में दैनिक जागरण के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत हुए थे। गाजियाबाद पुलिस ने उस समय दैनिक जागरण के मालिक संजय गुप्ता सहित उसके कई संपादकों को गिरफ्तार करने के लिए जागरण के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी एवं दबिश दी थी।

दबिश के दौरान संजय गुप्ता किसी तरह बच गए थे। लेकिन पुलिस ने jagran.com के संपादक शेखर त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया था । दैनिक जागरण के संपादक शेखर त्रिपाठी को गाजियाबाद पुलिस ने कवि नगर थाने के लॉकअप में रात भर बंद रखा था। बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिली थी। शेखर त्रिपाठी ने कहा था कि यह न्यूज़ दैनिक जागरण मैनेजमेंट के कहने पर छापा गया था। खुद को फंसा हुआ देख और जेल जाने के डर से सहमे संजय गुप्ता ने पेड न्यूज छापने के लिए कंपनी के विज्ञापन विभाग को जिम्मेदार बताया  था। दैनिक जागरण के इस कुकृत्य कि मीडिया इंडस्ट्री में एवं पत्रकार बिरादरी में खूब थू – थू हुई थी।

The Hindu Hindustan Times Indian Express Jansatta सहित देश के सभी बड़े प्रमुख एवं सम्मानित राष्ट्रीय अखबारों ने दैनिक जागरण के इस कृत्य की निंदा करते हुए खबरें प्रकाशित की थी। पत्रकारिता के गिरते हुए स्तरं को बचाने एवं उसे फिर से सुधारने के लिए दैनिक जागरण को कसूरवार मानते हुए वरिष्ठ पत्रकारों ने कड़ी कार्रवाई की मांग प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से की थी। प्रसिद्ध पत्रकार एवं इंदिरा गांधी कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने इस मामले में दैनिक जागरण के प्रधान संपादक के गिरफ्तारी की मांग की थी। रामबहादुर राय ने कहा था कि दैनिक जागरण के प्रधान संपादक एवं मालिक संजय गुप्ता हैं ऐसे में उन्हें हर हाल में गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पैसे लेकर खबर छापने के मामले में दैनिक जागरण की पहले भी किरकिरी हो चुकी है वर्ष 2009 में दैनिक जागरण में सभी चुनावी खबरें पैसे लेकर छापी गई थी।

दैनिक जागरण के मालिकों को कटघरे में रखते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन ने कहा था कि दैनिक जागरण में खबर छापने के बदले में उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं। लालजी टंडन ने कहा कि दैनिक जागरण के मालिक एहसान फरामोश एवं धोखेबाज हैं। दैनिक जागरण के मालिकों को भारतीय जनता पार्टी ने टिकट दिया एवं राज्यसभा मैं सांसद बनाया लेकिन वह लोग इस एहसान को भी भूल गए।

जनसत्ता अखबार के संपादक ओम थानवी ने भी संजय गुप्ता को प्रायश्चित करने की सलाह दी थी और पेड न्यूज के मामले में दैनिक जागरण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी। वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र सुरजन अरुण महेश्वरी उर्मिलेश सहित सभी नामी गिरामी पत्रकारों ने एवं संपादकों ने दैनिक जागरण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। उस समय दैनिक जागरण के एक संपादक की गिरफ्तारी के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। लेकिन प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए और इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दैनिक जागरण को दोषी करार दिया। सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा 13 सितंबर 2017 को जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि अगले 2 महीने तक दैनिक जागरण को मिलने वाले सरकारी विज्ञापन पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। 2 महीना पूरा होने के बाद ही इस बारे में सोचा जाएगा कि क्या फिर से दैनिक जागरण को सरकारी विज्ञापन की मान्यता के दायरे में लाया जाए कि नहीं लाया जाए।

मूल खबर…

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शेम शेम दैनिक जागरण! मजीठिया मांगने पर संकट से घिरे वरिष्ठ पत्रकार का जम्मू कर दिया तबादला

दैनिक जागरण बिहार का अमानवीय शोषणकारी चेहरा…दैनिक जागरण के वरिष्ठ एवं ईमानदार पत्रकार पंकज कुमार का मजीठिया के अनुसार वेतन मांगने पर जम्मू किया तबादला…. वीआरएस लेने  के लिए जागरण प्रबंधन बना रहा है दबाव… बिहार के गया जिले में दैनिक जागरण के पत्रकार पंकज कुमार अपनी बेख़ौफ़ एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. ये दैनिक जागरण के बिहार संस्करण के स्थापना काल से उससे जुड़े हुए हैं.

इनको स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण 2004 में पेस मेकर लगा था जिसे वर्ष 2016 में बदलकर पुन: अधिक शक्तिशाली पेसमेकर लगवाना पड़ा था. उसी वर्ष अक्तूबर 2016 में इनका पोस्ट्रेट का आपरेशन भी पटना में हुआ. अपनी गंभीर बीमारी एंव स्वास्थ के कारण इन्होंने माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में मजीठिया वेतन आयोग की मांग दैनिक जागरण प्रबन्धक से कर दिया. इसके बाद दैनिक जागरण प्रबन्धक ने शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से परेशान करना शुरू कर दिया. पोस्ट्रेट ग्रिड के आपरेशन के दौरान ही पंकज कुमार को डायपर और लुंगी पहनकर कार्यालय आने के लिए बाध्य किया गया. इनके वेतन से पहले 14 दिन फिर एक बार 7 दिन की कटौती भी दैनिक जागरण ने कर ली जबकि इनका 92 दिन का उपार्जित अवकाश देय था.

पंकज कुमार ने गया में दैनिक जागरण को एक विश्वसनीयता प्रदान की थी. वर्ष 2003 के नवम्बर माह में राष्ट्रीय राजमार्ग के उप महाप्रबंधक इंजीनियर सत्येन्द्र दुबे की हत्या ने सनसनी फैला दी थी. जहां सभी अखबार इस हत्या का कारण सत्येन्द्र दुबे द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय में भ्रष्टाचार संबंधी की गई शिकायत बता रहे थे वहीँ पंकज कुमार ने इस हत्या का कारण बिहार में गिरती हुई कानून व्यवस्था को जिम्मेवार मानते हुए सड़क लुटेरों द्वारा इस घटना को अंजाम देना बताया था. सीबीआई की जांच में भी यही सामने आया था.

क्रूर एवं अमानवीय दैनिक जागरण प्रबन्धक ने इस तरह के पत्रकार को भी नहीं बख्शा और मुख्य महाप्रबंधक आनन्द त्रिपाठी ने मजीठिया आयोग के अनुसार वेतन की मांग पर नाराजगी जताते हुए दो माह का वेतन लेकर स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने को कहा दिया तथा इनकार करने पर जम्मू जैसे दुर्गम इलाके में एक बीमार पत्रकार को तत्काल प्रभाव से जाने का फरमान जारी कर दिया. जनता की आवाज होने का दावा करने वाले ये अखबार खुद अपने ही कर्मचारियों का गला हक़ के लिए आवाज उठाने पर घोटने से बाज नहीं आते हैं.  पंकज कुमार ने भी संकल्प ले लिया है कानूनी सबक सिखाने का. उन्होंने पटना के लेबर कोर्ट तथा माननीय उच्च न्यायालय में भी मुकदमा दायर किया है.

अफ़सोस कि राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन भी शिद्दत के साथ शोषक अखबारों के खिलाफ आवाज नहीं उठा रहे हैं. मजीठिया वेतन आयोग लागू होने के बाद से अब तक दस हजार से ज्यादा पत्रकारों की नौकरी अखबार प्रबन्धक खा चुके हैं. आज अगर पत्रकार हार गए तो बची खुची पत्रकारिता की भी मौत हो जायेगी.

मीडियाकर्मियों के लिए ये दो लाइनें बहुत प्रासंगिक हो गई हैं….

निकले सड़क पर जनता, बताये शोषक प्रबंधकों को उनकी औकात.
माना कि अन्धेरा घना है पर मशाल जलाए रखना कहाँ मना है?

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : ह्वाट्सएप 9999330099

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आइडिया चोरी करने और धमकाने के मामले में दैनिक जागरण पर हुआ मुकदमा

दैनिक जागरण वाले चोरी और सीनाजोरी के लिए कुख्यात हैं. ताजा मामला पटना का है. मानस कुमार उर्फ राजीव दुबे अपनी कंपनी चलाते हैं. उन्होंने बिल्डरों और आर्किटेक्ट्स पर आधारित ‘बिल्डकान’ नामक एक प्रोग्राम करने का इरादा बनाया. इसके लिए गल्ती से उन्होंने एक ऐसे आर्किटेक्ट (नाम- विष्णु कुमार चौधरी) की मदद ली जो दैनिक जागरण से भी जुड़ा हुआ था. उस आर्किटेक्ट ने सारा आइडिया दैनिक जागरण वालों को बता दिया.

CIVIL Court Case File Copy

दैनिक जागरण के मार्केटिंग के वाइस प्रेसीडेंट विकास चंद्रा को यह आइडिया भा गया और उन्होंने इस बिल्डकान कार्यक्रम के जरिए जागरण को हर प्रदेश में करोड़ों कमवाने का विचार बना लिया. इसके लिए उन्होंने मानस कुमार उर्फ राजीव दुबे को धमकाना शुरू कर दिया. मानस भी तेजतर्रार हैं. उन्होंने पहले से ही सब कुछ कापीराइट करवा लिया था. सो, तत्काल उन्होंने न सिर्फ दैनिक जागरण वालों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट लिखा दिया बल्कि कोर्ट में मुकदमा ठोंक दिया.

पता चला है कि दैनिक जागरण वाले अब अपनी ताकत का एहसास कराने के लिए मानस कुमार को धमका रहे हैं. मानस कुमार ने भड़ास4मीडिया को फोन पर बताया कि उन्हें दैनिक जागरण के विकास चंद्रा धमकियां दे रहा है. जिस कार्यक्रम को उन्होंने मेहनत से प्लान किया, उसे अब जागरण हड़प लेना चाहता है. दैनिक जागरण की मंशा यह कार्यक्रम खुद के बैनर तले करने की है ताकि वह सारा रेवेन्यू हड़प ले जाए. मानस ने कहा कि यह चोरी और सीनाजोरी का मामला है जो बिलकुल पेशेवर नहीं है. ऐसी हरकत टुच्ची कंपनियां करती हैं. मानस के मुताबिक वह अंत तक लड़ेंगे. अगर उनके साथ कुछ बुरा होता है तो उसके लिए दैनिक जागरण प्रबंधन और विकास चंद्रा जिम्मेदार होंगे.

उपर कोर्ट में किए गए मुकदमें की कापी के शुरुआती दो पन्ने हैं… नीचे थाने में दी गई तहरीर की कापी है….

 FIR Report

ज्यादा जानकारी के लिए पीड़ित मानस से संपर्क tabletmedia.patna@gmail.com या manaskumar@tabletmedia.co.in या +917633995888 या +918292610840 के जरिए किया जा सकता है.

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दैनिक जागरण प्रबंधन ने अपने सभी संपादको को भूमिगत होने का निर्देश दिया!

खोज खोज कर जागरण सम्पादकों को पकड़ रही है पुलिस… चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में देश की सर्वोच्च चुनावी अथॉरिटी चुनाव आयोग द्वारा दैनिक जागरण के 15 जिलों के संपादकों सहित प्रधान संपादक और प्रबंध निदेशक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश का अनुपालन करते हुए यूपी पुलिस संपादकों को गिरफ्तार करने में जुट गई है. शेखर त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में उन्हें जमानत मिल गई.

दैनिक जागरण में आज इस बात की भी चर्चा रही कि शेखर त्रिपाठी सिर्फ एक मोहरा मात्र हैं जिन्हें गाजियाबाद स्थित उनके घर से गिरफ्तार कराकर दैनिक जागरण के प्रबंध निदेशक संजय गुप्ता अपने बचने का एक रास्ता खोज रहे हैं. सूत्रों का तो यहाँ तक कहना है कि सोमवार की रात जागरण कार्यालय में वकीलों की भारी भरकम एक टीम भी पहुंची थी तथा प्रबंधन द्वारा दैनिक जागरण के सभी संपादकों को भूमिगत होने का निर्देश दिया गया है.

पुलिस अब 15 जिलों के संपादकों / ब्यूरो चीफों को गिरफ्तार करने की तैयारी में है. चुनाव आयोग के आदेश के बाद दैनिक जागरण के संपादकों और प्रबंध निदेशक की अकल ठिकाने आ गयी है. पुलिस ने लखनऊ और दिल्‍ली में दैनिक जागरण के कई संपादकों के ठिकानों पर छापेमारी की. पुलिस ने जागरण न्‍यू मीडिया की सीईओ सुकीर्ति गुप्‍ता, जागरण इंग्लिश ऑनलाइन के डिप्‍टी एडिटर वरुण शर्मा और डिजीटल हैड पूजा सेठी के घरों पर भी छापे मारे.

