शीतल पी सिंह-
विकासशील देशों में सिर्फ़ भारत ही ऐसा है जहाँ के सरकार समर्थित एक निजी औद्योगिक घराने ने ऐसी तरक़्क़ी की हो। हमारी मौजूदा सरकार की नीति ऐसे ही चंद उद्योगपतियों को देश के सारे संसाधनों का मालिक बना देने की है और बाकी लोगों के लिए सिर्फ़ एक विकल्प बचता है कि वे कैसे सस्ते से सस्ते लेकिन skilled कामगार बनें! ऐसे दौर में प्रतियोगिता खत्म हो जाती है और आविष्कार की भूख दम तोड़ देती है!
2014 में अडानी ग्रुप की कुल परिसंपत्तियों (ग्रॉस एसेट्स) का सटीक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्ट्स में स्पष्ट रूप से उल्लिखित नहीं है, लेकिन समूह के वित्तीय विस्तार से अनुमानित मूल्यांकन लगभग ₹1-1.5 लाख करोड़ के आसपास था। यह अनुमान समूह के तत्कालीन प्रमुख अधिग्रहणों (जैसे धामरा पोर्ट ₹5,500 करोड़ में) और बिजनेस कैपेसिटी (जैसे पावर में 9,280 MW) पर आधारित है। समूह का फोकस उस समय कोयला-आधारित ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स पर था, जिससे परिसंपत्तियों का मूल्यांकन मुख्य रूप से इन क्षेत्रों से जुड़ा था।
2014 तक अडानी ग्रुप मुख्य रूप से तीन प्रमुख बिजनेस क्लस्टर्स पर केंद्रित था: संसाधन (Resources), लॉजिस्टिक्स (Logistics), और ऊर्जा (Energy)। यहाँ प्रमुख क्षेत्रों और उनके स्तर का विवरण है:
- पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स (Adani Ports & SEZ): भारत का प्रमुख निजी पोर्ट ऑपरेटर। मुंद्रा पोर्ट मुख्य था, और 2014 में धामरा पोर्ट (ओडिशा) का अधिग्रहण किया गया। कुल कार्गो हैंडलिंग क्षमता लगभग 100-150 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) के आसपास, जिसमें मुंद्रा सबसे बड़ा था। यह समूह का प्रमुख राजस्व स्रोत था।
- पावर जनरेशन (Adani Power): भारत का सबसे बड़ा निजी थर्मल पावर प्रोड्यूसर। कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 9,280 MW थी, मुख्य रूप से कोयला-आधारित प्लांट्स (जैसे मुंद्रा, तेलंगाना)। यह क्षेत्र समूह की कुल परिसंपत्तियों का बड़ा हिस्सा था।
- माइनिंग और कोयला ट्रेडिंग (Adani Enterprises के तहत): कोयला आयात-निर्यात और माइनिंग में मजबूत। ऑस्ट्रेलिया में कार्माइकल कोल माइन प्रोजेक्ट (लागत $21.5 बिलियन) की शुरुआत 2014 में हुई। भारत में एकीकृत संसाधन प्रबंधन (IRM) के माध्यम से कोयला ट्रेडिंग प्रमुख थी।
- अन्य: सीमित रूप से रिन्यूएबल एनर्जी (सोलर पार्क की शुरुआत) और ट्रेडिंग, लेकिन कोर फोकस ऊपर वाले तीन पर। कुल राजस्व का 60% से अधिक कोयला-संबंधित बिजनेस से आता था।
वर्तमान (2025) में परिसंपत्तियाँ और व्यापार के क्षेत्र
2025 में अडानी ग्रुप की कुल परिसंपत्तियाँ (ग्रॉस एसेट्स) H1 FY26 (सितंबर 2025 तक) में ₹6.77 लाख करोड़ ($76 बिलियन) तक पहुँच गई हैं। FY25 के अंत में यह ₹6.1 लाख करोड़ ($71.2 बिलियन) थी। समूह ने H1 में ₹67,870 करोड़ के नए एसेट्स जोड़े, जो FY26 के पूरे वर्ष के ₹1.5 लाख करोड़ कैपेक्स टारगेट की ओर इशारा करता है। रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) 15.1% है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में वैश्विक स्तर पर उच्च है।
वर्तमान में समूह 10+ लिस्टेड कंपनियों के माध्यम से विविधीकृत है, जिसमें कोर इंफ्रास्ट्रक्चर (यूटिलिटीज, ट्रांसपोर्ट, इंफ्रा) से 83% EBITDA आता है। प्रमुख क्षेत्र और स्तर:
- पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स (Adani Ports & SEZ): भारत का सबसे बड़ा निजी पोर्ट ऑपरेटर। H1 2025 में 244 MMT कार्गो हैंडल किया, जिसमें कंटेनर वॉल्यूम 20% बढ़ा। 13 पोर्ट्स, SEZ, और इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स; श्रीलंका में कोलंबो टर्मिनल भी।
- पावर जनरेशन (Adani Power): थर्मल पावर में 12,000+ MW कैपेसिटी। H1 में ₹11,761 करोड़ नए एसेट्स जोड़े।
- रिन्यूएबल एनर्जी (Adani Green Energy): एशिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल पोर्टफोलियो, 17.5 GW ऑपरेशनल कैपेसिटी (सोलर, विंड, हाइब्रिड)। H1 में ₹12,314 करोड़ नए एसेट्स; 25 GW टारगेट की ओर।
- ट्रांसमिशन और गैस (Adani Energy Solutions, Adani Total Gas): पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD)। टोटल एनर्जीज के साथ JV।
- एयरपोर्ट्स (Adani Enterprises के तहत): 7 प्रमुख एयरपोर्ट्स (मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ आदि) का संचालन। H1 में 43% EBITDA ग्रोथ।
- माइनिंग और IRM (Adani Enterprises): कोयला माइनिंग (ऑस्ट्रेलिया सहित), कमर्शियल माइनिंग। H1 में वॉल्यूम में गिरावट लेकिन मजबूत।
- नए ऊर्जा इकोसिस्टम (Adani New Industries): ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर मैन्युफैक्चरिंग। विंड टर्बाइन सप्लाई 87% बढ़ी।
- अन्य: सीमेंट (अंबुजा और ACC, $10.5 बिलियन अधिग्रहण), FMCG (अडानी विल्मर – फॉर्च्यून ब्रांड), रोड्स, डेटा सेंटर्स, डिफेंस (एंटी-सबमरीन सोनोबॉयज मैन्युफैक्चरिंग), रियल एस्टेट, एग्रीबिजनेस।
समूह का फोकस अब सस्टेनेबिलिटी और नेशनल इंफ्रा पर है, जिसमें 90% EBITDA AA+ रेटेड एसेट्स से आता है। डेट कॉस्ट 7.9% पर कम हुई है।
उपरोक्त विवरणों में अडानी समूह के विदेशों में पार्क परिसंपत्तियों / कैश का लेखाजोखा शामिल नहीं है। गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी उसे सँभालते हैं और भारत में ऐसेट्स अधिग्रहण करते समय अनेक बार उनके द्वारा दुनिया के टैक्स हैवेन्स में खोली गई कंपनियों के जाल से निवेश आता है। देश के अनेक राजनीतिक नेताओं का पैसा इन सब में लगे होने की सरगोशियां आम हैं लेकिन देश में किसी जांच के खतरे से बाहर फ़िलहाल यह तरक़्क़ी निर्बाध जारी है।
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