केंद्रीय सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों के आठ पदों के लिए सरकार को 161 लोगों के आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश समेत टीवी पत्रकार और विभिन्न बैकग्राउण्डों के आवेदकों ने नौकरी पाने में रुचि दिखाई है.
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने रिटार्यड कमांडर लोकेश बत्रा द्वारा दायर एक आरटीआई के जवाब में 161 आवेदकों की लिस्ट दी है.
इस लिस्ट में दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश अनूप कुमार मेंदीरत्ता, दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त राजेंद्र पाल उपाध्याय, सशस्त्र बलों के सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारी – लेफ्टिनेंट जनरल जयवीर सिंह नेगी, ग्रुप कैप्टन प्रवीण शुक्ला, कैप्टन अभय कुमार पलुस्कर के नाम शामिल हैं.
इसके अलावा लेफ्टिनेंट जनरल परमजीत सिंह मिन्हास, लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार मागो, लेफ्टिनेंट जनरल हर्ष गुप्ता, लेफ्टिनेंट जनरल पीआर वेंकटेश, लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह सलारिया समेत पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी पंकज अस्थाना और अजय भटनागर भी आवेदनकर्ताओं में शामिल हैं.
लिस्ट में तिरुवनंतपुरम से जनम टीवी से जुड़े पत्रकार जीके सुरेश बाबू, मैसूर विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान के रिटायर्ड प्रोफेसर मुजफ्फर हुसैन असदी भी आवेदकों में से हैं.
बिजनेस स्टैंडर्ड की वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय सूचना आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त और दस सूचना आयुक्त हैं. पारदर्शिता निगरानी संस्था में सूचना आयुक्तों के आठ पद रिक्त हैं.
सीआईसी आरटीआई मामलों में सर्वोच्च अपीलीय प्राधिकरण है जिसके पास उन सरकारी अधिकारियों पर 25,000 रुपये तक जुर्माना लगाने की शक्ति है जो समय पर आरटीआई याचिकाओं का जवाब नहीं देते हैं या कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं.
बता दें कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस साल 14 अगस्त को विज्ञापन जारी कर 8 सूचना आयुक्तों के पद के लिए आवेदन मांगे थे. सूचना का अधिकार अधिनियम की प्रक्रिया के अनुसार इच्छुक व्यक्तियों का विवरण समाचार पत्रों में विज्ञापन और डीओपीटी वेबसाइट के माध्यम से आमंत्रित किया जाता है.
आवेदकों के नाम एक खोज समिति (प्रधानमंत्री द्वारा गठित) को भेजे जाते हैं और इसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव करते हैं. शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों सहित सभी उम्मीदवारों के नाम उनके आवेदनों के साथ प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति को भेजे जाते हैं जिसमें विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भी शामिल होते हैं.
तीन सदस्यीय समिति द्वारा अनुमोदित नामों को राष्ट्रपति द्वारा पांच वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु , जो भी पहले हो तक के लिए नियुक्त किया जाता है.