इससे पहले चुनाव आयोग के आदेश पर पुलिस ने शेखर त्रिपाठी, दैनिक जागरण के कार्यालय और सर्वे करने वाली संस्‍था आरडीआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. इनके खिलाफ उत्‍तर प्रदेश के पहले चरण के चुनाव के बाद एग्जिट पोल प्रकाशित करने का आरोप है. बताते हैं कि चुनाव आयोग ने पहले चरण के 15 जिला निर्वाचन अधिकारियों को सर्वे करने वाली संस्‍था ‘रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और दैनिक जागरण के प्रबंध सम्पादक, संपादक या मुख्य संपादक  के खिलाफ तत्‍काल एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया था.

शशिकान्त सिंह

पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट

मुंबई

9322411335

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जागरण न्यूज़ पेपर के MD आशुतोष मोहन की गन्दी बात सुनिए

मुझसे जुलाई 2015 में छतरपुर की जागरण रीवा ब्यूरोशिप और एजेंसी के नाम पर इंदौर रीवा जोन जागरण के एमडी आशुतोष मोहन ने HDFC का 25000 का चेक लिया था, जो कि 28-07-15 को क्लीयर भी हो गया। बाद में इन लोगों ने किसी तरह का कोई पेपर न भेजा और ना ही कोई खबरें प्रकाशित की। आज करीब एक साल बाद तक पैसा वापस करने की बात ये लोग कहते रहे लेकिन पैसे लौटाए नहीं।

अब एमडी आशुतोष मोहन से जब उनके मोबाइल नंबर 9893024599 पर पैसे या पेपर की मांग की जाती है तो वो गाली गलौज कर असभ्य भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मैं इस ऑडियो को मीडिया के सभी लोगों तक पहुँचाना चाहता हूँ ताकि और लोग इन चोरों के झाँसे में ना आयें। सभी लोग सुनिए कि दैनिक जागरण जैसे न्यूज़ पेपर का मैनेजिंग डायरेक्टर किस भाषा में बात करता है। टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :

https://youtu.be/2B3lSdN8y_A

अवधेश कुमार
awadhesh.vnews@gmail.com
छतरपुर
मध्य प्रदेश

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जिन लोगों ने ABVP के खिलाफ ज्ञापन दिया, जागरण ने उन्हीं को बता दिया अभाविप कार्यकर्ता!

जागरण वाले ये क्या छाप देते हैं… देखिए एक ब्लंडर : बदायूं में कल जिस अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के विरोध में वकीलों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन दिया था, आज दैनिक जागरण अख़बार ने उसी ABVP का वकीलों को कार्यकर्ता बता कर खबर छाप दिया. सुबह दैनिक जागरण अखबार देखकर वकील सकते में आ गए. एबीवीपी के खिलाफ ज्ञापन दिया था और उन्हें ही बता दिया गया एबीवीपी कार्यकर्ता. इस ब्लंडर को लेकर दैनिक जागरण के पाठकों में भारी रोष है. वकीलों ने माफीनामा न छापने पर अखबार के बहिष्कार की धमकी दी है.

एडवोकेट सलमान सिद्दीकी ने बताया कि वे इस झूठी खबर का पूरी तरह से खंडन करते हैं. वे लोग ABVP कार्यकर्ता कभी नहीं रहे हैं. सलमान सिद्दीकी ने सभी से अनुरोध किया कि वे लोग दैनिक जागरण की इस तरह की किसी भी खबर पर यकीन न करें. ज्ञात हो कि यह मामला यूपी के बदायूं का है. जिन लोगों ने कल avbp के विरोध में DM बदायूं को एक ज्ञापन दिया था उन्हें आज बदायूं के दैनिक जागरण ने avbp का कार्यकता बताकर गलत खबर छाप दी.  इसका कड़ा विरोध किया जा रहा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन और संजय गुप्ता को तलब किया

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न करने और सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानून, न्याय, संविधान तक की भावनाओं की अनदेखी करने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने आज दैनिक जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन गुप्ता और संजय गुप्ता को अगली सुनवाई पर, जो कि 25 अक्टूबर को होगी, कोर्ट में तलब किया है. आज सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न किए जाने को लेकर सैकड़ों मीडियाकर्मियों द्वारा दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई हुई.

कोर्ट ने आज के दिन कई प्रदेशों के लेबर कमिश्नरों को बुला रखा था. कोर्ट ने सभी लेबर कमिश्नरों से कहा कि जिन जिन मीडियाकर्मी ने क्लेम लगाया है, उसमें वे लोग रिकवरी लगाएं और संबंधित व्यक्ति को न्याय दिलाएं. कोर्ट के इस आदेश के बाद अब श्रम विभाग का रुख बेहद सख्त होने वाला है क्योंकि पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लापरवाही बरतने पर उत्तराखंड के श्रमायुक्त के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था.

सैकड़ों मीडियाकर्मियों की याचिका का प्रतिनिधित्व करते हुए एडवोकेट उमेश शर्मा ने आज सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दैनिक जागरण की किसी भी यूनिट में किसी भी व्यक्ति को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से न तो एरियर दिया गया है और न ही सेलरी दी जा रही है.

साथ ही दैनिक भास्कर समूह के बारे में भी विस्तार से बताया गया. आज सुप्रीम कोर्ट ने जागरण के मालिकों को कोर्ट में आने के लिए आदेश कर दिया है ताकि उनसे पूछा जा सके कि आखिर वो लोग क्यों नहीं कानून को मानते हैं. चर्चा है कि अगली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट भास्कर के मालिकों को तलब कर सकता है. फिलहाल इस सख्त आदेश से मीडियाकर्मियों में खुशी की लहर है.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुंबई के पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह भी मौजूद थे. उन्होंने फोन करके बताया कि आज सुप्रीम कोर्ट ने जो सख्ती दिखाई है उससे वे लोग बहुत प्रसन्न है और उम्मीद करते हैं कि मालिकों की मोटी चर्बी अब पिघलेगी. सैकड़ों मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड से संबंधित अपने हक के लिए गाइड करने वाले पत्रकार शशिकांत सुप्रीम कोर्ट में हुई आज की सुनवाई की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं जिसे जल्द भड़ास पर प्रकाशित किया जाएगा.

अपडेटेड न्यूज (7-10-2016 को दिन में डेढ़ बजे प्रकाशित) ये है….

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गाली गलौज पर उतरे दैनिक जागरण रांची के संपादक, रिपोर्टर को तलवे चाटने वाला कहा

रिपोर्टर ने भी दिया करारा जवाब, कहा- आरोप लगाने से पहले सबूत दिखाइए

रांची दैनिक जागरण में इस समय सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। नवागत संपादक किशोर झा और उनके पिछलग्गुओं की मनमानी से लोग त्रस्त हैं। अभी दो दिन पूर्व किशोर झा ने दैनिक जागरण के रिपोर्टर्स के WhatsApp group में एक रिपोर्टर को भ्रष्ट और लोगों के तलवे चाटने वाला कह डाला। संपादक के इस व्यवहार से पूरी जागरण टीम सकते में आ गई। संबंधित रिपोर्टर को यह बात इतनी नागवार लगी कि वह भी ग्रुप में ही सार्वजनिक रूप से मोर्चा खोलते हुए संपादक से भिड़ गया और संपादक से अपने ऊपर लगाए गए भ्रष्टाचार के सबूत मांगने लगा।

हुआ यह कि स्वास्थ्य बीट देखने वाले रिपोर्टर प्रभु नारायण ने सुबह WhatsApp group में यह मैसेज चलाया कि वे स्वास्थ्य मंत्री के कार्यक्रम में जा रहे हैं इसलिए वे सुबह की मीटिंग में नहीं आ पाए्ंगे। विवाद की शुरुआत यही से हुई। संपादक ने ग्रुप में ही अपशब्दों का प्रयोग करते हुए रिपोर्टर को डाक्टर (जिनकी क्लीनिक में मंत्री का कार्यक्रम था) से उपकृत होने वाला, चाटुकार और भ्रष्ट तक बता डाला। इस घटना के बाद संपादकीय टीम में भयानक आक्रोश है जो किसी भी समय अप्रिय रूप ले सकता है। दबी जुबान से यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि संपादक अपने स्वजातीय लोगों को छोड़कर किसी अन्य जाति के सहयोगी को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। उनके आसपास की टीम को देखकर भी इसे समझा जा सकता है।

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मूर्ख पत्रकार अवनींद्र कमल ने मुस्तकीम को रोजे में चाय पीते हुए बताया और इसे दैनिक जागरण ने छाप दिया!

Wasim Akram Tyagi : दैनिक जागरण का एक पत्रकार अवनीन्द्र कमल कैराना पहुंचा. लौटकर अपने हिसाब से ‘बेहतरीन’ रिपोर्ताज लिखा. शीर्षक है- ”फिलहाल कलेजा थामकर बैठा है कैराना”. यह रिपोर्ताज जागरण के 20 जून के शामली संस्करण में प्रकाशित भी हो गया. अब जरा इन महोदय की लफ्फाजी देखिये…

”दोपहर की चिलचिलाती धूप में पानीपत रोड पर लकड़ी की गुमटी में अपने कुतुबखाने के सामने बैठे मियां मुस्तकीम मुकद्दस रमजान महीने में रोजे से हैं। पलायन प्रकरण को लेकर उनके जेहन में खदबदाहट है। चाय की चुस्कियों में रह-रहकर चिंताएं घुल रही हैं, मुस्तकीम की।”

यह रिपोर्ट पूरी तरह फर्जी प्रतीत हो रही है क्योंकि मुस्तकीम मियां को जागरण संवाददाता ने रोजे की हालत में चाय की चुस्की लेते हुए बता दिया है. कैराना मामले में पलायन की खबरों में उतनी ही सच्चाई है जितनी जागरण के संवाददाता ने मुस्तकीम को रोजे की हालत में चाय की चुस्की लेते हुए बताया है. बात का बतंगड़ बनाकर पेश करने वाले जागरण के पत्रकार इस कदर बेसुध हैं कि उन्हें मालूम ही नहीं कि रोजे में खान पान पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है. सह कहा जाता है कि हिन्दी पत्रकारिता वेंटीलेटर पर है.

सोशल एक्टिविस्ट और पत्रकार वसीम अकरम त्यागी के एफबी वॉल से.

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दैनिक जागरण के मालिक और मैनेजर भगवान से नहीं डरते लेकिन जनता को भगवान के नाम पर डराते हैं, देखें तस्वीरें

ये तस्वीरें दैनिक जागरण लखनऊ कार्यालय के बाहर की हैं. इसे कहते हैं- ”पर उपदेश कुशल बहुतेरे” यानि जो लोग भगवान से ना डरते हुए अपने कर्मियों को उनका मजीठिया वेज बोर्ड वाला कानूनी, न्यायिक और संवैधानिक हक नहीं दे रहे हैं, वे ही लोग जनता को ईश्वर की नजर में होने का भय दिखाकर पेशाब न करने, कूड़ा न फेंकने की अघोषित हिदायत दे रहे हैं.

नोएडा और आसपास की कई यूनिटों में कुल मिलाकर 300 लोगों को जागरण प्रबंधन ने इसलिए बर्खास्त कर रखा है क्योंकि ये लोग अपना कानूनी हक मांग रहे थे, ये लोग मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से अपना एरियर व सेलरी की मांग कर रहे थे. इसी तरह दैनिक जागरण लखनऊ में भी उपर से नीचे तक किसी को मजीठिया वेज बोर्ड का हक दिए बिना उनसे जबरन लिखवा लिया गया कि उन्हें यह वेज बोर्ड नहीं चाहिए और वे अपनी सेलरी से संतुष्ट हैं. ऐसे धतकरम करने वाला जागरण प्रबंधन अगर खुद ईश्वर से नहीं डर रहा तो फिर जनता को ईश्वर के नाम से क्यों डरा रहा. वो कहते हैं न कि असल में ईश्वर और धर्म अमीरों के लिए हथियार है जिसका इस्तेमाल गरीबों को डराने और बांटने के लिए किया जाता है. जागरण के मामले में तो यह बिलकुल सही जान पड़ता है.

