आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के दिन अडानी सेठ ने तहलका मचा रखा है। देश के बड़े पत्रकारों जो अब फुल टाइम यूट्यूबर्स बन चुके हैं, को ई-मेल से उससे संबंधित वीडियो हटाने का नोटिस भिजवाया है। इसे लेकर पूरा इंटरनेट विरोध से भरा हुआ है।
नीचे पढ़िए कुछ प्रतिक्रियाएं और पिछली खबरें…
शीतल पी सिंह-
सरकार ने आदेश निकाला है कि देश के कई प्रमुख पत्रकारों, जिनमें ठाकुरता, अभिसार शर्मा, ध्रुव राठी, रवीश कुमार, अजीत अंजुम आदि अनेक शामिल हैं, वे तुरंत देशसेठ गौतम अड़ानी और उनकी कंपनियों की कारगुज़ारियों से संबंधित अपने सभी वीडियो यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया माध्यमों से हटा लें ।
इसके पहले एक निचली अदालत ने पत्रकारों को अड़ानी से संबंधित मामलों पर वीडियो बनाने, लेख लिखने और समाचार प्रसारित करने से रोक दिया था । सरकार ने इसी आदेश का हवाला दिया है और बिजली की गति से यह आदेश जारी किया है ।
देश में अभी भी मोदीजी पर वीडियो बनाये जा सकते हैं और बनाए जा रहे हैं लेकिन अब देशवासियों को देशसेठ अड़ानी जी के संबंध में यह आज़ादी नहीं है!
भारत माता की जय
अजीत अंजुम-
अडानी का नाम लेना अब गुनाह हो गया? दिल्ली की एक अदालत के आदेश के बाद सूचना प्रसारण मंत्रालय और यूट्यूब की तरफ़ से मुझे 24 वीडियो को डिलीट करने का फरमान आया है.
अडानी के जिन वीडियो को हटाने के मुझे निर्देश मिले हैं, उनमें प्रशांत भूषण, यशवंत सिन्हा, सुचेता दलाल और सुब्रमण्यम स्वामी के इंटरव्यू भी शामिल हैं. कुछ वीडियो में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भाषण के हिस्से हैं. सुप्रिया श्रीनेत की पीसी है. इंडियन एक्सप्रेस और कुछ अखबारों की रिपोर्ट के हवाले से बनाए गए वीडियो हैं. ऐसा लग रहा है जैसे अडानी का नाम जिस भी विडियो में लिया गया है, उन सबको हटाने का फरमान है.

हमारा पक्ष न तो सुना गया. न ही हम किसी मुकदमें में पार्टी हैं. बस फरमान है कि अडानी का जहां भी नाम लिया गया, सबको हटा दो. द वायर और न्यूज़लौंड्री समेत रवीश कुमार ध्रुव राठी, अभिसार शर्मा, आकाश बनर्जी समेत कई और लोगों को ये फरमान मिला है.
कृष्ण कांत-
अडानी और अंबानी को बस भगवान घोषित करना बाक़ी रह गया है। किसी अदालत या सरकार को यह शुभ काम भी कर देना चाहिए।
दिल्ली की एक अदालत के आदेश के बाद सूचना प्रसारण मंत्रालय और यूट्यूब ने कई पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को फरमान भेजा है कि अडानी से जुड़े सारे वीडियो हटा दें।
जिन्हें नोटिस दिया गया है, उनमें द वायर, न्यूजलॉन्ड्री, रवीश कुमार, अजीत अंजुम, अभिसार शर्मा, ध्रुव राठी, आकाश बनर्जी, प्रज्ञा जैसे प्रमुख चैनल और पत्रकार हैं। अगर इन्होंने खुद से वीडियो डिलीट नहीं किया तो यूट्यूब खुद डिलीट कर देगा।
क्या अब इस देश में अडानी का नाम लेना या उनपर लगे आरोपों की चर्चा करना गुनाह हो गया है? क्या जिसके लिए आदेश पारित किया जा रहा है, अदालत ने उसका पक्ष जानना जरूरी नहीं समझा? न कोई नोटिस, न किसी को तलब किया, न किसी को सुना, बस फैसला सुना दिया।
जिस अडानी पर भारत के अलावा, दुनिया भर में भ्रष्टाचार के आरोप हैं, सरकार और अदालतें उनकी आलोचना पर भी प्रतिबंध लगा रही हैं। यहां लोकतंत्र है या स्थायी आपातकाल लागू किया जा चुका है?
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