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प्रोफेसर अली महमूदाबाद पर FIR हुई किस बात पर? कराने वाली रेनू भाटिया को ही नहीं पता, देखें वीडियो

अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी को लेकर चौतरफा आलोचना हो रही है। और तो जिस हरियाणा महिला आयोग की पदाधिकारी की तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई है उसे खुद नहीं पता कि उसने प्रोफेसर पर यह मुकदमा दर्ज कराया तो आखिर क्यों… इंडिया टुडे का 8 मिनट का एक वीडियो वायरल है। जिसमें एंकर प्रीती चौधरी महिला आयोग की पदाधिकारी से बार-बार यही पूछ रही कि प्रोफेसर की पोस्ट में वो चीज बताइये जिसे लेकर मुकदमा कराया। महिला पदाधिकारी एंकर के सवाल पर ईरान तूरान ताकने लगती है। लोग इस प्रकरण को न्यूजक्लिक रेड केस से भी जोड़कर देख रहे हैं। 14 मई 2024 को कोर्ट द्वारा इस पूरे प्रकरण और गिरफ्तारी इत्यादि को अवैध करार दिया था।

नीचे एक एक कर पढ़ें, और वीडियो भी देखें….


अजीत अंजुम-

आठ मिनट का ये वीडियो जरुर देखिए. हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन को एक्सपोज़ करने के लिए उनके ही जवाब काफ़ी हैं. इन्होंने प्रोफ़ेसर महमूदाबाद को जेल तो गिरफ्तार तो करवा दिया लेकिन एक सवाल का जवाब देने में दायें -बायें कर रही हैं .

प्रीती चौधरी को बधाई. एक रिपोर्टर और एंकर का यही धर्म होता है. सच सामने लाए. झूठ को एक्सपोज़ करे. प्रीती आपने सही तरीक़े से इस महिला को ग्रिल किया है. इन्होंने प्रोफ़ेसर महमूदाबाद के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करवाकर जेल भिजवा दिया है लेकिन इनके पास कहने को कुछ नहीं है. लानत है ऐसे महिला आयोग पर ..

महिला आयोग की चेयरपर्सन एक लाइन ऐसा नहीं बता रही हैं, जो प्रोफ़ेसर ने ग़लत लिखा हो और जिसके आधार पर उन्हें एंटी नेशनल कह दिया जाए.


उर्मिलेश-

Prof Ali khan Mahmudabad को मैं निजी तौर पर नहीं जानता. कभी मिला नहीं. मेरे कई मित्र उन्हें अच्छी तरह जानते हैं. उनकी वह पोस्ट कई बार पढ़ ली, जिसकी वजह से उन्हें गिरफ्तार किया बताया गया है.

हिंदी का पत्रकार-लेखक हूं पर थोड़ी-बहुत अंग्रेजी मैं भी समझ लेता हूं. मुझे तो Ashoka University के इस युवा प्रोफेसर की उक्त पोस्ट में देश और सेना के किसी अधिकारी के विरुद्ध कुछ भी नहीं नज़र आया. फिर इन्हें गिरफ्तार क्यों किया गया है?

क्या भाजपा से जुड़े कुछ लोगों की शिकायत को आधार बनाकर पुलिस ने गिरफ्तार किया? क्या उसने अपनी तरफ से उक्त शिकायत की कोई पडताल की? क्या देश में यही नियम बन जायेगा कि भाजपा के लोग जिसे चाहें, उसे फौरन गिरफ्तार कर लिया जाय!

अशोका विश्वविद्यालय के बेहद प्रतिभावान प्रोफेसर की गिरफ्तारी पूरी तरह औचित्यहीन नज़र आती है. ऐसा करके शासन देश के एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर को सिर्फ अपमानित ही नहीं कर रहा, नागरिक-जीवन में वह प्रोफेसर की एक ऐसी विकृत छवि बनाने की कोशिश कर रहा है, जो उनकी वास्तविक छवि और शख्सियत के बिल्कुल उलट है!

