नकारात्मक पत्रकारिता का चलन बढ़ा… सुशांत सिंह राजपूत के मौत के बाद जिस तरह से मीडिया ने सुशांत और रिया चक्रवर्ती को कवरेज दी है उसके बाद से ही मीडिया के साख पर सवाल उठ रह हैं कि मीडिया नकारात्मक पत्रकारिता कर रही है…मीडिया सत्ता पक्ष के लिए काम कर रही है……कोई कह रहा है कि मीडिया सकारात्मक पत्रकारिता कर रही है तो, कोई कह रहा है मीडिया नकारात्मक पत्रकारिता कर रही है…जनता के सवालों के घेरे में मीडिया… मीडिया पर उठ रहे हैं सवाल …सत्ता के सामने घुटने टेक रही है मीडिया …जनता के आरोप कहां तक है सच?
सुशांत सिंह राजपूत के मौत के बाद जिस तरह से मीडिया ने सुशांत सिंह राजपूत और रिया चक्रवर्ती को कवरेज दी है….उसके बाद मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि मीडिया ने देश में तमाम मुद्दों को दरकिनार कर सिर्फ और सिर्फ सुशांत सिंह राजपूत को ही दिखा रहा हैं… लोगों का कहना है कि देश में गरीबी का मुद्दा खत्म हो गया क्या ? GDP पर कोई क्यों नहीं बोल रहा है ? अर्थव्यवस्था पर मीडिया क्यों खामोश है…बेरोजगारी पर कोई क्यों सरकार से सवाल नहीं पूछ रहा है…कोरोना काल में लाखों लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया….
अस्पताल में डॉक्टर्स अपनी मनमानी कर रहे हैं…..जहग-जगह बाढ़ की समस्या है लेकिन मीडिया में सिर्फ एक ही खबर दिखाई जा रही है…वो है सुशांत सिंह राजपूत… और अब कंगना रनौत… अभी एक निजी चैनल के दो पत्रकार को गिरफ्तार किया गया है…क्या पत्रकारिता का स्तर इतना गिर गया है कि पत्रकारों को गिरफ्तार करने का नौबत आ जाए….क्या मीडिया पर जो सवाल उठ रहे हैं वो जायज है..क्या मीडिया सत्ता पक्ष के दबाव में पत्रकारिता कर रही है…मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है..पत्रकार और पत्रकारिता पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं…लेकिन मोदी सरकार में मीडिया पर सवाल कुछ ज्यादा ही उठ रहे हैं कि मीडिया वही दिखाती है जो सरकार चाहती यानी मीडिया पर पक्षपात करने करने का आरोप लग रहा हैं…इन आरोपों की बुनियाद क्या है ये आप समझ रहे होंगे..किसी भी देश और समाज के निर्माण में मीडिया काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है….यही वजह है कि मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी कहा जाता है….मीडिया की जिम्मेदारी देश और लोगों की समस्याओं को सामने लाने के साथ-साथ सरकार के कामकाज पर नजर रखना भी है….लेकिन पिछले कुछ दिनों में मीडिया की कार्यप्रणाली और रुख पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं…
सवाल ये है कि क्या मीडिया बदल रहा है? मीडिया के काम करने के तरीके में बदलाव आए हैं ? मीडिया में सत्ता पक्ष के अलावा कुछ और नहीं दिखाया जा रहा है ?
ये पहली बार नहीं जब मीडिया सवालों के घेरे में हो..इससे पहले भी मीडिया पर आरोप लगते रहे हैं लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर पत्रकार और पत्रकारिता के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसे पढ़ने…देखने के बाद मीडिया का वजूद खतरे में दिखने लगा है……लेकिन सिक्के के दो पहलू है जिसे समझना आज के जनरेशन के लिए बेहद जरूरी है…
मीडिया सरकार और जनता के बीच संवाद का एक माध्मम है.. मीडिया अगर काम करना बंद कर दे… संवाद का माध्यम ही खत्म हो जाएगा
सोशल मीडिया पर कई ऐसे मैसेज वायरल हो रहे हैं जिसमें मीडिया से दूरी बनाने की बात कही जा रही है….ऐसा इसलिए है क्योंकि आरोप लग रहे है कि मीडिया अपने दायित्व को भूल कर सत्ता पक्ष का गुणगान करने में लगा हुआ है….जिस मीडिया का काम सरकार से सवाल पूछने का था वो आज प्रोपेगेंडा और खबरें प्लांट करने में लगा हुआ है….ये आरोप कहां तक जायज हैं ये तो आप खुद ही तय करें लेकिन मीडिया की एक महती भूमिका है…जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता हैं….
सिर्फ एक पक्ष को क्यों देखते हैं लोग ? क्या मीडिया के संघर्षों को कोई नहीं देखता ? आजादी से लेकर आज तक मीडिया की बड़ी भूमिका है
मीडिया अपनी खबरों से समाज के असंतुलन और संतुलन में भी बड़ी भूमिका निभाता है….मीडिया अपनी भूमिका समाज में शांति, सौहार्द, समरसता की भावना विकसित कर सकता है….सामाजिक तनाव, संघर्ष, मतभेद, युद्ध और दंगों के समय मीडिया को बहुत ही संयमित तरीके से काम करना चाहिए और ऐसा ही होता है….हम खबर को खबर की तरह ही दिखाते हैं….लेकिन जिसका जो नज़रिया होगा वो किसी खबर को वैसे ही देखेगा….हां खबर दिखाना का तरीका अलग हो सकता हैं लेकिन खबर वही होता है जिसे आप देखना चाहत हैं…..भूकंप, बाढ़ या कोई प्राकृतिक आपदाओं के समय मीडिया कर्मी अपनी जान का परवाह किए बगैर काम में लगे रहती हैं…क्या इन पहलुओं को भूलाया जा सकता है… मीडिया काम है खबर को सही तरीके से दिखाना है और हम खबर को सही से दिखाने में विश्वास करते हैं…जनता क्या कहती है…ये तो जनता को ही तय करना है….मीडिय़ा पर आरोप लगना कोई नई बात नहीं हैं…आरोप लगते थे और लगते रहेंगे…लेकिन हम खबर दिखाएंगे…यही पत्रकारिता है…
सौरभ त्रिपाठी
पत्रकार
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