Sushil Manav- जब ऐसे ऐसे लोग बुद्धि के पीछे लाठी लइके पड़े हों तो सीपीसीबी ही क्या करे. वैसे एक मोहतरमा कुछ रोज़ पहले पूछ रही थीं कि किस कलर की पहने हो….
Amit singh- कलर चेंज करने में इन लोगों को महारत हासिल है।
Yugal sharma- दूसरे वाले उससे भी बडे चालाक …. कपडे पहन कर डूबकी लगा रहे हैं 🙂
Avinash Dubey- कलर पहचानने वाला भी किसी कलर का ही पहनता होगा 🙂
Ashish Anand- बामन हैं, यही मुख्य बात है। बामन रिपोर्टर और चैनल इसलिए खिसिया गए थे थोड़ी देर को, क्योंकि भगदड़ में अच्छे खासे बामन काम आ गए थे। सब चैनल उनके ही हैं, रिश्तेदार हैं…
Sk Yadav- सिर्फ स्नान कर लेने से आपने इस चैनल और उनके संपादक और इस क्रांतिकारी रिपोर्टर की कुंभ मेले में की गई बेबाक रिपोर्टिंग को दरकिनार कर दिया। आप यह भी भूल गए कि यह वही अभिनव पांडे हैं जिन्होंने झूसी साइड की भगदड़ और मारे गए लोगों की खबर ब्रेक की थी और सरकार के निशाने पर भी आ गए थे। दो हफ्ते बाद विधान सभा में सरकार को मनाना पड़ा की अलग जगह भी भगदड़ में सात और लोग मारे गए हैं।
लल्लनटॉप ने कुंभ मेले के दौरान निष्पक्ष रिपोर्टिंग की है।
आपको यह पोस्ट डिलीट करनी चाहिए।
Subhash chand kushwaha- सिर्फ़ स्नान नहीं है यह. यह हर वैज्ञानिक सोच का खंडन है। रिपोर्टिंग के बाद भी उसके चलते रहने को जस्टीफ़ाई करना है। वह वैज्ञानिक सोच वाली रिपोर्टिंग नहीं है, पेट पूजा बस थी और फिर उसको वैधता देने के लिए उतर गए नहाने और फ़ोटो शेयर करने। बहुत कठिन है जनहित में एक पत्रकार का खड़ा होना। यह समझ आसानी से पैदा भी नहीं होती जो सुशील मानव जैसे साथियों में है।
Sushil manav- एसके यादव जी मैंने कुछ भी दरकिनार नहीं किया है। मैंने सिर्फ़ यह कहा है कि पत्रकार जागरुक व्यक्ति होता है. जब सीपीसीबी कह रहा है कि संगम में गंगा के जल में मल की मात्रा ज्यादा बढ़ गई है तब आप उसमें डुबकी मारकर किस जागरुकता या मूढ़ता का परिचय दे रहे हैं मेरा सवाल यह है!
सीपीसीबी की रिपोर्ट से पहले तमाम लोग डुबकी मारे हैं, आपने भी मारी है डुबकी, मैंने कोई सवाल उठाया क्या??
Mahendra mishra- ये तो विद्यार्थी परिषद में ही था। अपना कर्तव्य निभाने आया है।