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एबीसी आंकड़े : भास्कर ने देश और अमर उजाला ने उत्तर प्रदेश में बजाया दैनिक जागरण का बैंड

एबीसी के आंकड़े अभी आफिसियली जारी नहीं किए गए हैं लेकिन इसकी वेबसाइट पर डाले जा रहे आंकड़े मार्केट में सरकुलेट होने लगे हैं. ऐसा एबीसी के मेंबर अखबारों को एबीसी वेबसाइट पर मिली लागिन सुविधा के कारण संभव हो पा रहा है. भास्कर और अमर उजाला ने आंकड़े निकाल कर यह बता दिया है कि दैनिक जागरण की हर तरफ से बैंड बज रही है.

एबीसी के आंकड़ों के मुताबिक दैनिक भास्कर पूरे देश में प्रसार संख्या के मामले में नंबर एक अखबार बन चुका है. खुद को नंबर एक बताने वाला दैनिक जागरण अब दो नंबरी अखबार हो चुका है. वहीं उत्तर प्रदेश में अमर उजाला नंबर एक अखबार बन चुका है. खासकर दैनिक जागरण के गढ़ कानपुर में अमर उजाला का नंबर एक अखबार बनना बड़ी बात है.

भड़ास के पास अमर उजाला से जुड़े कई लोगों के मैसेज आए, जो इस प्रकार है: Glad to share that Amar Ujala has become No-1 daily newspaper of Kanpur City (as per ABC JD-15)…Congratulations to ‘Team AU’…

एबीसी की आफिसियल वेबसाइट से निकाले गए आंकड़े से पता चलता है कि कानपुर में अमर उजाला ने अपने सेकेंड ब्रांड कांपैक्ट को भी अमर उजाला कांपैक्ट नाम दे दिया है जिसके कारण इसका सरकुलेशन भी अमर उजाला के सरकुलेशन में जोड़ दिया गया है. दरअसल कांपैक्ट अखबार को पिछले वर्ष के मध्य में टैबलायड से ब्राडशीट कर दिया गया और नाम भी अमर उजाला कांपैक्ट कर दिया गया. दाम पहले की तरह कम रखा गया. इस प्रयोग को लोगों ने हाथोंहाथ लिया. उत्तर प्रदेश में अमर उजाला कुल 70 हजार कापी की दैनिक जागरण से बढ़त लेकर नंबर वन बन गया है. ये आंकड़े पिछले साल जुलाई से लेकर दिसंबर तक के हैं जिन्हें रिलीज किया जाना बाकी है.

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दैनिक जागरण के गाजियाबाद कार्यालय में उठापटक, इंदू शेखावत ने भूपेंद्र तालान के खिलाफ थाने में दी तहरीर

गजियाबाद । अधिकारियों की चाटुकारिता और खबरों के एवज में वसूली जैसे आरोपों के कारण चर्चा में रहने वाले दैनिक जागरण के गाजियाबाद कार्यालय में उठापटक और सिर फुटव्व्ल की नौबत आ गयी है। ताजा मामला नगर निगम के आयुक्त अब्दुल समद के पक्ष में प्लांट करके लगायी जा रही खबरों से जुड़ा है। नगर निगम की बीट जागरण संवाददाता भूपेंद्र तालान देखते हैं। काफी समय से तालान पर यह आरोप लग रहे थे कि वह नगर आयुक्त के पक्ष में जागरण में पाजिटीव खबरें लगाा रहे हैं। इस मामले में जागरण के प्रबंधन को शिकायतें भी मिल रही थीं, लेकिन ब्यूरो चीफ राज कौशिक का सानिध्य होने के कारण तलान पर कभी आंच नहीं आयी।

हाल में राज कौशिक की माता जी का देहांत हो गया था, जिसके कारण इंदु शेखावत को कार्यवाहक की भूमिका मिल गयी थी। सूत्रों का कहना है भूपेंद्र तालान ने नगर आयुक्त अब्दुल समद के पक्ष में एक प्लांटेड खबर इंदु शेखावत को सबमिट की तो उस खबर को शेखावत ने फर्जी खबर बताकर होल्ड कर दिया। अगले दिन तलान की नाईट डयूटी थी। इसी का फायदा उठाकर तलान ने इस खबर को  सीधे नोएडा भेज दिया। नगर निगम की रुटीन खबर अक्सर दिन में ही 6 से सात बजे तक सबमिट हो जाती है, लेकिन यह रुटीन की खबर देर रात छपने के लिए नोएडा क्यों भेजी गयी, इस पर नोएडा यूनिट के सम्पादकीय प्रभारी विष्णु त्रिपाठी की भौं तन गयी। त्रिपाठी ने इंदु को फोन करके पूछताछ की तो इंदु ने बताया की इस खबर को तो उन्होंने होल्ड कर दिया था। तलान की नाईट है, इसलिए इस खबर को जानबूझकर भेजा गया है।

विष्णु त्रिपाठी के पास इस प्रकार की प्लांटेड खबरें छापे जाने की शिकायतें तलान के खिलाफ पहले भी मिल रही थीं। पहले जीडीए की बीट भी तलान के पास थी। वसूली की शिकायत मिलने के बाद जीडीए की बीट से तलान को हटा दिया गया था। इस बार पुख्ता सबूत मिलने के बाद विष्णु त्रिपाठी ने भूपेंद्र तलान को नोएडा बुलाकर सोमवार से नोएडा कार्यालय में तबादला किए जाने का आदेश थमा दिया। तबादले के इस आदेश के बाद भूपेंद्र तलान बौखला गया और सीघे अपने मोबाईल से इंदु शेखावत को जान से मारने और बीवी बच्चों के प्रति अश्लील कमेंट करने लगा।

इस काल के बाद इंदु ने इलाकाई थाना में तलान के खिलाफ तहरीर लिखकर दे दी। इंदु ने अपने साथ किसी अनहोनी की आशंका व्यक्त की है। सू़त्रों का कहना है नगर निगम आयुक्त की पाजीटिव खबर छापने के पीछे ब्यूरो चीफ के अपने स्वार्थ हैं। राज कौशिक का सगा भाई रवि प्रकाश शर्मा नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में लिपिक है। निगम का यह मलाईदार विभाग माना जाता है। रवि की तैनाती पहले पेंशन में थी, बाद में नगर निगम प्रशासन की चाटुकारिता वाली खबरों के जरिये रवि को यह विभाग दिलवाया गया। यही नहीं, रवि की नियुक्ति पहले नगर निगम में पम्प आपरेटर के रूप में हुयी थी।

कायदे कानूनों को ताक पर रखकर यह प्रमोशन किया गया। अमर उजाला से राज कौशिक इसी प्रकार की शिकायतों के बाद हटाया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि नगर निगम में सुदर्शन एडवरटाइजिंग नामक जो एड एजेंसी काम करती है, इस एजेंसी को राज कौशिक का सगा भतीजा प्रमोद उर्फ गोल्डी चलाता है। कायदे कानूनों को ताक पर रखकर केवल इस एजेंसी के माध्यम से ही सारे विज्ञापन जारी कराए जाते हैं। चर्चा है कि बहुत जल्द दैनिक जागरण गाजियाबाद में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया जा सकता है। राज कौशिक से पहले अशोक ओझा और तोषिक कर्दम की जोड़ी को इन्हीं सब वजहों के चलते हटाया गया था।

गाजियाबाद के एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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गलत खबर छपने से नाराज गाजीपुर के वकीलों ने दैनिक जागरण अखबार फूंका (देखें तस्वीरें)

गाजीपुर : जिले में आज सुबह से वकीलों ने दैनिक जागरण अखबार के खिलाफ भांति भांति तरीके से गुस्सा निकाला. कल 26 अप्रैल को पेशी पर आये एक अपराधी के उपर गोली मारने की घटना के बाद अधिवक्ताओं ने गोली मारने वाले अपराधियों को पकड़ने की कोशिश की. वहां मौजूद पुलिस कर्मियों की निष्क्रियता पर पुलिस व अधिवक्ताओं में झड़प भी हो गयी. कहा जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम और खबर को निष्पक्षता से न प्रकाशित कर दैनिक जागरण ने एकतरफा ट्रीटमेंट दिया. दैनिक जागरण की खबर में कहा गया है कि अधिवक्ताओं ने अपराधी को पकड़ने की कोई कोशिश नहीं बल्कि अपराधियों को भागने में मदद किया.

एकतरफा अधिवक्ताओं के खिलाफ खबर छापने पर आज आक्रोधित अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय जाकर दैनिक जागरण अखबार की पत्रकारिता पर आक्रोश प्रकट किया. वकीलों ने दैनिक जागरण गाजीपुर के खिलाफ मानहानि का नोटिस जारी करने की तैयारी कर ली है. पूरे मामले से संबंधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के अनुपस्थिति में अपर जिलाधिकारी आनंद मिश्रा को सौंपा और तीन दिन के अन्दर जवाब न देने पर मानहानि का मुकदमा दायर करने का ऐलान किया. बाद में वकीलों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय गाजीपुर के सामने दैनिक जागरण की प्रतियां फूंक कर अपना आक्रोश प्रकट किया.

इस पूरे मामले को लेकर शहर में तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है. दैनिक जागरण ग़ाज़ीपुर द्वारा गलत न्यूज़ देने के कारण वकीलों की तरफ से स्पष्टीकरण हेतु जागरण को तीन दिन का टाइम दिए जाने के बाद माना जा रहा है कि जागरण प्रबंधन एक स्पष्टीकरण प्रकाशित कर पूरे मामले को रफा दफा करने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है क्योंकि किसी भी जिले में कोई भी अखबार वकीलों से पंगा लेकर लंबे समय तक नहीं टिक सकता. एसपी और डीएम को ज्ञापन देकर दैनिक जागरण अख़बार का पुतला फूंकने की खबर को वकीलों ने सोशल मीडिया और ह्वाट्सएप के जरिए अपने अपने परिचितों को भेजा ताकि पूरे मामले में जागरण पर दबाव बनाया जा सके. एडवोकेट अयाज अहमद ने कहा कि जागरण का कृत्य निंदनीय है. हम सभी ऐसी पत्रकारिता की भर्त्सना करते हैं जो सिर्फ एकतरफा है.

वकीलों के विरोध प्रदर्शन से संबंधित वीडियो और अन्य तस्वीरें देखने के लिए अगले पेज पर जाने हेतु नीचे क्लिक करें…

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जागरण के आजादी वाले कार्यक्रम में विनीत कुमार क्या जागरणकर्मियों के शोषण की बात रख पाएंगे?

Yashwant Singh : आज मंच जागरण का, परीक्षा विनीत कुमार की… ‘मीडिया मंडी’ किताब के लेखक विनीत कुमार मीडिया विमर्श में उभरते नाम हैं। विनीत बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। मीडिया संस्थानों के दोहरे मानदंडों को बेनकाब करने में विनीत कोई उदारता नहीं बरतते। सामाजिक मुद्दों पर भी विनीत की लेखनी ईमानदार और धारदार रही है। विनीत 4 अप्रैल यानि आज रोहतक में जागरण समूह की ओर से आयोजित किए जा रहे संवाद कार्यक्रम को मॉडरेट करने जा रहे हैं। कार्यक्रम ‘नारी से जुड़े आज़ादी और दायरा’ विषय पर है। इसका आयोजन रोहतक के झज्जर रोड पर स्थिति वैश्य महिला महाविद्यालय पर सुबह 11.30 बजे से है। कार्यक्रम की वक्ता शतरंज चैंपियन और लेखिका अनुराधा बेनिवाल हैं। विनीत ने अपने फेसबुक वॉल पर इस कार्यक्रम की बाकायदा पोस्टर के साथ जानकारी दी है।

विनीत ने अपनी इस पोस्ट के साथ लिखा-

“हम आपसे बातचीत करने रोहतक, हरियाणा आ रहे हैं। पिछले कुछ महीने में आजादी के इतने अलग-अलग मायने पैदा कर दिए गए हैं कि वे गुलामी के पर्याय बनकर हमारे सामने है। जमीनी स्तर पर जिस आजादी को हासिल करने की कोशिश की जा रही है, उसे परंपरा, राष्ट्रहित और संस्कार के नाम पर उन तहखानों में कैद करने के धत्तकर्म किए जा रहे हैं कि हमारे जेहन में बस एक ही सवाल बाकी रह जाता है। आजाद हुए तो क्या और गुलाम बने रहे तो क्या नुकसान? और इन सबके बीच सालों से इज़्ज़त की ख़ातिर, खोल में छिपी दास्ताँ तो है ही। इधर आजादी रोजमर्रा की जिंदगी और आसपास की दुनिया में बची हो चाहे नहीं, एक के बाद एक विज्ञापनों में चेंपने का काम जोरों पर है। पानी बिल से आजादी (दिल्ली जलबोर्ड), एयरपोर्ट पर लाइन लगने से आजादी (यात्रा डॉट कॉम), गीलेपन से आजादी (सेनेटरी नैपकिन के लगभग सारे विज्ञापन)…जमीनी स्तर पर आाजादी की आवाज बुलंद करनेवाले आंदोलनों से आइडिया चुराकर ये सारे विज्ञापनों ने अपनी कॉपी भर ली है। लेकिन आजादी की मार्केटिंग और मैनेजमेंट की जाने की कवायदों के बीच हमारी-आपकी दुनिया कितनी आजाद है, हम इन सारे बेसिक मुद्दों पर बात करेंगे। वैसे तो बातचीत का सिरा होगा अनुराधा बेनीवाल की किताब ‘आजादी मेरा ब्रांड’ लेकिन हम इसे विमर्श का जनाना डब्बा बनाने के बजाय, दूसरे उन कई मसलों पर बातचीत करेंगे जिनमे आपकी दिलचस्पी होगी। हम तो बस मौजूद होंगे, विमर्श के वजूद में तो आखिर तक आप ही बने रहेंगे। तो मिलते हैं कल।“

