Syed Hussain : कैसे हैं आप सब, उम्मीद है अच्छे होंगे, काफ़ी दिनों के बाद दिल की बात आप तक पहुंचाने की कोशिश में लिख रहा हूं। सबसे पहले तो आप तमाम दोस्तों और चाहने वालों का शुक्रिया, आप लोगों की दुआ रंग लाई और एक बार फिर परिवार और पेट पालने का साधन मिल गया। वह भी ज़मीर बेचकर नहीं, जो करने को मजबूर होना पड़ रहा था। यही वजह थी कि पत्रकारिता के नाम पर ‘पैरोकारिता’ करते करते थक गया था, इज़्ज़त तो मिलती थी लेकिन उस इज़्ज़त से झांकते हुए मेरी ज़मीर मुझे ही झकझोर देती थी। हर डिबेट शो के बाद सुनते सुनते थक गया था, सैयद इस पार्टी को क्यों इतना लपेट दिए। उस पार्टी को लपेटना चाहिए था।
कभी किसी ख़बर पर ये कहा जाए कि इसको इस एंगल से लिखो ताकि ‘फ़लाना’ शख़्स साफ़ सुथरा लगे। अर्रे भाई, करना पड़ता था पापी पेट, परिवार और उस कैमरे की चमक धमक का सवाल जो था, जो मुझे स्टार बनाती थी। सैयद हुसैन, स्टार एंकर… क्या बोलता है, क्या अंदाज़ है… ये सब सुन कर दिल ख़ुश हो जाता था। लेकिन जब आइने में ख़ुद को देखता था तो ज़मीर मुंह चिढ़ा रही होती थी। इसलिए बड़ी मुश्किल से लेकिन आप लोगों के प्यार और साथ ने हौसला दिया और मैंने ये फ़ैसला कर लिया था कि अब किसी की ‘पैरोकारिता’ नहीं करनी। पत्रकार बनना मेरा पेशा नहीं था, शौक़ से मैं आया था। पैसा कमाना होता तो, आज अपने कुछ दोस्तों की तरह मैं भी पैसों की दुनिया में बहुत आगे होता। आज से 10 साल पहले जब मैंने सॉफ़्टवेयर इंजीनियर की फ़िल्ड को छोड़ा था, और इस शौक़ को लगे लगाने की ठानी थी, तो घरवालों से लेकर मेरे उन दोस्तों ने भी मुझे यही कहा था कि आफ़त को गले लगा रहे हो।
अपनी जगह वे भी सही थे और मैं भी, क्योंकि मुझे पत्रकार बनने का कीड़ा काट चुका था, पत्रकार बना भी, जिस फ़ितूर के लिए पत्रकारिता नाम की आफ़त को गले लगाया उसमें भी आगे बढ़ा। स्पोर्ट्स का शौक़ और ख़ास तौर से क्रिकेट के प्यार ने ही मुझे पत्रकार बनाया था। लेकिन समय के साथ साथ मैं भी बदला और स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट से न्यूज़ एंकर और सीनियर जर्नलिस्ट बन गया था। लोग पहचानने लगे थे, इज़्ज़त देने लगे थे, मैंने भी अब कुछ करने की ठान ली थी। एक निष्पक्ष पत्रकार बनने की ठानी, सच्चाई सामने लाना, आम लोगों की आवाज़ बनना आदत में शुमार हो गया। शुरुआत में जब चैनल को इससे फ़ायदा था, तो उन्होंने भी साथ दिया। कहीं ‘अभियान’ का हिस्सा बना, तो किसी चैनल में मुझे ‘मुहिम’ छेड़ने की ज़िम्मेदारी दे दी।
वह कहते हैं न, कि एक अच्छाई करने के लिए कई बुराइयों से लड़ना पड़ता है, मैं भी लड़ा कहीं जीता तो कहीं हारा भी। पर जब ये लगने लगा कि हम अच्छाई के लिए नहीं लड़ते बल्कि इसलिए लड़ते हैं कि हमारा कैसे अच्छा होगा। हमारे चैनल को किसकी पैरोकारिता करनी चाहिए ताकि हमारा भला हो, जब ये बातें मेरे सामने आने लगीं। तो दुनिया की नज़र में इज़्ज़तदार और कमाल का एंकर सैयद, ख़ुद की नज़रों में गिरता जा रहा था।
पहले सोचा फ़लाना चैनल ही ऐसा है, इसे छोड़ कर उधर का रुख़ किया जाए वह ऐसा नहीं। लेकिन फिर समझ में आ चुका था, कि सभी पैरोकारिता कर रहे हैं, कोई फ़लाना पार्टी की तो कोई ढिमकाना पार्टी की। लिहाज़ा फ़ैसला कर लिया था, अब पैरोकारिता नहीं करनी, अगर पेट ही पालना है तो कोई पारचून की दूकान ही खोल ली जाए। कुछ महीनें डिप्रेशन में भी गया, बैंक बैलेंस ख़ाली होता गया लेकिन दोस्तों का बैलेंस बढ़ता गया।
