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अनिरुद्धाचार्य को प्रेमानंद से सीखना चाहिए अन्यथा टीवी पर लगातार बेइज्जती, डुबो देती है

अनुपम के सिंह-

अनिरुद्धाचार्य और उनकी दिखास की बीमारी ही सबसे बड़ी वजह है। सब कोई सब कुछ का विशेषज्ञ नहीं हो सकता। कपिल मुनि सांख्य दर्शन के प्रवर्तक थे, पतंजलि योग-सूत्र पर बात करते थे, गौतम ऋषि ने न्याय संहिता में विशेषज्ञता हासिल की, वशिष्ठ-विश्वामित्र धर्म एवं राजनीति में निपुण थे, परशुराम युद्ध-कला में दक्ष थे और पाणिनि ने भाषा और व्याकरण के क्षेत्र में विश्व के ज्ञानकोष को भरा।

अनिरुद्धाचार्य भजन, भक्ति एवं सेवा के कार्यों में रत हैं। उन्हें मनोवैज्ञानिक नहीं बनना चाहिए, दार्शनिक नहीं बनना चाहिए। भक्त सामान्यतः दार्शनिक नहीं होता। भक्त तो भगवान की लीलाओं में मगन रहता है, सब कुछ को अपने आराध्य की लीला समझ कर आत्मसात करता है। अगर अनिरुद्धाचार्य को इंटरव्यू देना चाहिए तो वृद्ध महिलाओं की सेवा के लिए वो जो आश्रम चला रहे हैं, उस पर। अगर उन्हें टीवी पर बहस में हिस्सा लेना है तो सवाल गौसेवा पर पूछे जाएँ। अगर उन्हें पॉडकास्ट में जाना ही है तो वो राधा-कृष्ण की कथा और उसके प्रभाव की बात करें। न्यूटन, स्टीव जॉब्स, एप्पल और कैंसर उनका क्षेत्र नहीं है, इस पर वो बात करेंगे तो फँसेंगे।

अनिरुद्धाचार्य शास्त्र की ही बात करें, दर्शन से जुड़ी चीजों को पर सामने वाले को चुप कराने के लिए सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर्याप्त हैं, मजाकिया लहजे में बात को उड़ा कर सामने वाले पर ही ठहाका लगा देने के लिए बाबा रामदेव काफी हैं, देहाती लहजे में बड़े-बड़े सवालों का हल्के अंदाज में उत्तर देना बागेश्वर धाम वाले बाबा धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने सीख लिया है और UN से लेकर क्लाइमेट चेंज तक जैसे विषयों पर बात करने के लिए वो श्री श्री रविशंकर को छोड़ दें।

अनिरुद्धाचार्य को प्रेमानंद बाबा से सीखना चाहिए, वो भी राधा-भक्ति के साधक हैं, भक्ति में रम कर भजन करते हैं, रोज सैकड़ों लोगों से बातें करते हैं। शास्त्र से उद्धरण देकर बातें करते हैं। भजन करते हैं, नाच-गान होता है। कभी-कभी दर्शन की बातें कर लेते हैं लेकिन वो भी शास्त्रों के श्लोक पढ़ कर। अनिरुद्धाचार्य को यही तरीका अपनाना चाहिए।

हाँ, अजीबोगरीब सवाल पूछने वालों को Savage जवाब देने की कला उनके पास है, इस कारण कई बार उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी होते हैं। उस समय वो मंच पर आसन पर आसीन होते हैं, लेकिन टीवी डिबेट्स में वो अपने ही प्रवचनों में कही गई बातों को लेकर फँस जाते हैं। इसीलिए, उन्हें विषय पर ही रहना चाहिए, विषय से अगर कभी भटकना भी है तो उस क्षेत्र में पढ़ने या फिर अपने आसपास के लोगों से उस संबंध में चर्चा कर के ही बोलें। उनकी जिस तरह से बेइज़्ज़ती हो रही है टीवी पर लगातार, उससे भक्तों में गलत सन्देश जा रहा है। उनकी अपनी छवि ख़राब हो ही रही है, साथ-साथ अन्य साधु-संतों को भी लोग शक की निगाह से देखेंगे। प्रदीप मिश्रा, मोरारी बापू और राजन जी महाराज जैसे कई कथावाचक हैं। अलग-अलग मौकों पर एकाध बार विवाद में आ जाना अलग बात है, हर टीवी डिबेट में जाकर Woke और हिन्दू विरोधियों से बेइज़्ज़त होना अलग बात।


आभा शुक्ला-

अनिरुद्धाचार्य को टाइम्स नाउ ने अपने शो में बुलाया, और उनके लिए गोबर मंगाया गया. बाबा ही कहते थे कि “गाय को गेहूँ खिलाकर, फिर गोबर से गेहूं निकालकर पीसकर स्त्री को उसकी रोटी खिलाने से वो गर्भवती हो जाती है”

चैनल के एंकर ने बाबा को गोबर ग्रहण करने को कहा तो बाबा आनाकानी करने लगा, फिर एंकर महाशय ने बाबा को लाइव जमकर खरी खोटी सुनाई…पहली बार किसी चैनल ने साइंटिफिक टेम्परामेंट से काम किया है.

यह वीडियो भी देखें कि कैसे एक श्रोता ने बाबाजी की बुद्धि हिरन कर दी….

सोर्स : एक्स

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