विनीत ने इसी पोस्ट के 4 घंटे बाद अपने फेसबुक वॉल पर एक और पोस्ट डाली। इस पोस्ट में विनीत कुछ कुछ सफ़ाई देने वाले अंदाज़ में दिखे। विनीत को आखिर क्यों खुद को जस्टीफाई करने की ज़रूरत पड़ी। क्या ये ‘अपराधबोध’ था कि उन्होंने जागरण ग्रुप के कार्यक्रम का मॉडरेटर बनना स्वीकार किया। क्या उन्हें डर था कि कल को इस बात को लेकर उन पर सवाल उठाए जा सकते हैं। बहरहाल विनीत ने पहले ही डिफेंस मुद्रा में आना बेहतर समझा।

पढ़िए विनीत ने अपनी इस दूसरी पोस्ट में क्या लिखा-

“कल को मुझे पाञ्चजन्य, सामना, रामसंदेश, संदेश कमल जैसी पत्रिकाएं, अखबार और सुदर्शन जैसे चैनल भी अपनी बात रखने के लिए बुलाते हैं और मेरे पास समय होगा, मेरी सुविधा के हिसाब से इंतजाम होगा तब मैं बोलने जरूर जाऊंगा। इन सुविधाओं में घर से लाना-वापस छोड़ना, रास्तेभर पानी, फ्रूट्स, वॉशरूम का इंतजाम, राह खर्च और प्रोत्साहन राशि शामिल है। मैं मीडिया और साहित्य का छात्र हूं। मेरा एक ही धर्म है संवादधर्मिता। हम हर हाल में अपनी बात रखना चाहते हैं और कोई भी मंच मुझे अपने तरीके से बोलने देगा, सुरक्षित ले जाएगा और वापस घर छोड़ देगा तो मैं इस धर्म के साथ हूं। रही बात प्रतिबद्धता की तो वो मेरे भीतर गहरे रूप में मौजूद है, रहेगी। हमने इस मंच पर जाना है, उस मंच पर नहीं जाना। ये डिब्बाबंदी मुझे प्रतिबद्ध कम, मानसिक रोगी ज्यादा बना देगा। ये एक स्वस्थ समाज के लिए खतरनाक और नए किस्म की छुआछूत की बीमारी है और मुझे मेरे शुभचिंतकों ने कम से कम लोड लेकर जीने की सलाह दी है। मैं ऐसी बीमारी से दूर रहना चाहता हूं। हम कोई बुद्धिजीवी नहीं है, किसी पार्टी के कार्यकर्ता नहीं हैं। हम नॉलेज प्रोड्यसूर हैं और प्रोड्यूस करने के साधन जहां मिलेंगे, वहां करूंगा। मैंने अपने इस छोटे से जीवन में पार्टी, संस्थान, व्यक्ति के प्रति प्रतिबद्धता की होर्डिंग लगाकर, विचार और मौके पर फैसले के स्तर पर एक से एक धुरंधर लोगों को मैनेज होते, जनतंत्र विरोधी होते देखा है। ऐसे में मुझे बदनाम होकर, शक किए जाने पर भी अपने से अलग, विपरीत और असहमत लोगों, मंचों के बीच बोलना पसंद है।“

विनीत, आपने ये दोनों पोस्ट वैसी ही अच्छी और धाराप्रवाह लिखीं जैसे कि आप हमेशा लिखते रहे हैं। नहीं कह सकते कि आपने दूसरी पोस्ट सफ़ाई वाले अंदाज़ में क्यों लिखी। लेकिन इसमें आपने लिखा कि आप इस कार्यक्रम में हमारी-आपकी दुनिया कितनी आजाद है, उन सारे मुद्दों पर बातचीत करेंगे। आपने ये भी अच्छा कहा कि आप इस विमर्श का जनाना डब्बा बनाने के बजाय, दूसरे उन कई मसलों पर बातचीत करेंगे जिनमे आपकी दिलचस्पी होगी। विनीत ने दूसरी पोस्ट में ये भी कहा कि विपरीत और असहमत लोगों, मंचों के बीच बोलना पसंद है।

विनीत के मुताबिक जिन मसलों पर सबकी दिलचस्पी होगी, उन सभी पर विमर्श करेंगे। विनीत मेरी दिलचस्पी इस कार्यक्रम के आयोजक ‘जागरण ग्रुप’ से जुड़े कुछ मसलों पर हैं। और ये मसले ‘आजादी’ से ही जुड़े हैं। लेकिन इन मसलों पर आऊं, इससे पहले एक बात बताना चाहता हूं। पत्रकारिता के पुरोधा दिवंगत प्रभाष जोशी जी ने एक बार अरविंद केजरीवाल से अपनी नाराज़गी जताई थी। दरअसल प्रभाष जोशी ने आरटीआई यानी सूचना के अधिकार संबंधी घोषित पुरस्कार की जूरी में इसी ग्रुप के संपादक-मालिक के होने पर ऐतराज़ जताया था। यही ग्रुप रोहतक में भी संवाद कार्यक्रम करने जा रहा है। विनीत आपने अपनी पोस्ट में लिखा है कि आप किसी भी मंच पर जाकर बोलेंगे बशर्ते कि आपको अपने तरीके से बोलने दिया जाए। विनीत इस कार्यक्रम के मॉडरेटर हैं, इसमें कोई आपत्ति नहीं है। दिलचस्पी इस बात पर है कि विनीत इस कार्यक्रम में क्या बोलते हैं। क्या वे अपने मेज़बान आयोजक की विसंगतियों और खामियों पर सवाल उठा सकेंगे।

क्या विनीत कह सकेंगे कि आजादी पर विमर्श तभी सार्थक होगा जब जागरण ग्रुप अपने कर्मचारियों को भी ईमानदारी से उनके हक़ देगा। क्या उनके साथ गुलामों जैसा व्यवहार बंद कर सम्मान के साथ कार्य करने का अधिकार दिया जाएगा। क्या उचित मेहनताने के लिए आवाज़ उठाने वाले कर्मचारियों पर उत्पीड़न की कार्रवाई बंद की जाएगी। आईबीएन-सीएनएन से करीब 320 कर्मचारियों की छंटनी के ख़िलाफ़ जिस तरह आवाज़ उठाई गई थी, क्या जागरण के संवाद मंच से ही उसके कर्मचारियों के हक़ में आवाज़ उठाई जा सकेगी। विनीत इस पर क्या रुख अपनाते हैं, ये देखना दिलचस्प होगा।

विनीत आपने कहा कि ये कार्यक्रम मूलत: जनाना डिब्बे से जुड़े मसलों पर है। विषय भी है नारी से जुड़ा आज़ादी और दायरा। यहां भी जागरण ग्रुप से जुड़े दो मसले विचार के लिए आपकी पेश-ए-नज़र हैं। विनीत इस कार्यक्रम में विमर्श से पहले आगरा की समाज सेविका प्रतिमा भार्गव की कहानी ज़रूर जान जाइएगा। जागरण ग्रुप के ही अखबार आई-नेक्स्ट के दुर्व्यवहार, मानहानि, प्रताड़ना की कहानी सुनाते सुनाते प्रतिमा दिल्ली प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए रो पड़ीं थीं। मसालेदार खबर परोसने के चक्कर में इस समाजसेविका के चाल चलन चरित्र पर ऐसी फर्जी मनगढ़ंत खबर छाप दी कि इनका जीना मुश्किल हो गया। घर परिवार समाज में इनकी इज्जत दाव पर लग गई।

इसी ग्रुप से जुड़ा दूसरा किस्सा तो हाल ही का है। बुलंदशहर में महिला आईएएस बी. चंद्रकला के खिलाफ लगातार कुत्सित अभियान चलाने वाले दैनिक जागरण से नाराज होकर लोगों ने अखबार और इसके पदाधिकारियों का पुतला भी फूंका था। जागरण की इस मुहिम के शुरू होने का कारण जागरण के द्वारा उस आरोपी के साथ खड़े होकर उसकी पैरवी करना था जिसने डीएम के आफिस में घुसकर उनकी जबरन सेल्फी ली थी। डीएम तो छोड़िए क्या कोई किसी आम महिला के साथ भी बिना उसकी इजाज़त लिए सेल्फी लेने गुस्ताख़ी कर सकता है। क्या ये किसी महिला की आज़ादी में अतिक्रमण नहीं था। फिर ऐसे शख्स की पैरवी किस आज़ादी के अधिकार से। हो सकें तो विनीत इन मुद्दों पर आज के कार्यक्रम में ज़रूर बोलना। आपने खुद ही कहा है कि आपको अपने हिसाब से बोलने दिया जाए तो आप किसी भी मंच पर जाकर बोल सकते हैं। अब मंच जागरण का है…और बोलना आपको है…आप क्या बोलते हैं और जागरण क्या छापता है, इसी पर हम सब की नज़रें हैं।

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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दैनिक जागरण ने इलाहाबाद के पूर्व मेयर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह को जीते जी मार दिया

दैनिक जागरण महान अखबार है. यहां कभी मायावती के लिए गंदी गंदी गालियां छप जाया करती हैं तो कभी जिंदा लोगों को मरा घोषित कर दिया जाता है. ताजा मामला इलाहाबाद एडिशन का है. कल दैनिक जागरण इलाहाबाद में पेज नंबर नौ पर एक छोटी सी खबर छपी है जिसमें बताया गया है कि पूर्व मेयर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह के निधन के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष निर्मल खत्री ने उनके घर पहुंचे और उन्होंने वहां शोक संतप्त परिवार को सांत्वाना दी.

अखबार में यह खबर पढ़कर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह के होश उड़ गए. लोग उनके मरने की खबर जब पढ़े तो उनके घर पहुंच गए लेकिन हवां देखा कि चौधरी साहब तो जिंदा हैं और जागरण को पानी पी पी कर कोस रहे हैं. पता चला कि चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह की चाची जी का तेरह दिनों पहले निधन हुआ था और तेरहवीं में शामिल होने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष निर्मल खत्री आए थे. इस संबंध में कांग्रेसियों ने प्रेस रिलीज भेजी कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष निर्मल खत्री ने पूर्व मेयर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह की चाची जी के निधन पर तेरहवीं में शामिल होने उनके घर पहुंचे और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी.

लेकिन इस प्रेस रिलीज को विद्वान दैनिक जागरण वालों ने कुछ ऐसा एडिट किया को चाची को गायब करके डायरेक्ट पूर्व मेयर साहब को ही मार डाला. कांग्रेस बेचारे हाय मार डाला हाय मार डाला कह कर भले अपना सिर धुनते रहें लेकिन दैनिक जागरण वाले तो अपना कर्म कर के आगे बढ़ चले हैं, कोई जिए मरे उनकी बला से.

