श्याम मीरा सिंह-
पहले एक्टिविस्ट- तीस्ता सीतलवाड
फिर फ़ैक्ट चेकर- जुबेर
फिर पत्रकार- रूपेश कुमार
और अब फ़िल्म डायरेक्टर और लेखक- अविनाश दास को आज अरेस्ट कर लिया गया। बोलने वाली आवाज़ों को इस देश में रहना मुश्किल है। पर आप सब चुप रहिए। देखते रहिए नए श्रीलंका को।

नवीन कुमार-
ये तस्वीर पिछले कई महीने से लुका छिपी का खेल खेल रही थी। हम सब इसे टालना चाहते थे। लेकिन फ्रेम मिल ही गया। Avinash Das को गुजरात पुलिस ने मुम्बई से गिरफ्तार कर लिया है। आरोप वही – एक ट्वीट। लेकिन अविनाश की तनी हुई मुट्ठियाँ हौसला देती हैं। इस निर्मम और ज़ालिम दौर में ऐसी बहुत सारी मुट्ठियाँ पूरी ताकत से तनी रहें। उन तनी हुई मुट्ठियों के साथ हम अविनाश के साथ खड़े हों। निर्भय होकर।
राजकुमार सिंह-
अभी कुछ ही देर पहले पत्रकार, ब्लॉगर, फ़िल्म निर्देशक और पटकथा लेखक अविनाश दास को अपने घर से आफिस के लिए निकलते ही गुजरात पुलिस की क्राइम ब्रांच के लोग उठाकर ले गए। उनकी जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। पुलिस को यह नहीं करना था। हम लोग जरूरी कानूनी सलाह ले रहे हैं।


ज्ञात हो ढाई महीने पहले गुजरात के अहमदाबाद में अविनाश के खिलाफ दो मामले दर्ज हुए थे. एक मामले में राष्ट्रीय प्रतीक के अपमान का आरोप बताया गया. पब्लिक डोमेन की एक मशहूर पेंटिंग को अविनाश ने ट्वीट किया था. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है. अग्रिम जमानत पर सुनवाई होनी है, उससे पहले ही अविनाश को गिरफ्तार कर लिया गया.
राकेश कायस्थ-
लेखक फिल्मकार अविनाश दास को गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।अविनाश से बरसों पुराना व्यक्तिगत परिचय है। उनकी पत्नी और बेटी किस तरह की मानसिक यंत्रणा से गुजर रही होंगी यह सोचकर मन व्यथित है।
यह यंत्रणा हर उस व्यक्ति और उस परिवार की है, जो मौजूदा समय मुँह खोलने का साहस रखता है। आप पत्रकारों की लिस्ट बनाकर देख लीजिये। सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाला कोई भी बड़ा नाम पुलिस, आईटी और ईडी के प्रकोप से बचा हुआ नहीं है। जो बचे हैं, वे इस बात के लिए तैयार बैठे हैं कि अगला नंबर उनका हो सकता है।
कहना मुश्किल है कि डराने की इस तरह की संस्थागत कोशिशों से पूरा देश सचमुच डर जाएगा या फिर डर बिल्कुल खत्म हो जाएगा। संक्षेप में कहानी यह है कि अगर आप बोलना चाहते हैं तो कीमत चुकाने के लिए भी तैयार रहिये।
एक छोटा सा मशविरा ज़रूर है। हो सके तो लतीफेबाजी से बचिये क्योंकि सरकार अर्थव्यवस्था के आँकड़े पढ़े या ना पढ़े चुटकुले बहुत ध्यान से पढ़ती है। लतीफों की बकायदा मॉनीटरिंग होती है और त्वरित कार्रवाई की जाती है। बहुत छोटी सी बात के लिए हफ्ते-दस की मानसिक यंत्रणा कोई अच्छा सौदा नहीं है।
अभिषेक श्रीवास्तव-
दो गिरफ्तारियां… ध्यान रहे, रूपेश सिंह और अविनाश दास दोनों मध्यवर्गीय सवर्ण शहरी हिंदू हैं। एक के बाद एक दोनों उठाए गए हैं। मने हिंदू भी खतरे में है। वाकई! भाजपा वाले झूठ नहीं बोलते। बाकी, मुस्लिम तो खतरे में है ही। ईसाई भी है। बहुजन और आदिवासी भी खतरे में है। और किसी का टिकट बाकी है भाई? पूरी आबादी तो नप गई!
जब सबका टिकट कट ही चुका है, बस यात्रा की तारीख का सामने आना ही बचा है, तब काहे का दलितवाद, पिछड़ावाद, अल्पसंख्यकवाद, हिंदूवाद, आदिवासी/गैर-आदिवासी..? अगर ये क्षुद्र विभाजन अब भी बने हुए हैं और आप इन विभाजनों की वैधता का तर्क सोच रहे हैं, तो यकीन मानिए कोई भी खतरे में नहीं है, और आप सबसे ज्यादा महफूज़ हैं। आपका सारा रोना धोना झूठा है। बेईमानी है।
पहचान की राजनीति के नुकसान को समझिए, दोस्तों। मिलिए-जुलिए। साथ बैठिए। अगर है, तो इस समय पूरा देश खतरे में है। इसे समझना बहुत सिम्पल है। बस, अपनी-अपनी पूंछ काट कर सोचना होगा। मूंछ और पूंछ दोनों एक सभ्य और तर्कशील मनुष्य की पहचान नहीं हैं। समझिए, फिर दूसरों के लिए बोलिए। ताकि हमारे लिए कल को बोलने वाला बचा रहे कोई।



vinaygoel
July 19, 2022 at 4:55 pm
हर जोर जुलम की टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है
Amit Kumar
July 20, 2022 at 10:30 am
Kya bakwaas Kiya, mujhe to kuchh samajh mein hi nahin aaya. Lekin bolne ki azaadi chaahiye, isliye kuchh bhi bol lo, chaahe bilkul hi bematlab ho.
Harish Chandra IAS r
July 21, 2022 at 1:16 pm
Mr Amit Kumar,you are slave & blind beliver.you can’t understand the sprit of freedom of expressing and liberty . It’s the most prize possession of mankind which should be safeguarded at all cost.I suport Sri Abinash Das and all’those who are fighting for freedom of expression.& liberty. A Big salute to Abinash and other fighters.
Harish Chandra IAS r