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बिल्डर ने ऋषिकेश के दो ब्लैकमेलर पत्रकारों की पोल खोली (सुनें टेप)

पुरुष प्रधान समाज में आज भी महिलाओं की सफलता से बहुत सारे लोग जलते हैं. खासर मानसिक रूप से हीन भावना से ग्रस्त पुरुषों के निशाने पर महिलाएं रहती हैं. समाज में महिलाओं का इस तरह के हीन भावना से ग्रस्त पुरुषों द्वारा शोषण किया जाना आज भी जारी है. बिना शार्टकट व समझौते के यदि कोई महिला सफल होती है तो इस तरह के कुछ मानसिक रोगी पुरुषों की आंख में वह किरकिरी की तरह चुभने लगती है. इसका जीता जागता उदाहरण ॠषिकेश में देखने को मिला है.

पुरुष प्रधान समाज में आज भी महिलाओं की सफलता से बहुत सारे लोग जलते हैं. खासर मानसिक रूप से हीन भावना से ग्रस्त पुरुषों के निशाने पर महिलाएं रहती हैं. समाज में महिलाओं का इस तरह के हीन भावना से ग्रस्त पुरुषों द्वारा शोषण किया जाना आज भी जारी है. बिना शार्टकट व समझौते के यदि कोई महिला सफल होती है तो इस तरह के कुछ मानसिक रोगी पुरुषों की आंख में वह किरकिरी की तरह चुभने लगती है. इसका जीता जागता उदाहरण ॠषिकेश में देखने को मिला है.

ॠषिकेश में एक चैनल के पत्रकार ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर आजतक की महिला पत्रकार का फर्जी आडियो वायरल कर उसे समाज में शर्मिन्दा किया. साथ ही उसने महिला पत्रकार को आजतक से निकलवाने के लिए एड़ी चोटी तक का जोर लगा दिया. लेकिन कहते हैं न कि झूठ की उम्र ज्यादा नहीं होती. सच्चाई एक न एक दिन सामने आती है. एक नया आडियो सामने आया है जिसमें 20,000 रुपए देने वाला बिल्डर खुद ब खुद सच्चाई को उजागर कर रहा है.

बिल्डर इस आडियो में कह रहा है कि कैसे उसके दोस्तों ने ही आजतक के नाम पर उससे 20 हजार रुपए वसूल लिए. बिल्डर यह भी स्वीकार कर रहा है कि आजतक की महिला पत्रकार ने न तो उसे फोन किया और न ही उससे पैसे मांगे. महिला व उसके बैनर के नाम पर उक्त दोनों पत्रकार ही उगाही कर रहे थे. आडियो में स्पष्ट रूप से सुना जा सकता है कि दोनों पत्रकारों को लेकर बिल्डर किस किस तरह की बातों और पूरे प्रकरण का खुलासा कर रहा है जिससे सच्चाई सामने आ रही है.

यहां तक कि जब बिल्डर ने महिला पत्रकार के देहरादून आफिस में जाकर लिखित में देने की बात कही तो दोनों पत्रकार उसे हाथ कटवाने जैसी बातें करते हुए मना कर रहे हैं. इससे उक्त पुरूष पत्रकारों की मंशा स्पष्ट होती है कि वह महिला पत्रकार के खिलाफ रचे गए षड्यंत्र में किस हद तक शामिल हैं. ऐसे षड्यंत्रकारी पत्रकारों को समाज व समाचार चैनलों द्वारा सजा देनी चाहिए. यहां तक कि इन जैसे पुरूष पत्रकारों का पत्रकारिता जगत में बहिष्कार किया जाना चाहिए ताकि कोई दूसरी निर्दोष महिला व पत्रकार साथी इनके गंदे मंसूबों की बलि न चढे.

ऋषिकेश से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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