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दैनिक जागरण की कुत्सित मानसिकता पर बुलंदशहर के सफाईकर्मियों का प्रहार, आफिस को कचरे से पाटा (देखें वीडियो)

बुलंदशहर में डीएम संग जबरन सेल्फी खिचाने वाले आरोपी की वकालत करने वाले दैनिक जागरण को अब समाज के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 5 दिनों से महिला विरोधी मानसिकता से की जा रही पत्रकारिता पर जिले के सफाईकर्मियों ने प्रहार कर दिया है। महिला सम्मान की इज्जत उतारने वाले दैनिक जागरण का आफिस कूड़े से पाट दिया गया है और सफाईकर्मियों ने ऐलान किया है कि अगर अपनी बदतमीजियां जागरण ने बंद नही की तो पूरे शहर का कचरा जागरण के आफिस पर डाला जायेगा।

आज सुबह दैनिक जागरण के चॉदपुर क्रासिंग पर स्थित आफिस के बाहर कई ट्राली कचरा भरा हुआ मिला। आफिस के बाहर के रास्ते में इतनी भी गुन्जाइश नही बची थी कि कोई दूसरी ओर जा सके। दैनिक जागरण के पत्रकारों ने अधिकारियों को जब इस बाबत बताया तो नगरपालिका के सफाईकर्मियों ने वहाँ से कूड़ा हटाने से मना कर दिया। साथ ही अफसरों को चेतावनी दी है कि पत्रकारिता की आड़ में छुपे ऐसी मानसिकता वाले अपराधियों का वह खुलकर विरोध करेंगे।

आज दोपहर को सफाईकर्मी इस बाबत सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपेगे। ज्ञापन में यह अल्टीमेटम भी जारी किया जा रहा है कि अगर दैनिक जागरण के पत्रकारों ने अपनी दिमागी सोच नहीं बदली तो अंजाम और बुरा होगा। सफाईकर्मियों ने शहर में हड़ताल करने और पूरे शहर का कूड़ा जागरण के आफिस में भरने की धमकी भी दी है।

ज्ञातव्य है कि पिछले कई दिनों से सेल्फी प्रकरण में दैनिक जागरण द्वारा सामाजिक सरोकारों को दरकिनार करके महिला सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले आरोपी के पक्ष में पत्रकारिता की जा रही है। जागरण की इस हरकत का पूरे समाज में विरोध हो रहा है। पेड न्यूज का सबसे बड़ा सौदागर दैनिक जागरण वैसे तो बड़े नेताओं और बड़े अफसरों के तलवे चाटता है लेकिन बुलंदशहर की महिला डीएम को कमजोर समझकर जो पीत पत्रकारिता शुरू की, उसका खामियाजा उसे अब खुद भुगतना पड़ रहा है।

दैनिक जागरण के बुलंदशहर आफिस को कूड़े से पाटे जाने का वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: https://youtu.be/kYVgY4D7qzc


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जबरन सेल्फी लेने वाले मनचले को जेल भिजवाने वाली डीएम चंद्रकला के पीछे क्यों पड़ा है दैनिक जागरण?

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संजय गुप्ता यानि स्वतंत्रता का दुश्मन

Shrikant Singh : देश के इस दुश्‍मन को अच्‍छी तरह पहचान लें… दोस्‍तो, देश के दुश्‍मनों से लड़ने से कहीं ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण उन्‍हें पहचानना है। सीमापार के दुश्‍मनों से कहीं अधिक खतरनाक दुश्‍मन देश के अंदर हैं। आप उन्‍हें पहचान गए तो समझिए हमारी जीत पक्‍की। हम आपका ध्‍यान देश के एक ऐसे दुश्‍मन की ओर दिलाना चाहते हैं, जो पुलिस, प्रशासन, देश की न्‍यायपालिका और यहां तक कि देश की व्‍यवस्‍था तक को प्रभावित कर अपनी मुनाफाखोरी के जरिये इस देश को लूट रहा है। आप पहचान गए होंगे। हम दैनिक जागरण प्रबंधन की बात कर रहे हैं। आज 26 जनवरी है। गणतंत्र दिवस। इस दिन एक वाकया याद आ रहा है।

पहले दैनिक जागरण में स्‍वतंत्रता दिवस को सेलीब्रेट किया जाता था, लेकिन अब 26 जनवरी को सेलीब्रेट किया जाता है। इसके पीछे जन्‍मजात महान पत्रकार संजय गुप्‍ता ने तर्क दिया था कि अब इस देश को स्‍वतंत्रता की जरूरत नहीं है। अब जरूरत है तो नियमों पर चलने की। चूंकि 26 जनवरी को भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया था, इसलिए उन्‍होंने इसे नियमों का दिवस मानकर सेलीब्रेट कराना शुरू करा दिया। अब इंसान हर चीज को अपने फायदे के लिए किस प्रकार परिभाषित कर लेता है, उसका उदाहरण संजय गुप्‍ता से बड़ा और कौन हो सकता है। उन्‍होंने स्‍वतंत्रता का अर्थ अपने कर्मचारियों की स्‍वतंत्रता से लगाया और अपने मैनेजर, संपादक से लेकर चपरासी तक की स्‍वतंत्रता छीननी शुरू कर दी।

नियमों का अर्थ उनकी नजर में संविधान के नियम नहीं, बल्कि दैनिक जागरण प्रबंधन की ओर से थोपे जाने वाले संविधान विरोधी नियम थे। अब अपने चापलूसों के साथ बैठकर वह जो नियम बना देते हैं, उसका पालन करना दैनिक जागरण परिवार के हर सदस्‍य की मजबूरी बन जाता है। जो इस मजबूरी को ढोने से तोबा करने को मजबूर हो जाता है, उसे बाहर का रास्‍ता दिखा दिया जाता है। इसके भुक्‍तभोगी दैनिक जागरण के तमाम कर्मचारी हैं, जिनमें से सैकड़ों संघर्ष के लिए सड़क पर उतर आए हैं। राहत की बात यह है कि कल उत्‍तर प्रदेश सरकार ने एक हेल्‍पलाइन जारी की, जहां शिकायत कर आप दैनिक जागरण प्रबंधन को यह बता सकते हैं कि साहब नियम यह नहीं यह है। मेरी इस देश के पाठकों, विज्ञापनदाताओं और अभिकर्ताओं से गुजारिश है कि देश के इस दुश्‍मन को जितनी जल्‍दी हो सके सबक सिखाएं। नहीं तो बहुत देर हो जाएगी और यह मुनाफाखोर इस देश को पूरी तरह से लूट चुका होगा। अपना खयाल रखें। आज का दिन आपके लिए शुभ हो। गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।

दैनिक जागरण में मुख्य उपसंपादक पद पर कार्यरत क्रांतिकारी पत्रकार श्रीकांत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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दैनिक जागरण चंदौली में गलत खबर छपने पर संपादक को नोटिस जारी

वर्ष 2012 के अक्टूबर व नवम्बर माह में दैनिक जागरण के चंदौली संस्करण में मुगलसराय से प्रकाशित हुये दो भ्रामक समाचारों की शिकायत को संज्ञान में लेने के बाद भारतीय प्रेस परिषद ने वादी व जागरण के वाराणसी के सम्पादक को सुनवाई के लिये नोटिस जारी किया है। सुनवाई वर्ष 2016 के 5 जनवरी को सुनिश्चित है। विदित हो कि वर्ष 2012 के अक्टूबर माह के 19 तारीख को जागरण के पृष्ठ संख्या 02 पर ”बिजली कटौती के विरोध में क्रमिक अनशन” नामक शीर्षक से समाचार प्रकाशित हुआ था जो पूरी तरह गलत था। वादी राजीव कुमार ने स्पष्ट किया था कि दिनांक 17 अक्टूबर को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल किया जायेगा और किया भी गया था। इसका समाचार लगभग सभी समाचार पत्रों ने प्रमुखता से 18 अक्टूबर के अंक में प्रकाशित किया था, जागरण को छोड़कर। उसी समाचार को दैनिक जागरण ने 19 अक्टूबर को क्रमिक अनशन के रूप में दिखाया।

नवम्बर माह में भी 06 नवम्बर के दैनिक जागरण के पृष्ठ संख्या 3 पर ”एक्सईएन ने समाप्त कराया अनशन” नामक शीर्षक से प्रकाशित समाचार में भी आपत्ति की थी। उक्त समताचार में आन्दोलन किन मुद्दों पर हुआ और किस विभाग के एक्सईएन ने समाप्त करवाया, यह न प्रकाशित करके पूरी खबर को चार लाईन में समेट दिया गया था। जनहित के लिये किये गये आन्दोलन के समाचार के साथ खिलवाड़ के बाबत जब जागरण के स्थानीय प्रतिनिधि विनय वर्मा से पूछा गया था तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया था कि आपके पास बीजे एमजे का प्रमाणपत्र नहीं है इसलिये अपको पूछने का हक नहीं है। इसकी शिकायत वादी ने प्रेस काउंसिल आफ इंडिया को की थी।

इसके बाद भारतीय प्रेस परिषद ने मामले को गम्भीरता से लेते हुये पत्रांक मिसिल संख्या 14/600/12-13 पीसीआई के तहत परिवाद दर्ज कर कार्यवाही के लिये समाचार पत्र की प्रति मांगी थी जिसे वादी ने मय प्रपत्र बजरिये डाक भेज दिया था। भारतीय प्रेस परिषद ने पुनः दिनांक 16 दिसम्बर 2015 को जारी किये गये पत्र के माध्यम से वादी राजीव कुमार व प्रतिवादी दैनिक जागरण के सम्पादक को 2016 के 5 जनवरी को दिल्ली के प्रेस कौसिल कार्यलय के सूचना भवन में उपस्थित होने के लिये नोटिस जारी किया है।

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मोबाइल टावर्स लगाने का लालच और विज्ञापन के भूखे लालची अखबार… पढ़िए एक युवा ने क्यों कर लिया सुसाइड

Vinod Sirohi : जरूर शेयर करें —मोबाइल टावर्स लगाने का लालच और विज्ञापन के भूखे लालची अखबार — आप पर कोई बंदिश नहीं है आप इस मैसेज को बिना पढ़े डिलीट कर सकते हैं। अगर आप पढ़ना चाहें तो पूरा पढ़ें और पढ़ने के बाद 5 लोगों को जरूर भेजें।

मेरा नाम राहुल है। मैं हरियाणा के सोनीपत जिले के गोहाना का रहने वाला हूँ। आप भी मेरी तरह इंसान हैं लेकिन आप में और मुझमें फर्क ये है कि आप जिन्दा हैं और मैंने 19 अगस्त, 2015 को रेल के नीचे कटकर आत्महत्या कर ली।

चौकिये मत, नीचे पढ़िये।

मेरा परिवार गरीबी से जूझ रहा था। एक दिन मैंने एक हिन्दी के अख़बार में (अपने आप को हिन्दी जगत का प्रमुख अखबार बताने वाला ) मोबाईल टावर लगाने सम्बन्धी विज्ञापन पढ़ा। इसमें 45 लाख एडवांस, 50 हजार रूपये महीना किराया तथा 20 हजार रूपये प्रतिमाह की सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी देने की बात कही थी। मैनें दिये गये नम्बर पर फोन किया तो उन्होंने हमारे प्लाट का पता ले लिया जहाँ मैं टावर लगवाना चाहता था। अगले दिन उन्होंने मुझे फोन करके मुबारकबाद दी और कहा कि मेरा प्लाट टावर लगने के लिए पास हो गया है। उन्होंने मुझे रजिस्ट्रेशन फ़ीस के तौर पर 1550 रूपये स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाता 20266209852 ब्रांच लाजपत नगर नई दिल्ली में डालने के लिए कहा। मैंने 1550 रूपये डाल दिये तो उन्होंने मुझे रिलायंस कम्पनी का ऑफर लेटर तथा एक लेटर सूचना और प्रोद्द्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार का मेरी ईमेल पर भेजा जिसमें 27510 रूपये सरकारी टैक्स जमा करवाने की बात कही गई थी।

मैंने 27510 रूपये भी जमा करवा दिये तो उन्होंने मुझसे 13500 रूपये डिमांड ड्राफ्ट चार्जेज के तौर पर जमा करवाने के लिए कहा। मैंने ये रूपये भी जमा करवा दिए तो उन्होंने मेरे फोन उठाने बंद कर दिये। जो पैसे मैंने इस खाते में जमा करवाये वह पैसे मेरी बहन की शादी के लिए रखे थे। मैं अपने परिवार को 45 लाख रूपये का सरप्राइज देना चाहता था, लेकिन जब मुझे ठगी का एहसास हुआ तो मैं अपने परिवार को मुहँ दिखाने के लायक नहीं बचा और मैंने रेल के नीचे कटकर आत्महत्या कर ली।

मेरी असमय मौत के बाद मेरी रूह धरती पर ही भटक रही है और लोगों को ठगी के इस जंजाल के प्रति जागरूक कर रही है। मेरे दावे की सत्यता के लिये आप ऊपर दिये गये बैंक खाते की 11 अगस्त से 18 अगस्त की स्टेटमेंट देख सकते हैं। ऐसे लगभग 300 फ्रॉड ग्रुप अख़बारों में फर्जी विज्ञापन देकर भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इनके झांसे में ना आयें। आप 5 लोगों को 2 मिनट में ये सन्देश जरूर भेजें और पार्क, बैठक, घर और दफ्तर के लोगों को मौखिक तौर पर इस ठगी के खेल के बारे में जरूर बतायें। मेरी रूह को शान्ति मिलेगी और आपको आत्मसंतुष्टि।

यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर विनोद सिरोही के फेसबुक वॉल से.

