रविंद्र पटवाल-
अभी बेटे का फोन आया कि अडानी के शेयर बिकवा कर आपने मेरा 50,000 का नुकसान करवा दिया.
असल में परसों उसने पूछा था तो मैंने कहा तुरंत बेच डालो. उसने अभी हाल ही में ये सब करना शुरू किया है.
कल उसने कुछ हजार रूपये के घाटे में बेच डाले.
आज अडानी एनर्जी 20% चढ़ गया है, यानि 470 वाला 525 के भाव बिक रहा है.
ये सब आज अडानी समूह, ndtv और ani सबकी कृपा का कमाल लगता है, वर्ना इन दो दिनों में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है कि अडानी समूह की इज्जत पर लगे बट्टे को कहीं से भी चार चाँद लग गये हों.
उसकी दिमागी हालत पर मैं कुछ नहीं कह सकता. मैंने कहा, जाओ ले लो फिर और जो करना है करो, मुझसे पूछने फिर मत आना.
मेरे जानने वाले रिश्तेदार गेमिंग एप्प में दो चार लाख नहीं 40-50 लाख गंवाकर आज दिवालिया हो चुके हैं. बेटे को पता है कि बाप इस मामले में कसाई है, इसलिए सावधान रहेगा.
हर चमकती चीज हीरा नहीं होती. कई बार आपको लूटने के लिए पत्थर को हीरे की शक्ल में तरासकर बहेलिये घात लगाकर बैठे होते हैं.
कुछ प्रतिक्रियाएं-
प्रेरणा गर्ग- मेरे पति भी अडानी अंबानी का इसीलिए फेवर करते हैं कि उनके शेयर हैं उनके पास.
शाहिद अख्तर- दो वकील के बयान आए हैं। उनके बल पर उछले हैं ये शेयर।
दिनेश राजगढ़िया- पूरा तंत्र है समझाने को. मोदी से संबंध देखिये! डूब ही नहीं सकता. नीचे आ गया मतलब खरीदी का यही समय!! डूबते अडानी को तिनके का सहारा देने नीचे के लोग चले आते है
अम्बुज गुप्ता- अडानी इनसाइडर ट्रेडिंग का पक्का खिलाडी है। उसके शेयर नीचे जाएं तो उसके पास इतने संसाधन हैं कि खरीदी करवाकर शेयर को ऊपर कर लेगा।

सौमित्र रॉय-
भारत सरकार के वकील ने अमेरिकी कोर्ट में दावा किया है कि वहां की एजेंसी एसईसीसी के अभियोग में अदानी और उसके भतीजे का नाम नहीं है। एक अदानी को बचाने के लिए भारत का सरकारी वकील अमेरिकी कोर्ट को आधा सच बता रहा है।
क्यों? क्योंकि, अदानी के पीछे नरेंद्र मोदी खड़े हैं। अगर अदानी फँसेंगे तो वह मोदी को भी अपने साथ ले डूबेंगे।
अदानी ने भारत के बैंकों से 95 हजार करोड़ का लोन लिया है।
भारत का सरकारी वकील इसलिए भी आधा सच बोल रहा है, क्योंकि अदानी डूबा तो भारत के बैंक डूबेंगे।
मोदी सत्ता ने इस साल कॉरपोरेट्स के अपने दोस्तों के पौने 2 लाख करोड़ के लोन माफ किए हैं।
क्या अदानी के 95 हजार करोड़ माफ नहीं किए जा सकते?
बिल्कुल हो सकते हैं और हमेशा की तरह इस पैसे को भारत की 140 करोड़ भेड़ें अपना खून और गुर्दा बेचकर चुका भी देंगी।
ये वही कौम है, जो कर्नाटक में बिजली के मीटर के 950₹ और आंध्र में अदानी के स्मार्ट मीटर के 12 हजार चुका रही है।
बाजारवादी उपभोग ने हमें किसी काम का नहीं छोड़ा।

पुष्य मित्र-
पहले मुझे लगा था अदानी ने अमेरिका में कोई गड़बड़ी की है। मगर आज के हिंदुस्तान टाइम्स में पूरे मामले को विस्तार से पढ़ने पर समझ आया कि दरअसल पूरी गड़बड़ी भारत में हुई है। अमेरिका सिर्फ इसलिए अदानी पर आरोप लगा रहा है क्योंकि उसके निवेशकों का पैसा अदानी पावर में लगा है।
संक्षेप में
अदानी पावर ने भारत सरकार की सोलर पावर को बढ़ावा देने वाली स्कीम से सब्सिडी लेकर सोलर पावर पैदा किया।
इसके बाद उसने ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर सरकार को घूस देकर ऊंची दर वाले सोलर बिजली आपूर्ति के अधिकार हासिल किए।
जो उसे नहीं करना था, क्योंकि उसे केंद्र सरकार से सब्सिडी मिली थी, इसलिए रेट कम होना चाहिए था और यह जानकारी संबंधित राज्य सरकारों को देनी चाहिए थी।
मगर यह सब हुआ। हैरत की बात है कि इस मामले में अपने देश की ED जैसी एजेंसियां बिल्कुल सक्रिय नहीं हुई। इस पर नजर पड़ी अमेरिकी एजेंसियों की जिन्हें इस मामले से कोई घाटा नहीं था। उनके निवेशकों को तो फायदा ही होता।
नुकसान तो सिर्फ संबंधित राज्यों के बिजली उपभोक्ताओं का है, जिन्हें इस बारे में कुछ पता नहीं।
खैर, यह क्रोनी कैपिटलिजम का आदर्श केस है। समझ लीजिए।




