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सुख-दुख

यूपी की इस खबर को हिंदी अख़बारों ने नहीं बल्कि अंग्रेज़ी के इस अख़बार ने फ़्रंट पेज लीड बनाया है

संजय कुमार सिंह-

टेनी के समर्थकों पर गवाह को धमकाने-पीटने का आरोप…. लखीमपुरखीरी नरसंहार (तिकुनिया कांड) के एक प्रमुख गवाह दिलजोत सिंह ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे स्पष्ट होने के बाद केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के समर्थको ने उनकी पिटाई की और हत्या की कोशिश की। अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी। पर पीडि़त या गवाह का नाम नहीं बताया। दिलजोत ने गवाही दी थी कि गए साल तीन अक्तूबर को उसने टेनी की थार जीप से चार किसानों और एक स्थानीय पत्रकार को तिकुनिया में कुचलते देखा था। उसने यह भी कहा है कि आशीष को कार से उतरकर हवा में गोली चलाकर भागते देखा था।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी। मंगलवार को आशीष की जमानत रद्द करने की अपील पर सुनवाई होगी। इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सुरक्षा दी गई है। हमलावरों ने उसे बेल्ट से पीटा और कपड़े फाड़ दिए हैं। उसका सिर फट गया है। पुलिस ने उसका मेडिकल करा लिया है। दिलजोत ने दर्ज रिपोर्ट में कहा है कि जमानत पर छूटे आशीष मिश्र मोनू अब बाहर हैं। भाजपा फिर से सत्ता में आई है और अब गवाहों को सबक सिखाया जाएगा। हमलावरों ने गवाहों को जान से मारने की धमकी भी दी है। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार हमलावरों ने धमकी दी है मामला वापस नहीं लेने पर उसे मार दिया जाएगा।

हिन्दी में गूगल करने पर मुझे यह खबर दैनिक जागरण और अमर उजाला में मिली। द टेलीग्राफ ने पहले पन्ने पर लीड बनाया है। अंग्रेजी के मेरे पांच अखबारों में किसी और में यह खबर लीड तो छोड़िए पहले पन्ने पर भी नहीं दिखी। द टेलीग्राफ का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, विजयी समूह द्वारा हमले का आरोप (फ्लैग शीर्षक) नतीजों का खामियाजा (लखीमपुर) खीरी के गवाह पर। कहने की जरूरत नहीं है कि यह उत्तर प्रदेश के चौंकाने वाले नतीजों का प्रभाव है पर अखबारों ने इसे प्रमुखता नहीं दी। देश जब नतीजों से चकित है तो मीडिया का काम था कि नेताओं और उनके समर्थकों पर इस असर की जानकारी भी जनता को देता पर जय हो।

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