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दैनिक जागरण कर्मियों ने अपने मालिक और संपादक संजय गुप्ता के आवास के बाहर प्रदर्शन कर अपना हक मांगा

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने बुधवार को अखबार के मालिक संजय गुप्ता के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने महारानी बाग से लेकर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी तक जुलूस निकाला और संजय गुप्ता के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बताया कि दैनिक जागरण के मालिक माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं। संजय गुप्ता पर माननीय न्यायालय की अवमानना का मुकदमा चल रहा है। इस दौरान वहां उपस्थित लोगों को दैनिक जागरण की ओर से 350 से अधिक कर्मचारियों को अपना हक़ मांगने पर संस्थान से बाहर करने की भी जानकारी दी गई।

कर्मचारियों का कहना है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर संघर्ष और तेज करेंगे। गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने गुंडागर्दी करते हुए मजीठिया की मांग कर रहे 350 से अधिक कर्मचारियों को निलंबित व बर्खास्त कर दिया है। कर्मचारी न्याय की मांग को लेकर दिल्ली से लेकर नोएडा की सड़कों पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपना हक़ लेकर रहेंगे और मालिकों और उनके चमचों को मेहनतकशों की बद्दुआएं जरूर लगेंगी।

अगली स्लाइड में पढ़ें>> दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने नोएडा में अर्धनग्न होकर किया प्रदर्शन, निकाला जुलूस” नीचे लिखे Next पर क्लिक करें>>

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बदतमीज और क्रूर जागरण प्रबंधन के खिलाफ जाने-माने वकील परमानंद पांडेय ने पीएम मोदी को पत्र भेजा

Shri Narendra Modi
Hon’ble Prime Minister of India
New Delhi

Sub.: Exploitation, victimization and harassment of the Dainik Jagran employees

Hon’ble Pradhan Mantri ji,

We write to you with pain and anguish over the exploitation and victimization of newspaper employees by their proprietors that has crossed all limits. The saddest part of it is that the Governments- Central as well as the States- have become the mute spectators to this sordid state-of-affairs.

We would like to state that as provided in the Working Journalist Act, the Central Government has been appointing the Wage Boards for revising the pays and allowances of newspaper employees from time to time. Right from the enactment of the Working Journalist Act in 1955, the Central Government has constituted six Wage Boards till date. The last Wage Board was setup in the year 2008, which submitted its report on 31st December 2010 but before it could be notified by the then Government, the proprietors of the newspapers challenged it in the Supreme Court. After marathon hearings, the Supreme Court decided the case in the favour of the employees and directed the newspaper proprietors to implement it from 11.11.2011. However, the newspaper owners did not pay any heed to the judgment passed by the Hon’ble Supreme Court. The governments have also done very little to get the Award implemented.

Not finding any way out the employees of different newspapers filed contempt petitions in the Supreme Court. The proprietors of the newspapers instead of obeying the order of the Supreme Court fielded scores of top advocates including Shri Kapil Sibal, Shri Abhishek Manu Singhvi, Shri Salman Khursheed, Shri Dushant R. Dave, Shri Gopal Jain, Shri Venugopal and Shri P.P. Rao etc. who openly declared that the newspaper proprietors were not obliged to implement the Award.
The Hon’ble Court, however, took cognizance of the case and on 28th April 2015 directed all State Governments to file the status of the implementation of the Majithia Award.

What is most shocking for all of us is that the proprietors of Dainik Jagran have been browbeating the employees by showing the proximity with you, the Hon’ble Prime Minister. Owners of this newspaper, known for their notoriety of being the worst exploiters, have been openly saying that they would not honour the labour laws or even the judgement of the Supreme Court. They have been arbitrarily suspending, transferring and terminating the employees. The only fault of the employees is they have been demanding the Majithia Award and for that, they have approached the Hon’ble Supreme Court of India.

It is even more baffling for the newspaper employees, why the Governments – Central as well as States- are keeping silent over it? The employees have met the Central Labour Minister Shri Bandaru Duttatreya and have also appealed to the Chief Minister of Uttar Pradesh to help them in getting the Award implemented but not even a leaf of the governments has moved or turned to help the employees. In the last fifteen days this newspaper have terminated outrightly in clear violation of the labour laws to more than two dozen employees, who have been working at different centres of the newspaper. More than 350 employees have been suspended and dozens have been transferred to far away places without any facilities. The families of the most of the employees are on the verge of the starvation because they have been not getting even their old wages for many months.

Therefore, Respected Pradhan Mantri ji, this is an SOS to you to save the employees and their families otherwise; many of them would be compelled to commit suicide. We request you to prevail upon the owners of the newspapers to implement the Justice Majithia Award.

Looking forward towards you for saving the employees of Dainik Jagran from hunger and starvation,

With warm regards,

Yours faithfully,

Parmanand Pandey
Secretary General – IFWJ

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दैनिक जागरण के क्रूर उत्पीड़न के शिकार होकर अधनंगे हो चुके इन सैकड़ो मीडियाकर्मियों को आपके समर्थन की जरूरत है

Yashwant Singh : अदभुत वक्त है ये. अदभुत सरकार है ये. ताकतवर लोगों, कट्टर लोगों, पूंजीवादी लोगों, बाहुबली लोगों का राज चल रहा है. सरकार जनता के मसलों पर चुप है. महंगाई पर चुप है, उत्पीड़न पर चुप है, शोषण पर चुप है. बस केवल जो अनर्गल मुद्दे हैं, उनको हवा दी जा रही है, अनर्गल मुद्दों के आधार पर जनता का बंटवारा किया जा रहा है. मोदी से मीडिया वालों को बहुत उम्मीदें थीं. आखिर कांग्रसी अराजकता का दौर जो खत्म हुआ था. लेकिन मोदी ने मीडिया वालों को यूं निराश किया और अराजकता की ऐसी कहानी लिखनी शुरू की है कि सब सकते में है.

ऐसे में वेज बोर्ड लागू कराने के लिए मीडिया वालों को अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है. अपना हक मांगने पर निलंबन की कार्यवाही झेल रहे दैनिक जागरण के सैकड़ों मीडियाकर्मियों के पक्ष में कोई आवाज नहीं उठ रही है. आखिर मीडिया वालों के उत्पीड़न शोषण की कहानी कौन छापेगा, कौन दिखाएगा क्योंकि सारे मीडिया मालिक अपने इंप्लाइज के शोषण उत्पीड़न के मसले पर एक जो हैं. ऐसे में हमको आपको इन्हें सपोर्ट करना होगा, इनकी आवाज में अपनी आवाज मिलाकर इनकी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाना होगा. अपने व्यस्त समय में से कुछ वक्त निकाल कर इन आंदोलनकारी मीडियाकर्मियों को सपोर्ट करें. ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: Protest

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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जागरण कर्मियों का आंदोलन जारी, दूसरे दिन भी बैनर-पोस्टर के साथ बैठे धरने पर (देखें तस्वीर)

दैनिक जागरण धर्मशाला यूनिट के आंदोलनकारी जागरणकर्मियों ने दूसरे दिन भी धरना प्रदर्शन जारी रखा. मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी देने, इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्गत आदेशों को मानने, कर्मचारियों को बहाल करने संबंधी कई मांगों को लेकर दैनिक जागरण धर्मशाला के मीडियाकर्मी इन दिनों हड़ताल पर चल रहे हैं. यह हड़ताल नोएडा से लेकर हिसार, पानीपत, जम्मू, जालंधर, धर्मशाला आदि जगहों पर है. प्रबंधन जैसे तैसे अखबार छाप पा रहा है.

मीडिया का मामला होने के कारण इस बड़े आंदोलन को न कोई न्यूज चैनल दिखा रहा है और न ही कोई अखबार इस बारे में छाप रहा है. इसे ही कहते हैं चिराग तले अंधेरा. दूसरों की पीड़ा के बारे में लिखने बताने वाले मीडियाकर्मी जब खुद की पीड़ा को लेकर आंदोलनरत हैं तो अब उन पर किसी की कलम नहीं चल रही और न ही कोई इस बारे में चर्चा कर रहा है. यहां तक कि मीडिया मालिकों के दबाव में पीएम, सीएम तक हैं जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लागू नहीं करवा पा रहे हैं. पूरे प्रकरण को समझने जानने के लिए नीचे दिए गए शीर्षकों पर क्लिक करें>>

हक के लिए आवाज उठाने वाले 18 जागरण कर्मी सस्पेंड, प्रेस के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू

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धर्मशाला जिला मुख्यालय में दैनिक जागरण के खिलाफ निकला जुलूस, लगे नारे (देखें तस्वीरें)

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दैनिक जागरण से सैकड़ों लोग इसलिए सस्पेंड कर दिए गए क्योंकि वे प्रबंधन से सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानने का आग्रह कर रहे हैं

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जागरण प्रबंधन ने धर्मशाला यूनिट के 12 मीडियाकर्मियों को किया सस्पेंड

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अभी भी कुछ कुत्‍ते चाट रहे हैं जागरण मैनेजमेंट के तलवे, सुनिए विष्णु त्रिपाठी के श्रीमुख से

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जागरण प्रबंधन के खिलाफ दैनिक जागरण लुधियाना के दर्जनों कर्मियों ने किया प्रदर्शन (देखें तस्वीरें)

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धर्मशाला जिला मुख्यालय में दैनिक जागरण के खिलाफ निकला जुलूस, लगे नारे (देखें तस्वीरें)

धर्मशाला, 15 अक्तूबर। मजीठिया वेज बोर्ड के तहत वेतनमान व एरियर की मांग करने पर दैनिक जागरण से सस्पेंड किए गए धर्मशाला यूनिट के कर्मियों ने आज जिला मुख्यालय में रैली निकाल कर दैनिक जागरण के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जगरण प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाने पर सस्पेंड किए गए 18 कर्मियों ने पहले दैनिक जागरण की पठानकोट-मनाली एनएच किनारे शाहपुर के बनोई में स्थित प्रेस के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू किया था। वीरवार को वे जिला मुख्यालय में पहुंचे और यहां दैनिक जागरण के मालिक संजय गुप्ता और प्रबंधन के खिलाफ नारे लिखी तख्तियां लेकर जमकर नारेबाजी की।

दैनिक जागरण कर्मी आज सुबह एजूकेशन बोर्ड के पास से नारेबाजी करते हुए कचहरी अड्डा में पहुंचे। यहां उन्होंने मिनी सचिवालय के आसपास रैली निकाली और नारेबाजी की। इसके बाद वे उपायुक्त कार्यालय गए। यहां कुछ देर तक धरना देते हुए नारेबाजी की गई। इसके बाद वे जिला न्यायालय परिसर से होते हुए जिला श्रम कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने कार्यालय के बाहर काफी देर तक प्रबंधन के खिलाफ नारे लगाए।

प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है, जबकि किसी अखबार के कर्मियों ने उसकी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की हो। अब तक बाकी कर्मचारियों व अन्य लोगों की रैलियों की कवरेज करने वाले जिला मुख्यालय के अधिकारी व कर्मचारियों सहित यहां पहुंचे लोग एक अखबार के खिलाफ निकली रैली से काफी हैरान थे। जनता के हितैषी होने और उनके हक की आवाज उठाने का दावा करने वाली अखबारों के अंदर हो रहे शोषण व कर्मचारियों के दमन के बारे में सुन कर हर कोई अखबार मालिकों को कोसता नजर आया। हालांकि इस रैली से केवल दैनिक जागरण की ही इज्जत सरेआम नीलम हुई है। वह दिन दूर नहीं जब बाकी अखबारों के कर्मचारी भी अपने हक के लिए सड़कों पर नजर आएंगे।

तस्वीरें देखने के लिए नीचे लिखे Next पर क्लिक करें>>

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दैनिक जागरण वाले चोर ही नहीं, बहुत बड़े झुट्ठे भी हैं… देखिए इनका ये थूक कर चाटना

दैनिक जागरण के मालिक किसिम किसिम की चोरियां करते हैं. कभी कर्मचारियों का पैसा मार लेते हैं तो कभी कानूनन जो देय होता है, उसे न देकर फर्जी लिखवा लेते हैं कि सब कुछ ठीक ठाक नियमानुसार दिया लिया जा रहा है. ऐसे भांति भांति के फर्जीवाड़ों और चोरियों का मास्टर दैनिक जागरण समूह अब तो बहुत बड़ा झुट्ठा भी घोषित हो गया है. यही नहीं, जब इसका झूठ पकड़ा गया तो इसे थूक कर चाटने को मजबूर किया गया और इसे ऐसा करना भी पड़ा.