देश-विदेश में शिक्षा पाये प्रो महमूदाबाद देश के बहुत प्रतिष्ठित स्वाधीनता सेनानियों के परिवार से आते हैं, जिस परिवार के लोगों ने लखनऊ के अनेक शिक्षण संस्थानों के अलावा अलीगढ मुस्लिम युनिवर्सिटी की स्थापना में बहुत उल्लेखनीय योगदान दिया था.

प्रो महमूदाबाद ने अपनी Ph.D. कैंब्रिज विश्वविद्यालय से की है. वह बहुत कम उम्र में ही देश के एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर, छात्रों के पसंदीदा शिक्षक और विद्वान लेखक हैं. अचरज कि भाजपा के कुछ लोगों की शिकायत के बाद पुलिस ने देश के ऐसे गणमान्य व्यक्ति को फौरन गिरफ्तार कर लिया है. मुझे पूरा विश्वास है, इस मामले में न्यायपालिका यथाशीघ्र न्याय करेगी..

Immediately release Associate Professor of Ashoka University Dr Ali Khan Mahmudabad who is innocent & faultless.


कृष्ण कांत-

आपको न्यूज़क्लिक याद है? आरोप लगाया गया था कि यह संस्थान देशद्रोही गतिविधियों में लिप्त है। चीन से फंडिंग लेता है। वगैरह वगैरह… इसके संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। न्यूजक्लिक लगभग बंद हो गया। दर्जनों पत्रकारों के यहां छापा पड़ा। उनको जीविका का संकट खड़ा हो गया।

अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रबीर पुरकायस्थ की गिरफ़्तारी अवैध है और उनको बिना शर्त रिहा किया जाए। तब 14 मई 2024 को कोर्ट के इस आदेश पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई क्योंकि माहौल अलग था।

जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने कहा कि पुरकायस्थ की गिरफ़्तारी और उसके बाद उन्हें हिरासत में रखना क़ानून की नज़र में अवैध है। पुरकायस्थ की गिरफ़्तारी के समय ये नहीं बताया गया कि इसका आधार क्या था। इसकी वजह से गिरफ़्तारी निरस्त की जाती है और पुरकायस्थ को बिना किसी शर्त के रिहा किया जाए।

पुरकायस्थ बीते साल अक्तूबर से यूएपीए के तहत जेल में थे। इसी मामले में पत्रकार उर्मिलेश, प्रांजय गुहा, अभिसार शर्मा, अनिंद्यो चक्रवर्ती, भाषा सिंह और इतिहासकार सोहेल हाशमी समेत कई पत्रकारों के यहां छापा मारा गया था।

हालांकि, अभी केस ट्रायल पर जाएगा, और अंतिम फैसला आना बाकी है। लेकिन पुरकायस्थ को रिहा करने का निर्णय बताता है कि कैसे बुनियादी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना एक संस्थान पर कार्रवाई की गई ताकि उसे चुप कराया जा सके।

न्यूजक्लिक पर जो आरोप लगाए गए, जिस तरह कार्रवाई हुई, उसी से साफ था कि पूरी प्रक्रिया दुर्भावना पूर्ण बदले की कार्रवाई थी। पूरा गोदी मीडिया भजन करता है लेकिन एक दो छोटे संस्थान चार छह लेख छाप देते हैं तो सरकार का सिंहासन डोलने लगता है।

इसके पहले इतना छुईमुई कोई सरकार नहीं थी कि दो चार पत्रकारों की जबान और कलम चले तो सरकार कांपने लगे।

आज अशोक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान की गिरफ्तारी पर सवाल उठ रहे हैं तो उसी तरह बकवास किया जा रहा है जैसे पहले के मामलों में किया जाता रहा है। लोकतंत्र को ऐसे राजतंत्र में बदला जा रहा है जहां सनकी राजा का वचन ही शासन है और किसी को आवाज उठाने की इजाजत नहीं है।

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