मैं हूं बड़ा ज़िद्दी क़िस्म का इंसान, जब ठान ली तो फिर ठान ली, चाहे कुछ भी हो जाए। इसका ख़ामियाज़ा मैं भी भुगतता हूं और मेरी बीवी, बच्चा, माता, पिता सभी। लेकिन वह कहते हैं ”SIGNATURE AND NATURE CAN NOT BE CHANGED”.. वही मेरे साथ भी हुआ, परेशानियां आईं, यहां तक कि खाना क्या बनेगा, बेटा कैसे पढ़ेगा, माता जी की दवा कहां से आएगी। पर आप लोगों की दुआएं और दोस्तों के साथ ने सारी मुश्किलों से पार लगा दिया।
जो मैंने फ़ैसला किया था उसी पर अडिग रहा, कैमरे की चमक से दूर चला गया, लेकिन इस सैयद को आपकी इज़्ज़त और प्यार अभी भी मिलेगा ये मुझे भरोसा है। ख़ुशी इस बात की है कि अब एक बार फिर मैं पत्रकारिता कर रहा हूं, जिस फ़ितूर के लिए मैं पत्रकार बना था। आज एक बार फिर वहीं हूं, जी हां सैयद हुसैन अब एक बार फिर स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट बन गया है। दुनिया की तरह ज़िंदगी भी गोल ही है, 10 साल पहले स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट के तौर पर करियर का आग़ाज़ हुआ था और आज फिर पत्रकारिता के कीड़े ने मुझे पहुंचा दिया ‘स्पोर्ट्सकीड़ा’, जहां पैरोकारिता नहीं बल्कि पत्रकारिता कर रहा हूं। भले ही कैमरे की चमक धमक, चेहरे पर ‘बिरला पुट्टी’ (MAKEUP) और एंकर का टशन न हो। लेकिन अब आइना देखता हूं तो तसल्ली होती है, और दिल यही कहता है वही करे जो मन कहे और जिसके लिए ज़मीर न बेचनी पड़े।
बस एक गुज़ारिश है, वैसे पत्रकार इसे अन्यथा में न लें जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हैं और उन्हें लगता है कि मैं उन पर निशाना साध रहा हूं। कतई नहीं, ये सिर्फ़ मेरी ज़ाती राय है हो सकता है आप में से कोई इससे इत्तेफ़ाक रखे और हो सकता है न भी रखे। लेकिन इसे जेनेरेलाइज़ न करें। और आप दोस्तों और चाहने वालों का प्यार ऐसा ही मुझे मिलता रहे बस इसकी दुआ करता हूं।
युवा पत्रकार सईद हुसैन के फेसबुक वॉल से. सईद कई चैनलों में काम कर चुके हैं. इन दिनों बैंगलोर में एक जानी मानी स्पोर्ट्स कंपनी SPORTSKEEDA में बतौर सीनियर प्रोड्यूसर/लेखक के तौर पर कार्यरत हैं. उनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.



Rajat Sharma
March 20, 2016 at 5:46 am
Hello syed sir, my story look like same as yours. But iam in first stage i.e. trying to enter in media because of cricket and sports. Sir can you give me any suggestions regarding my future Career.
Vikram Sen
March 20, 2016 at 1:04 pm
Well Done Saiyad Bhai.
ajay
March 25, 2016 at 9:07 am
Syed bhai ke sath kaam kiya hai..nice person good anchor
abbas
March 26, 2016 at 5:51 am
अच्छा लगा… काफी दिनों बाद तुम्हें पढ़ने का मौका मिला….जिंदगी में कामयाब रहो यहीं मेरी दुआ है……..एक नए सफर के लिए दिल से मुबारकबाद…..
तुम्हारा
Avinash chaudhary
March 26, 2016 at 5:33 pm
ठीक ऐसी ही स्टोरी मेरी भी है शैाक करा .बुराई के खिलाफ आवाज उठाई और नौकरी से बाहर .डिप्रेशन भी झेला पर हारा नही.क्योकि हारते वो ही है जो डरते है