जागरण वालों ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में बड़ी बड़ी होर्डिंग लगाकर खुद को नंबर वन बता रहे थे. अचानक एक रोज इन्होंने अपने ही अखबार में बड़ा बड़ा माफीनामा छापा कि हम लोगों को मालूम नहीं था कि हम लोग इस जिले में नंबर वन नहीं हैं इसलिए गलती से गलती हो गई भाइयों! नीचे पढ़िए वो माफीनामा जो जागरण के 13 अगस्त के मुजफ्फरपुर एडिशन में पेज नंबर दस पर बड़ा बड़ा प्रकाशित किया गया है. उपर अखबार का वो पेज नंबर दस है जिसमें नीचे दाहिने साइड बड़ा सा माफीनामा छपा दिख रहा है.

ऐसा नहीं है कि दैनिक जागरण के मालिकों को पता नहीं था कि वे मुजफ्फरपुर में नंबर वन नहीं हैं. इन्हें खूब पता था लेकिन चोरी और सीनाजोरी इनकी आदत है. सत्ता, कानून, सिस्टम सब कुछ को ये ठेंगे पर रखकर चलते हैं. पर जब दूसरे अखबारों ने जागरण के झूठे दुष्प्रचार पर आपत्ति कर वाद ठोंका तो जागरण को अपनी चोरी कबूल करनी पड़ी और मजबूरन माफीनामा छापना पड़ा.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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प्रतिमा भार्गव केस में प्रेस काउंसिल ने दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट को दोषी ठहराते हुए लताड़ा, …लेकिन बेशर्मों को शर्म कहां!

आगरा की रहने वाली प्रतिमा भार्गव ने मीडिया के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई जीत ली है. लेकिन दुख इस बात का है कि बेशर्म मीडिया वाले इस खबर को कतई नहीं छापेंगे. अगर इनमें थोड़ी भी नैतिकता होती तो प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के इस फैसले को न सिर्फ प्रकाशित करते बल्कि खुद के पतने पर चिंता जताते, विमर्श करते. प्रतिमा भार्गव के खिलाफ एक फर्जी खबर दैनिक जागरण आगरा और आई-नेक्स्ट आगरा ने प्रमुखता से प्रकाशित किया. अनाप-शनाप आरोप लगाए.

प्रतिमा से कोई पक्ष नहीं लिया गया. खबर छपने के बाद जब प्रतिमा ने अपना पक्ष छपवाना चाहा तो दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट के संपादकों ने इनकार कर दिया. प्रतिमा ने लीगल नोटिस भेजा अखबार को तो इसकी भी परवाह नहीं की. अंत में थक हारकर प्रतिमा ने प्रेस काउंसिल आफ इंडिया में केस किया और वकीलों के साथ प्रजेंट हुई. अपनी पूरी बात बताई. प्रेस काउंसिल ने कई बार दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट के संपादकों को बुलाया लेकिन ये लोग नहीं आए.

अब जाकर प्रेस काउंसिल ने आदेश किया है कि दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट ने प्रतिमा भार्गव के मामले में पत्रकारिता के मानकों का उल्लंघन किया है. इस बाबत उचित कार्रवाई के लिए RNI एवं DAVP को आर्डर की पूरी कापी प्रेषित की है. साथ ही आदेश की कापी दैनिक जागरण और आई-नेक्स्ट के संपादकों-मालिकों को भी रवाना कर दिया है. क्या दैनिक जागरण का संपादक संजय गुप्ता और आई-नेक्स्ट का संपादक आलोक सांवल इस फैसले को अपने अखबार में छाप सकेंगे? क्या इनमें तनिक भी पत्रकारीय नैतिकता और सरोकार शेष है? क्या ये एक पीड़ित महिला ने सिस्टम के नियम-कानून को मानते हुए जो न्याय की लड़ाई लड़ी है और उसमें जीत हासिल की है, उसका सम्मान करते हुए माफीनामा प्रकाशित करेंगे व उसकी खराब हुई छवि को दुरुस्त करने के लिए प्रयास करेंगे?

शायद नहीं. इसलिए क्योंकि इसी को कहते हैं कारपोरेट जर्नलिज्म, जहां सरोकार से ज्यादा बड़ा होता है पैसा. जहां पत्रकारिता के मूल्यों से ज्यादा बड़ा होता है धन का अहंकार. जहां आम जन की पीड़ा से ज्यादा बड़ी चीज होती है अपनी खोखली इज्जत. प्रतिमा ने जो लड़ाई लड़ी है और उसमें जीत हासिल की है, उसके लिए वह न सिर्फ सराहना की पात्र हैं बल्कि हम सबका उन्हें एक सैल्यूट भी देना बनता है. अब आप सब सजेस्ट करें कि आगे प्रतिमा को क्या करना चाहिए.

क्या उन्हें दिल्ली आकर पूरे मामले पर प्रेस कांफ्रेंस करना चाहिए? क्या उन्हें सुप्रीम कोर्ट में इस बात के लिए केस करना चाहिए कि अगर ये दोषी अखबार माफीनामा नहीं छापते हैं तो कोई पीड़ित क्या करे? आप सभी अपनी राय दें, सुझाव दें क्योंकि ये कोई एक प्रतिमा का मामला नहीं है. ऐसे केस हजारों की संख्या में हैं लेकिन लोग लड़ते नहीं, देर तक अड़े नहीं रह पाते, लड़ाई को हर स्टेज तक नहीं ले जा पाते. प्रतिमा ने ऐसा किया और इसमें उनका काफी समय व धन लगा, लेकिन उन्होंने अपने पक्ष में न्याय हासिल किया. अब उन्हें आगे भी लड़ाई इस मसले पर लड़नी चाहिए तो कैसे लड़ें, कहां लड़ें या अब घर बैठ जाएं?

कहने वाले ये भी कहते हैं कि संजय गुप्ता और आलोक सांवल दरअसल संपादक हैं ही नहीं, इसलिए इनकी चमड़ी पर कोई असर नहीं पड़ता. संजय गुप्ता चूंकि नरेंद्र मोहन के बेटे हैं इसलिए जन्मना मालिक होने के कारण उन्हें संपादक पद दे दिया गया, पारिवारिक गिफ्ट के रूप में. आलोक सांवल मार्केटिंग और ब्रांडिंग का आदमी रहा है, साथ ही गुप्ताज का प्रियपात्र भी, इसलिए उसे थमा दिया गया आई-नेक्स्ट का संपादक पद.

यही कारण है कि इनमें संपादकों वाली संवेदनशीलता और सरोकार कतई नहीं हैं. ये सिर्फ अपनी कंपनी का बिजनेस इंट्रेस्ट देखते हैं और अखबार का प्रसार अधिकतम बना रहे, इसकी चिंता करते हैं. इनके पहाड़ जैसे अवैध साम्राज्य के नीचे हजार दो हजार आम जन दम तोड़ दें तो इनको क्या फरक पड़ने वाला है. खैर, न्याय सबका होता है, सिस्टम नहीं करेगा तो प्रकृित करेगी. वक्त जरूर लग सकता है लेकिन प्राकृतिक न्याय का सामना तो करना ही पड़ेगा. जिस कदर ये महिला प्रतिमा भार्गव पेरशान हुई है, उससे कम परेशानियां ये दोनों शख्स न झेलेंगे, ये तय है, मसला चाहे जो रहे. जै जै. 

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


आर्डर में क्या-क्या लिखा है और पूरा केस क्या है, इसे पढ़ने के लिए नीचे लिखे Next पर क्लिक करें.

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दैनिक जागरण के मुख्य महाप्रबंधक, कार्मिक प्रबंधक और मार्केटिंग मैनेजर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज

मीडिया संस्थानों में गजब का खेल है। भले ही लोगों को बाहर से कुछ दिखता हो, लेकिन इसकी हालत आम कारोबार की तरह है। मुनाफा की होड़ में हर तरह के हथकंडे अख्तियार किए जा रहे हैं। देश का नम्बर वन अखबार होने का दावा करने वाले दैनिक जागरण अखबार में भी तरह—तरह के खेल हैं। मामला कार्यस्थल पर सम्मान का है। फिलहाल इस अखबार में सीनियर मार्केटिंग एक्जक्यूटिव के पद पर कार्यरत पीड़ित महिला कर्मचारी ने गौतमबुद्ध नगर थाना में दैनिक जागरण के मुख्य महाप्रबंधक नीतेन्द्र श्रीवास्तव, कार्मिक प्रबंधक देवानंद कुमार उर्फ मुन्ना और नोएडा के मार्केटिंग मैनेजर नकुल त्यागी पर भारतीय दंड विधान की धारा 354ए और 504बी के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया है। यह मुकदमा कांड संख्या 643/15 के अन्तर्गत दर्ज किया गया है।

दर्ज मुकदमे में पीड़िता ने कार्यस्थल पर लगातार शारीरिक और मानसिक तौर पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। बहाना तो मार्केटिंग के टारगेट था, लेकिन उसके पीछे कुछ और चल रहा था। उसका दावा है कि वह मार्केटिंग के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में कामयाब रही है। दर्ज प्राथमिकी में यह आरोप लगाया है कि नोएडा के मार्केटिंग मैनेजर नकुल त्यागी का आचरण मर्यादा के विपरीत है। विरोध करने पर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इतना ही नहीं कार्मिक विभाग के प्रबंधक ने भी यह नसीहत दी कि— ”नौकरी करनी है तो सबकुछ बर्दाश्त करना होगा।” जब इसकी शिकायत मुख्य महाप्रबंधक से की तो उन्होंने भी इन्हीं अधिकारियों का पक्ष ​​लिया।

24 अगस्त को उसे कार्यालय के गेट पर गार्ड ने अंदर जाने से रोक दिया। पूछने पर बताया गया कि कार्मिक विभाग के प्रबंधक के आदेश पर ऐसा किया गया है। इस संबध में जब उनसे इंटरकॉम पर बात की तो वे फिर अभद्रता पर उतर आए। मामला थाने में पहुंचने से पहले पीड़िता ने प्रबंधन के शीर्ष लोगों को भी मेल के माध्यम से वाफिक कराया। उधर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आने के कारण न्याय के लिये पुलिस के पास दस्तक दी है। पुलिस ने प्रबंधन के दबाव में दूसरा मुकदमा पहले ही दर्ज कर लिया है। प्रबंधन ने पीड़िता सहित संस्थान के चालीस लोगों के खिलाफ मुकदमा किया है। इस मुकदमें में आरोप है कि इन लोगों ने नौकरी से निकाले जाने के बाद जबरन संस्थान में घुसकर मुख्य महाप्रबंधक का घेराव किया। यह मुकदमा नोएडा फेजथ्री में दर्ज कराया गया है। सवाल यह उठता है कि यदि प्रबंधन के लोग यह कहते हैं कि इन्हें हटाया गया तो क्या उसके पहले की तमाम प्रक्रिया पूरी की थी।

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दैनिक जागरण नोएडा में यूनियन ने सीजीएम को बता दी औकात, महिला कर्मियों को करना पड़ा बहाल

इसे कहते हैं यूनियन की ताकत. दैनिक जागरण नोएडा के चीफ जनरल मैनेजर नीतेंद्र श्रीवास्तव ने मार्केटिंग से दो महिला कर्मियों को निकाल बाहर किया तो ये महिला कर्मी दैनिक जागरण की नई बनी यूनियन तक पहुंच गईं और अपनी आपबीती सुनाई. यूनियन ने सीधे सीजीएम नीतेंद्र श्रीवास्तव की केबिन पर धावा बोला और नीतेंद्र को घेर कर दोनों कर्मियों को बहाल करने का आदेश जारी करने के लिए मजबूर कर दिया. नीतेंद्र को लोगों ने जमकर खरी खोटी सुनाने के बाद भांति भांति के विशेषणों से नवाजा. बस केवल मारा नहीं. उधर, नीतेंद्र भी कहां बाज आने वाला था. बहाली के अगले रोज दोनों कर्मी जब काम पर आईं तो इन्हें साइन यानि कार्ड पंचिंग करने से रोक दिया गया और इन्हें कैंपस में इंटर नहीं करने दिया गया. इसके बाद यूनियन की पहल पर दोनों कर्मियों ने नोएडा पुलिस स्टेशन और लेबर आफिस में शिकायत डाल दी है या शिकायत करने की तैयारी कर ली है.

