इक़बाल खान-
बांदा। उत्तर प्रदेश सरकार ने पत्रकारों और शासन-प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए सात साल से बंद पड़ी जनपद स्तरीय स्थायी समिति को दोबारा शुरू किया है। लेकिन बांदा में इस समिति के गठन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जिला सूचना अधिकारी रामजी दुबे ने शासन की मंशा के विपरीत मानकों को ताक पर रखकर अपने निजी हितों को साधने वाली समिति बना दी।
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि समिति में शामिल किए गए कई नाम विवादित हैं। इनमें सुनील गुप्ता और दिलीप गुप्ता दो सगे भाई हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने कभी पत्रकारों के हितों में कोई कार्य नहीं किया, बल्कि प्रेस क्लब पर कब्जा जमाकर रखा हुआ है। इसके अलावा समिति में शामिल रोहित कुमार साहू, जो जिले के एक बड़े होटल व्यवसायी हैं, उन्हें फोटोग्राफर के तौर पर मान्यता मिली है। बताया जा रहा है कि जिन अखबार से उनकी मान्यता है, उसकी छपाई लखनऊ में होती है और उस अखबार की डीएवीपी मान्यता भी पहले ही निरस्त की जा चुकी है।


इसी तरह सुनील गुप्ता और दिलीप गुप्ता की मान्यता भी स्थानीय स्तर के अखबारों से है, जिनकी छपाई लखनऊ में होती है। पत्रकारों का कहना है कि दोनों भाई पत्रकारिता से ज्यादा व्यापारिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। वहीं, समिति गठन की प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता नहीं बरती गई। सूचना कार्यालय ने इस संबंध में कोई प्रचार-प्रसार तक नहीं किया।
सूचना कार्यालय में भ्रष्टाचार के आरोप
बांदा का सूचना कार्यालय इन दिनों लगातार भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सुर्खियों में है। ताज़ा मामला मान्यता कार्डों से जुड़ा है। आरोप है कि एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर दो अलग-अलग लोगों को प्रेस मान्यता कार्ड जारी कर दिए गए।
जानकारी के मुताबिक, जनपद स्तरीय स्थायी समिति में शामिल दैनिक श्री इंडिया के फोटोग्राफर रोहित कुमार साहू का प्रेस मान्यता कार्ड संख्या 5 है। वहीं, उर्दू दैनिक कौमी मुकाम (चित्रकूट से प्रकाशित) के ललित किशोर तिवारी का मान्यता कार्ड भी इसी संख्या 5 पर जारी किया गया है।
यह लापरवाही साबित करती है कि बांदा का सूचना कार्यालय पूरी तरह से गड़बड़झाले और भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। जिले के कई पत्रकारों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
पत्रकार हितों में ‘अपानवायु’ तक दान न करने वाले बने स्थायी समिति के सदस्य!
आशीष सागर दीक्षित-
बांदा। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में पत्रकारों और शासन-प्रशासन के बीच समन्वय बनाने के लिए जनपद स्तरीय स्थायी समिति के गठन का निर्देश दिया। लेकिन बांदा में इस समिति के गठन ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिला सूचना अधिकारी रामजी दुबे पर आरोप है कि समिति का गठन पूरी तरह गोपनीय और मनमाने तरीके से किया गया। इसमें दो सगे भाई — सुनील गुप्ता (दैनिक नवकर्म युग) और दिलीप गुप्ता (साप्ताहिक तुलसी दर्पण) को सदस्य बना दिया गया, जिन पर पत्रकारिता की जगह व्यापारिक और निजी हित साधने के आरोप लगते रहे हैं। प्रेस क्लब पर कब्जे से लेकर कंपनी बाग, बाबू साहब तालाब की भूमि पर विवादित निर्माण तक इनके नाम जुड़ते रहे हैं।

समिति में शामिल रोहित साहू (फोटोग्राफर, दैनिक श्री इंडिया) को लेकर भी आपत्ति जताई जा रही है। बताया जाता है कि उनके अखबार की डीएवीपी मान्यता रद्द हो चुकी है। दिलचस्प यह है कि रोहित साहू और कौमी मुकाम (चित्रकूट) के पत्रकार ललित किशोर तिवारी — दोनों को एक ही मान्यता संख्या 5 जारी कर दी गई। यह सूचना कार्यालय की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।
समिति में राहुल निगम (ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन जिलाध्यक्ष) और अभय निगम (डीडी न्यूज स्ट्रिंगर) को भी जगह मिली है। दोनों पर प्रशासन से नज़दीकी और सत्ता के प्रति नरम रुख रखने के आरोप लगे हैं। पत्रकारों का कहना है कि वरिष्ठता और योग्यता को दरकिनार कर चहेतों को सदस्य बनाया गया।
पत्रकारों में भारी रोष
स्थानीय पत्रकारों ने इस समिति को लेकर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि समिति का गठन पारदर्शी तरीके से नहीं किया गया और न ही जिले के अधिकांश मान्यता प्राप्त पत्रकारों को इसमें शामिल किया गया।
पत्रकार इकबाल खान (अमृत प्रभात) का कहना है कि ”जिन लोगों को सदस्य बनाया गया है, उनमें से कई की पत्रकारिता पृष्ठभूमि ही संदिग्ध है। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री और शासन से मांग की है कि समिति को तत्काल निरस्त कर जिला सूचना अधिकारी पर कार्यवाही की जाए।”


