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हक के लिए आवाज उठाने वाले 18 जागरण कर्मी सस्पेंड, प्रेस के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू

दैनिक जागरण धर्मशाला की बनोई स्थित यूनिट में कार्यरत 18 कर्मियों ने प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को सभी कर्मियों ने दैनिक जागरण की बनोई स्थित प्रेस के बाहर धरना व प्रदर्शन किया। ज्ञात रहे कि दैनिक जागरण ने इन सभी को हक के लिए आवाज उठाने के चलते सस्पेंड कर दिया है। ये सभी कर्मचारी मजीठिया वेज बोर्ड के तहत देय वेतनमान व एरियर की मांग कर रहे हैं। इसके लिए इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कंपनी के खिलाफ अवमानना की याचिका भी दायर कर रखी है। साथ ही श्रम विभाग के यहां भी शिकायत की है। इसके बावजूद दैनिक जागरण प्रबंधन नियमों कायदों को ताक पर रखकर मनमानी करने पर उतारू है। खुद को देश का नंबर वन अखबार कहने वाले दैनिक जागरण ने वेज बोर्ड के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों तक को ताक पर रखा है।

दैनिक जागरण धर्मशाला की बनोई स्थित यूनिट में कार्यरत 18 कर्मियों ने प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। मंगलवार को सभी कर्मियों ने दैनिक जागरण की बनोई स्थित प्रेस के बाहर धरना व प्रदर्शन किया। ज्ञात रहे कि दैनिक जागरण ने इन सभी को हक के लिए आवाज उठाने के चलते सस्पेंड कर दिया है। ये सभी कर्मचारी मजीठिया वेज बोर्ड के तहत देय वेतनमान व एरियर की मांग कर रहे हैं। इसके लिए इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कंपनी के खिलाफ अवमानना की याचिका भी दायर कर रखी है। साथ ही श्रम विभाग के यहां भी शिकायत की है। इसके बावजूद दैनिक जागरण प्रबंधन नियमों कायदों को ताक पर रखकर मनमानी करने पर उतारू है। खुद को देश का नंबर वन अखबार कहने वाले दैनिक जागरण ने वेज बोर्ड के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों तक को ताक पर रखा है।

इतना ही नहीं वेतनमान देने से बचने के लिए कर्मियों से झूठ बोल कर जबरन हस्ताक्षर करवा रखे हैं। अब इन्हें पेश करके कहा जा रहा है कि कर्मी वेतनमान नहीं चाहते। जो कर्मी वेतनमान के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें प्रताडि़त करके नौकरी से निकालने के षडय़ंत्र रचे जा रहे हैं। इस मामले में सरकारों ने चुप्पी साध रखी है। श्रम विभाग दबाव में काम कर रहा है। इसके चलते कइ्र्र साल कंपनी की तरक्की में अपना योगदान देने वाले कर्मचारी सड़क पर आ गए हैं। धर्मशाला यूनिट से सस्पेंड किए गए कर्मियों में दर्शन ङ्क्षसह, युवराज सिंह, शांति स्वरुप त्रिपाठी, राजेश शर्मा, विमल अवस्थी, आशीष कुमार, शैलेश कुमार, राम केवल सिंह, सुनील कुमार, कपिल देव, पवन सिंह, संजय सिंह, मुकेश कुमार, राकेश कुमार, अमर सिंह, राजवली यादव, मृत्युंजय कुमार व सीएन शुक्ला के नाम शामिल हैं।

मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर केवल दैनिक जागरण ही नहीं बल्कि देश के करीब सभी बड़े मीडिया ग्रुप ऐसा ही रवैया अपनाए हुए हैं। जनता के सामने सच परोसने और न्याय दिलाने जैसी बड़ी-बड़ी डिंगे हांकने वाले मीडिया हाउसेज की हालत लाला की दुकान से कम नहीं है, जहां सिर्फ अपनी तिजोरी भरने के अलावा कुछ नहीं सोचा जाता है। शर्मनाक बात तो यह है कि केंद्र व राज्य सरकारें भी अपना उल्लू सीधा करने के लिए अखबार मालिकों पर सख्ती करने से कतरा रही हैं।

पहले तो अखबारों के मालिक वर्किंग जर्नलिस्ट एंड अदर न्युजपेपर इंप्लाइज एक्ट व इसके तहत गठित होने वाल वेज बोर्ड को निरस्त करवाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए। जब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका रद करके 11 नवंबर 2011 से मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने और अप्रैल, 2014 से वेज बोर्ड का एरियर व वेतनमान देने के आदेश जारी किए, तो अखबार मालिकों को सांप सुंघ गया। इसके बाद इन्होंने कर्मचारियों को दबाव में लाने के हथकंडे शुरू कर दिए। कई लोगों को निकाल दिया गया और अधिकतर से लिखवा लिया गया कि वे वेज बोर्ड नहीं लेना चाहते। जिन्होंने आनाकानी की उन्हें निकाल दिया गया। अब प्रदेश भर के हजारों मीडिया कर्मी सुप्रीम कोर्ट का आदेश न माने जाने पर दोबारा कोर्ट गए हैं।

अखबार मालिकों पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की याचिकाएं दायर होने के बावजूद उनके हौसले पस्त नहीं हुए हैं। उन्होंने देश भर के कपिल सिब्बल जैसे बड़े से बड़े वकीलों की फौज खड़ी कर दी है और कर्मचारियों को उत्पीडऩ जारी रखे हुए हैं। दैनिक जागरण के मालिकों ने तो प्रधानमंत्री तक को राहत कोष के लिए करोड़ों का चैक सौंप कर यह जताने की कोशिश की है कि केंद्र सरकार उनके साथ है। जबकि राज्य सरकारों की हालत भी ऐसी ही है। श्रम विभाग की हालत तो सभी जानते ही हैं।

कांगड़ा से विजयेंद्र शमा की रिपोर्ट. संपर्क: 09736276343


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