जागरण मैनेजमेंट मनमानी करने का आदी हो चुका है. दैनिक जागरण मैनेजमेंट नियम-कानून से चलना भी नहीं चाहता और कर्मचारियों का रोष भी बर्दाश्त नहीं कर पाता. साथ ही कर्मियों को चैन से काम भी नहीं करने देना चाहता. विगत महीने कर्मचारियों द्वारा दिए गए दस सूत्रीय मांगों पर डीएलसी आफिस में समझौता हो गया था. इसके बाद सब कुछ शांतिपूर्वक चल रहा था. लेकिन जागरण प्रबंधन ने मार्केटिंग विभाग की दो महिला कर्मचारियों को निकाल बाहर किया. उनके विभाग के इंचार्ज ने उनसे बदसलूकी की. महिलाएं रोने लगीं तो सारे कर्मचारी जुट गए और यूनियन के कई प्रतिनिधि भी आ गए. सब लोग सीजीएम के पास पहुंचे. पता चला कि पहले इन लड़कियों से इस्तीफा देने को कहा गया था. जब इस्तीफा नहीं दिया तो उनकी इंट्री और पंचिंग रोक दी गई. सीजीएम ने खुद को हर तरफ से घिरा देख और हड़ताल की नौबत आती देख महिला कर्मियों को बहाल कर दिया. सूत्रों के मुताबिक बाद में फिर इन महिलाओं की इंट्री रोकी गई तो इन महिलाओं ने पुलिस और लेबर आफिस में शिकायत डाल दी है या शिकायत की तैयारी कर ली है.

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जागरण प्रबंधन चाहता है किसी तरह पुराने कर्मचारियों से निजात मिल जाए!

Shrikant Singh :  जंग ‘जागरण’ ने शुरू की, समापन हम करेंगे… मित्रों, आज कल मैं फेसबुक पर दैनिक जागरण प्रबंधन की हरकतों के बारे में कुछ नहीं लिख रहा हूं। इस पर कुछ मित्रों ने शिकायत भी की है। क्‍या करूं, आप तो जानते ही हैं-सबसे बड़ा रुपैया। ऐसा न होता तो जागरण प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को धता क्‍यों बताता। तमाम कर्मचारियों को बेवजह क्‍यों परेशान करता। कभी कचहरी का भी मुंह न देखने वाले लोग सुप्रीम कोर्ट में दस्‍तक क्‍यों देते। बेजुबान लोग क्रांतिकारी क्‍यों बन जाते।

सन्‍नाटे को चीरते हुए जो आवाज उठी है, वह कोई निष्‍कर्ष निकाले बगैर शांत नहीं हो सकती। जब आपने तय ही कर लिया है, गलत को गलत ही कहेंगे, चाहे वह दैनिक जागरण प्रबंधन ही क्‍यों न हो तो आपकी आवाज को समूची समष्टि सुन रही है। उसे वह भी सुनाई दे रहा है, जो दैनिक जागरण प्रबंधन अपनी हरकतों से कहना चाहता है और वह भी जो कर्मचारियों के विद्रोह से पैदा हुआ है। विद्रोह की आग में बड़े-बड़े साम्राज्‍य तबाह हो गए, तो दैनिक जागरण प्रबंधन की क्‍या औकात है। अदालतों में दैनिक जागरण प्रबंधन के पास बकलोली करने के सिवा कुछ नहीं बचा है। और अदालतें लंबे समय तक बकलोली बर्दाश्‍त नहीं करतीं। करना भी नहीं चाहिए। गलती से यदि ऐसा हुआ, तो सारी व्‍यवस्‍था तहस-नहस हो जाएगी। अराजकता फैल जाएगी। और अराजकता सहने की कूबत न तो सरकार में है और न ही दैनिक जागरण प्रबंधन में। शायद इसीलिए दैनिक जागरण प्रबंधन समय-समय पर रंग बदलता रहता है।

दैनिक जागरण प्रबंधन चाहता है कि किसी तरह पुराने कर्मचारियों से निजात मिल जाए, लेकिन उसे उस प्रवृत्ति से निजात कभी नहीं मिलेगी, जो कर्मचारियों में पैदा हो गई है। बगावत का संदेश सूक्ष्‍म रूप से कई पीढि़यों तक पहुंच गया है। इन पीढि़यों में टकराव तय है। एक पीढ़ी होगी शोषकों की तो दूसरी शोषितों की। यह दुर्भावना पहले जागरण प्रबंधन ने ही पैदा की है। मतलब फर्स्‍ट अटैक के लिए जिम्‍मेवार वही है। हम तो जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं। आपको बता दें कि प्रत्‍येक क्रिया की जो विपरीत प्रतिक्रिया होती है, वह क्रिया से अधिक संवेगवान होती है। ठीक उसी प्रकार जैसे दवा तो धीरे-धीरे काम करती है, लेकिन जब वह रिएक्‍शन करती है तो तेजी से बहुत कुछ नस्‍ट कर देती है। तो यह समझ लीजिए कि दैनिक जागरण प्रबंधन तेजी से नस्‍ट होने के लिए ईंधन खुद जुटा रहा है और ऐसा ईंधन जिस पर पेट्रोल-डीजल की तरह महंगाई की मार नहीं पड़नी है। बस। अभी मुझे कुछ जरूरी लिखना है, जिसका मिलेगा रुपैया।

दैनिक जागरण में वरिष्ठ पद पर कार्यरत और मजीठिया वेज बोर्ड के आंदोलन को लीड करने वालों में से एक श्रीकांत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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दैनिक जागरण के फोटो जर्नलिस्ट मदन मौर्य की ये तस्वीरें बहुत बड़ी खबर बन सकती थी लेकिन आफिस वाले मैनेज हो गए!

मेरठ में एक फोटोग्राफर हैं मदन मौर्या. सीनियर फोटो जर्नलिस्ट हैं. जमाने से दैनिक जागरण की ही सेवा में है. बेहद मुंहफट और बेबाक. चोर के मुंह पर चोर कह देना उनका रोज का नियम है. चोर चाहे सीनियर पत्रकार हो या सीनियर पुलिस / प्रशासनिक अधिकारी. मदन मौर्य की इमानदारी और मुंहफटई के कारण सब चुपचाप उनकी सुनते, उन्हें झेलते रहते हैं. दैनिक जागरण, मेरठ के मालिकान बहुत अच्छे से मदन के इमानदार स्वभाव को जानते हैं, इसलिए वो मदन के खिलाफ ढेर सारी प्रायोजित शिकायतों को डस्टबिन में डालते रहते हैं, मदन के आफिस के लोगों के बारे में कड़वे बोल को सुन कर अनसुना करते हुए भी उस पर चुपचाप अमल करते जाते हैं. मदन का काफी समय से सबसे बड़ा दुख ये कि जिनके कंधों पर सिटी की रिपोर्टिंग का जिम्मा है, उन्होंने निजी स्वार्थवश पूरे पत्रकारिता के तेवर को धंधेबाजी में तब्दील कर रखा है. मदन अपने कैमरे के जरिए जिस सरोकारी व तेवरदार पत्रकारिता को अंजाम देते हैं, उसे उनके आफिस वाले कुछ लोग बेच खाने को तत्पर हो जाते हैं. ये सारी बातें और भूमिका मदन के स्वभाव-संस्कार के बारे में बताने के लिए थीं. अब आते हैं असली खबर पर.

दैनिक जागरण मेरठ के सीनियर फोटो जर्नलिस्ट मदन मौर्य

((पहली बार किसी फोटो जर्नलिस्ट ने विधानसभा टिकट खरीदने के लिए नोटों का कार्टन ले जाते नेता की तस्वीर खींची लेकिन यह खबर नेशनल न्यूज इसलिए नहीं बन पाई क्योंकि अखबार के स्थानीय सीनियर जर्नलिस्टों ने नेताओं से सौदा कर लिया.))

पिछले दिनों मदन मौर्य ने अपने कैमरे से एक ऐसा काला सच पकड़ा जिसे बड़े बड़े पत्रकार और फोटो जर्नलिस्ट नहीं पकड़ पाए. सियासी गणित के वास्ते नोटों के लेन-देन की नंगी तस्वीर और इससे संबंधित फोटो की पूरी सीरिज मदन मौर्य ने दुस्साहसिक तरीके से अपने कैमरे में कैद किया. यह सब कुछ मेरठ सर्किट हाउस के इर्द-गिर्द हुआ. असल में मेरठ सर्किट हाउस के एक कमरे में बसपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी रुके हुए थे. दूसरे अलग कमरे में सपा सरकार के कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर थे. उसी दौरान पीछे के गेट से काले रंग की एक जेलो कार आती है. उसमें से कुछ लोग उतरते हैं. ये लोग नोटों से भरा एक कार्टन हाथ में लिए थे. इनमें से एक था मेरठ कैंट का भावी बसपा प्रत्याशी शैलेंद्र चौधरी. कार्टन से नोट साफ नजर आते हैं. मदन मौर्य तुरंत एलर्ट होकर कैमरा चलाने लगते हैं. कैमरे की फ्लैश देख नोट लाने वालों के बीच भगदड़ मच जाती है. ये लोग कार्टन को गाड़ी में रखते हैं और गायब हो जाते हैं. नसीमुद्दीन सिद्दीकी तुरंत कह देते हैं कि ये लोग बसपा से जुड़े नहीं हैं और पैसे से उनका कोई लेना देना नहीं है. शाहिद मंजूर भी कहते हैं कि वे नहीं जानते कौन लोग हैं और उनसे मिलने का कोई कार्यक्रम नहीं था.

मदन मौर्य के पास पूरी स्टोरी मय फोटो थी. करोड़ों रुपये देकर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बसपा कोटे का टिकट खरीदने का कार्यक्रम चल रहा था जो कैमरे में क्लिक हो जाने के कारण खटाई में पड़ गया. मदन ने सब कुछ अपने आफिस के हवाले कर दिया लेकिन आफिस के कुछ गणमान्य लोगों ने खेल कर दिया. सेलेक्टेड तरीके से तस्वीरें छापी. किसी को बचाया, किसी को छुपाया. मतलब ये कि मदन ने जो स्टोरी जान पर खेलकर की, उसको उनके आफिस वालों ने ही बेच खाया. कायदे से ये स्टोरी आल एडिशन फर्स्ट पेज की लीड थी. पहली बार टिकट खरीद की तस्वीर और पूरी स्टोरी पब्लिक डोमेन में आई थी, एक साहसी फोटो जर्नलिस्ट की कोशिशों के कारण. लेकिन आरोप है कि सिटी इंचार्ज से आरोपी नेता ने मिलकर मामला सेट कर लिया और पूरी खबर की हत्या हो गई. खबर को जिस रूप में डेवलप करके उछाल कर छापना था, वह नहीं हुआ. सब कुछ लीपापोती सा करके निपटा दिया गया. 

लोगों ने तो इस गेम में लाखों कमा लिए लेकिन मदन मौर्य को बदले में मिल रही है धमकियां. जिन सज्जन को मेरठ कैंट से बसपा का टिकट मिलना था और जो पैसे लेकर जा रहे थे, उनने धमकाना शुरू कर दिया है कि अगर उन्हें टिकट न मिला तो मदन मौर्य का हिसाब किया जाएगा. मदन को ऐसी जाने कितनी धमकियां मिलती है लेकिन मदन अकेले ही अपनी बाइक पर रोज काम के लिए निकलते हैं और देर रात घर वापस लौटते हैं.

सूत्र बताते हैं कि दैनिक जागरण ने पहले दिन प्रत्याशी की फोटो नहीं छापी. सिर्फ नोट भरे कार्टन का ही फोटो छापा. नेता को बचा लिया जाता है, लाखों लेकर, ऐसा आरोप लगता है. प्रबंधन के पास जब शिकायत जाती है तो प्रबंधन की फटकार के बाद सिटी इंचार्ज अगले रोज से छापना शुरू करते हैं लेकिन सबको पता है कि अगर मंशा ओबलाइज करने और धंधा करने की हो तो किस तरह व कितना छाप पाएंगे. आफर मदन मौर्य को भी मिला था, लाखों का, लेकिन उन्होंने पत्रकारिता और सरोकार को सर्वोच्च रखा, संस्थान के प्रति निष्ठा व ईमानदारी को सर्वोच्च रखा. लेकिन मदन मौर्य का ठुकराया आफर उनके आफिस के उनके कुछ सीनियर्स ने लपक लिया. बस, खेल हो गया. इस घटनाक्रम से संबंधित मदन मौर्य द्वारा खींची गई नोटों की गड्डी वाले कार्टन की तस्वीर सबसे उपर है, और अन्य तस्वीरें यहां नीचे पेश हैं. और हां, आपको मदन मौर्या को बधाई देना बनता है, उनके मोबाइल नंबर 09837099512 को डायल करके. कोई अच्छा काम कर रहा है तो उसे सराहने में क्या कंजूसी करना.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क: yashwant@bhadas4media.com


मदन मौर्या के साहस की एक पुरानी कहानी इस शीर्षक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं:

शाबास मदन मौर्या, जुग-जुग जियो

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